Team India : ट्रॉफी मंदिर क्यों ले गए – कीर्ति आजाद के सवाल पर भड़के हरभजन सिंह

Atul Kumar
Published On:
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Team India – 8 मार्च की रात अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम रोशनी, शोर और जश्न से भरा हुआ था। टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया था। ट्रॉफी उठाने के बाद खिलाड़ियों ने मैदान पर जश्न मनाया, फैंस ने आतिशबाजी की और पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई।

लेकिन जश्न के कुछ घंटों बाद की एक घटना ने क्रिकेट से ज्यादा राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया।

ट्रॉफी लेकर मंदिर पहुंचे कप्तान और टीम मैनेजमेंट

रिपोर्ट्स के मुताबिक जीत के बाद टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव, हेड कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह स्टेडियम के पास स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे।

बताया गया कि वे वहां टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी लेकर आशीर्वाद लेने गए थे।

भारत में खेल जीत के बाद मंदिर या धार्मिक स्थलों पर जाने की परंपरा नई नहीं है। कई खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंट जीतने के बाद अपने-अपने धार्मिक स्थलों पर जाकर धन्यवाद देते रहे हैं।

मंदिर जाने को लेकर उठे सवाल

मुद्दाप्रतिक्रिया
ट्रॉफी मंदिर ले जाई गईकुछ लोगों ने समर्थन किया
आलोचनाकीर्ति आजाद ने सवाल उठाए

कीर्ति आजाद ने जताई नाराजगी

1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और वर्तमान टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि टीम इंडिया को ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर शर्म आनी चाहिए।

उनका तर्क था कि यह जीत पूरे देश की है और इसे किसी एक धर्म से जोड़ना ठीक नहीं है।

कीर्ति आजाद का सवाल

सवाल
ट्रॉफी मंदिर ही क्यों ले जाई गई?
मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे क्यों नहीं?

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में बहस तेज हो गई।

ईशान किशन ने भी दिया जवाब

इस विवाद के बीच भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन का भी बयान सामने आया।

उन्होंने संक्षेप में कहा कि ऐसे सवाल पूछने के बजाय कुछ अच्छा सवाल पूछा जाना चाहिए।

हालांकि इस बयान के बाद बहस और तेज हो गई।

हरभजन सिंह ने किया पलटवार

पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने इस विवाद पर खुलकर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कीर्ति आजाद के बयान को बेतुका बताया।

हरभजन सिंह का बयान

मुद्दाप्रतिक्रिया
बयान“यह अजीब है कि वह इस पर पॉलिटिक्स कर रहे हैं।”
उनका तर्कटीम ट्रॉफी कहीं भी ले जा सकती है

हरभजन ने कहा कि अगर खिलाड़ियों ने भगवान से कोई मन्नत मांगी थी और जीत के बाद धन्यवाद देने गए, तो इसमें गलत क्या है।

उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों को उनकी आस्था के आधार पर जज नहीं किया जाना चाहिए।

“खुश रहो, जश्न मनाओ”

हरभजन सिंह ने यह भी कहा कि एक पूर्व क्रिकेटर से इस तरह की टिप्पणी सुनना दुखद है।

उनके मुताबिक देश ने वर्ल्ड कप जीता है और इस समय सभी को जश्न मनाना चाहिए, न कि राजनीति करनी चाहिए।

उन्होंने कहा:

“हम अपने धर्म में कहते हैं कि सभी धर्म एक जैसे हैं। भगवान अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन रास्ता एक ही है। अगर वे मंदिर, मस्जिद या चर्च जाते हैं तो सब एक ही है।”

खेल और राजनीति की बहस फिर तेज

भारत में खेल और राजनीति का रिश्ता अक्सर चर्चा में रहता है।

जब भी कोई बड़ी जीत होती है, तो खिलाड़ियों की व्यक्तिगत आस्था, जश्न के तरीके या बयान कभी-कभी विवाद का कारण बन जाते हैं।

इस मामले में भी वही हुआ—एक साधारण धार्मिक यात्रा से शुरू हुई बात जल्द ही राष्ट्रीय बहस बन गई।

आखिर असली मुद्दा क्या है?

इस विवाद का मूल सवाल यही है कि क्या खिलाड़ियों की व्यक्तिगत धार्मिक आस्था सार्वजनिक चर्चा का विषय बननी चाहिए या नहीं।

कुछ लोग मानते हैं कि राष्ट्रीय टीम को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष तरीके से व्यवहार करना चाहिए।

वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि खिलाड़ी भी इंसान हैं और उन्हें अपनी आस्था के अनुसार धन्यवाद देने का अधिकार है।

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