Under 19 : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को सम्मानित

Atul Kumar
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Under 19 – कभी-कभी खेल की दुनिया में ऐसे नाम सामने आते हैं जो सिर्फ रन या रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि अपनी कहानी से दिल जीत लेते हैं। बिहार से निकले युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी अब उसी कतार में खड़े दिखाई देते हैं।

मैदान पर बल्ले से तूफान मचाने वाला यह किशोर अब राष्ट्रपति भवन के दरबार में सम्मानित हुआ है—और यह पल सिर्फ उसका नहीं, पूरे बिहार के लिए गर्व का क्षण बन गया है।

वैभव सूर्यवंशी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया। खेल और प्रतिभा की इस दोहरी पहचान ने वैभव को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला खड़ा किया है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार क्या है?

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देश के उन बच्चों को दिया जाता है, जिन्होंने कम उम्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हों। यह पुरस्कार 5 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों को सात अलग-अलग श्रेणियों में दिया जाता है।

इन श्रेणियों में शामिल हैं:

  • बहादुरी
  • कला और संस्कृति
  • पर्यावरण
  • नवाचार
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • सामाजिक सेवा
  • खेल

हर पुरस्कार विजेता को एक पदक, प्रमाण पत्र और एक प्रशस्ति पुस्तिका दी जाती है। इस सम्मान को बच्चों के लिए देश का सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार माना जाता है।

राष्ट्रपति भवन में सम्मान, देश की नज़रें वैभव पर

राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक सेरेमनी नहीं था। यह उन बच्चों की पहचान थी, जो सीमित संसाधनों के बावजूद असाधारण सपने देखते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जब वैभव सूर्यवंशी को सम्मानित किया, तो बिहार के इस युवा खिलाड़ी की मेहनत को देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था से मान्यता मिली। खेल जगत में इसे एक बड़ा संकेत माना जा रहा है—कि भारत अब जमीनी स्तर की प्रतिभा को पहचानने में पीछे नहीं है।

विजय हजारे ट्रॉफी से दूरी, वजह बनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी

हालांकि यह सम्मान वैभव के लिए गर्व का विषय है, लेकिन इसका असर उनके क्रिकेटिंग शेड्यूल पर भी पड़ा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार ग्रहण करने के कारण वैभव सूर्यवंशी विजय हजारे ट्रॉफी के आगे के मुकाबलों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

याद दिला दें कि वैभव ने अपने पहले ही मुकाबले में 190 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर सभी को चौंका दिया था। लेकिन इसके बावजूद वह दूसरे राउंड में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं रहे।

कोच मनीष ओझा ने क्या कहा?

वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया। उनके मुताबिक, यह चयन से जुड़ा मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय कार्यक्रम की बाध्यता थी।

कोच मनीष ओझा ने कहा:

“वैभव मणिपुर के खिलाफ शुक्रवार का मैच इसलिए नहीं खेल पाया क्योंकि उसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार लेने के लिए दिल्ली जाना था। उसे सुबह 7 बजे सेरेमनी के लिए रिपोर्ट करना था।”

उन्होंने यह भी साफ किया कि वैभव अब विजय हजारे ट्रॉफी के आगे के मैचों में भी उपलब्ध नहीं रहेंगे।

अंडर-19 वर्ल्ड कप की तैयारी, अगला बड़ा लक्ष्य

क्रिकेट के लिहाज से यह ब्रेक स्थायी नहीं है। कोच मनीष ओझा के अनुसार, वैभव जल्द ही इंडिया अंडर-19 टीम के अन्य खिलाड़ियों के साथ जुड़ेंगे।

योजना के मुताबिक:

  • टीम जिम्बाब्वे के लिए रवाना होगी
  • अंडर-19 वर्ल्ड कप की तैयारी जारी है
  • टूर्नामेंट की शुरुआत 15 जनवरी से होगी

यानी राष्ट्रीय सम्मान के बाद अब अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी वैभव का इंतजार कर रही है।

क्रिकेट और सम्मान—दोनों का संतुलन

यह कहानी सिर्फ एक पुरस्कार या एक मैच छूटने की नहीं है। यह उस संतुलन की कहानी है, जहां एक खिलाड़ी को तय करना पड़ता है कि राष्ट्रीय मंच पर पहचान जरूरी है या घरेलू टूर्नामेंट में निरंतरता।

वैभव सूर्यवंशी के मामले में यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से बेहद अहम रहा। राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान उनके करियर का ऐसा अध्याय है, जो आगे चलकर मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास देगा।

बिहार से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

बिहार लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट के नक्शे में हाशिए पर रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में वैभव जैसे नाम यह धारणा तोड़ते नजर आ रहे हैं।

  • सीमित सुविधाएं
  • कम एक्सपोज़र
  • लेकिन असीम प्रतिभा

वैभव सूर्यवंशी उसी नई पीढ़ी का चेहरा हैं, जो सिर्फ सिस्टम का इंतजार नहीं करती, बल्कि अपनी परफॉर्मेंस से दरवाज़ा तोड़ती है।

निष्कर्ष: पुरस्कार से बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार सिर्फ एक मेडल नहीं है। यह संदेश है—कि भारत अब टैलेंट को उम्र, क्षेत्र या संसाधनों से नहीं तौलता।

वैभव सूर्यवंशी के लिए यह सम्मान एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं। विजय हजारे ट्रॉफी का एक मैच छूट सकता है, लेकिन इतिहास में दर्ज हुआ यह पल उनके करियर को लंबी उड़ान देने वाला साबित हो सकता है।

अगली बार जब वह मैदान पर उतरेंगे, तो सिर्फ बल्लेबाज़ नहीं होंगे—बल्कि राष्ट्रपति भवन से सम्मानित एक राष्ट्रीय प्रेरणा होंगे।

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