Ashes – एशेज सीरीज के बीच उस्मान ख्वाजा को लेकर सवाल अचानक तेज़ हो गए हैं। रन नहीं आ रहे, उम्र बढ़ रही है और टीम में नई पीढ़ी दरवाज़े पर खड़ी है। ऐसे माहौल में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन की टिप्पणी ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की बहस को और गर्म कर दिया है।
वॉन का मानना है कि ख्वाजा को चयनकर्ताओं के फैसले का इंतज़ार नहीं करना चाहिए—उन्हें खुद तय करना चाहिए कि कहानी का आख़िरी अध्याय कहां और कैसे लिखा जाए।
मौजूदा एशेज (2025–26) में ख्वाजा का फॉर्म उतार-चढ़ाव वाला रहा है। जगह बनी हुई है, लेकिन भरोसा हिलता दिख रहा है। और यहीं से “फेयरवेल टेस्ट” की चर्चा शुरू होती है।
वॉन की सलाह: चयनकर्ता नहीं, खिलाड़ी तय करे अंत
माइकल वॉन ने एक इंटरव्यू में 39 वर्षीय ख्वाजा के करियर की तारीफ़ करते हुए साफ़ शब्दों में कहा कि इतने लंबे समय तक खेलने वाले खिलाड़ी को अपने भविष्य का फैसला खुद करना चाहिए। वॉन के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी इंतज़ार करता रहा, तो करियर “अपने हिसाब से” खत्म होने का मौका हाथ से निकल सकता है।
उनकी बातों का सार यही है—
अगर विदाई हो, तो होम ग्राउंड पर, अपने तरीके से।
और एशेज से बेहतर मंच? शायद ही कोई।
एशेज 2025–26: फॉर्म, फिटनेस और दबाव
ख्वाजा का हालिया टेस्ट ट्रैक रिकॉर्ड पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। 2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में उन्होंने अहम पारियां खेलीं, लेकिन मौजूदा एशेज में वह निरंतरता नहीं दिखी, जिसकी उनसे उम्मीद रहती है।
- पर्थ टेस्ट: पीठ में खिंचाव
- ब्रिसबेन टेस्ट: बाहर
- एडिलेड टेस्ट: वापसी, नंबर-4 पर 82 रन
- मेलबर्न (MCG): फ्लॉप
यानी झलक दिखी है, लेकिन लंबी लकीर नहीं बनी। ऑस्ट्रेलिया के कोच एंड्रयू मैकडॉनल्ड ने MCG टेस्ट के बाद साफ किया कि ख्वाजा के भविष्य पर उनसे कोई बातचीत नहीं हुई है और बाहरी अटकलों को उन्होंने खारिज किया। यह बयान भले ही आधिकारिक सुकून दे, लेकिन बहस थमी नहीं है।
सिडनी टेस्ट: क्या यही विदाई का सही मंच?
वॉन की बातों में सबसे मजबूत तर्क सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) को लेकर है। एशेज में, घरेलू दर्शकों के सामने, करियर को अलविदा कहना—यह रोमांटिक भी है और सम्मानजनक भी।
वॉन का कहना है कि अगर ख्वाजा के पास अब भी “लड़ने की एनर्जी और कैपेसिटी” है, तो खेलते रहना जायज़ है। लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो सिडनी में एशेज टेस्ट को फेयरवेल बनाना एकदम फिट बैठता है।
उम्र और विकल्प: रेनशॉ–मैकस्वीनी की दस्तक
ख्वाजा के 39 साल के होने के साथ ही चयनकर्ताओं पर दबाव बढ़ रहा है। मैथ्यू रेनशॉ और नाथन मैकस्वीनी जैसे युवा नाम लगातार चर्चा में हैं। ऑस्ट्रेलिया का टॉप ऑर्डर अगले चक्र के लिए रीसेट की ओर बढ़ रहा है—और यह फैसला आसान नहीं होता।
बीसीसीआई नहीं, लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की सेलेक्शन फिलॉसफी भी साफ रही है: फॉर्म + फ्यूचर। और यही समीकरण ख्वाजा के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
2025 के आंकड़े: अब भी योगदान, लेकिन सवाल कायम
साल 2025 में ख्वाजा ने 18 पारियों में 614 रन बनाए हैं। इस दौरान श्रीलंका के खिलाफ 232 रन का दोहरा शतक भी आया—जो बताता है कि क्लास अब भी मौजूद है।
| साल | पारियां | रन | सर्वश्रेष्ठ |
|---|---|---|---|
| 2025 | 18 | 614 | 232 बनाम श्रीलंका |
आंकड़े बुरे नहीं हैं। लेकिन एशेज जैसे मंच पर अपेक्षाएं अलग होती हैं—और तुलना हमेशा शीर्ष से होती है।
ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम की चुप्पी
कोच मैकडॉनल्ड की ओर से “कोई बातचीत नहीं” का बयान बताता है कि फिलहाल टीम अंदरखाने यह मुद्दा सार्वजनिक नहीं करना चाहती। लेकिन जब पूर्व कप्तान खुलेआम विदाई की टाइमिंग सुझाने लगें, तो संदेश दूर तक जाता है।
फैसला उज़ी का, समय एशेज का
उस्मान ख्वाजा का करियर सम्मान, रन और यादगार पारियों से भरा है। सवाल यह नहीं कि उन्होंने क्या हासिल किया—सवाल यह है कि अंत कैसे होगा। माइकल वॉन की सलाह भावनात्मक जरूर है, लेकिन तर्कसंगत भी।
अगर लड़ाई बाकी है, तो जारी रहे।
अगर नहीं, तो एशेज में—SCG पर—अलविदा कहने से बेहतर मंच मुश्किल है।
अब देखना यह है कि उज़ी किस रास्ते को चुनते हैं।















