Usman Tariq – सुपर-8 का दबाव, न्यूजीलैंड जैसी टीम सामने, और सुर्खियों में कोई बल्लेबाज़ नहीं—एक स्पिनर। उस्मान तारिक। वजह? उनका अनोखा साइड-आर्म एक्शन, जो पहली नज़र में चौंकाता है और स्लो मोशन में और भी ज्यादा दिलचस्प लगता है। गेंद छोड़ने से पहले हाथ का हल्का-सा ठहराव… जैसे समय को आधा सेकेंड रोक दिया हो।
आईसीसी ने उनके एक्शन को दो बार क्लियर किया है, लेकिन चर्चा थमी नहीं। अब खुद तारिक ने पर्दा उठाया है—इस ‘रहस्य’ के पीछे की कहानी पर।
“यह टेनिस बॉल से शुरू हुआ था”
तारिक ने साफ कहा कि उनका एक्शन कोई अचानक की गई प्रयोगशाला वाली खोज नहीं है। यह टेनिस बॉल क्रिकेट से विकसित हुआ।
“अगर आप स्लो मोशन में मेरा एक्शन देखेंगे, तो टाइमिंग अभी भी है… मैं बस अपने एक्शन के फ्रैक्शन्स को तोड़ने की कोशिश करता हूं।”
यानी वह अपने मूवमेंट को हिस्सों में बांटते हैं। रन-अप, लोड-अप, डिलीवरी—हर चरण को नियंत्रित करते हैं। हाथ को क्षणभर रोकना दरअसल बल्लेबाज़ की टाइमिंग बिगाड़ने का तरीका है, न कि नियम तोड़ने का।
साइड-आर्म एक्शन पहले भी कई गेंदबाज़ अपना चुके हैं, लेकिन तारिक का ‘पॉज़’ उन्हें अलग बनाता है।
आईसीसी की क्लियरेंस और बहस
अनोखे एक्शन अक्सर सवाल खड़े करते हैं। इतिहास गवाह है—मुरलीधरन से लेकर सुनील नारायण तक, हर असामान्य एक्शन जांच के दायरे में आया है। तारिक को भी आईसीसी से दो बार क्लियरेंस मिल चुकी है।
इसका मतलब साफ है—तकनीकी रूप से उनका एक्शन वैध है।
लेकिन सोशल मीडिया के दौर में हर स्लो-मोशन क्लिप बहस छेड़ देता है। शायद यही वजह है कि तारिक ने खुद आगे आकर स्पष्ट किया।
छह-सात साल पहले… और आज
तारिक ने अपने सफर का भी जिक्र किया।
“छह या सात साल पहले मैं डोमेस्टिक क्रिकेट खेल रहा था। मुझे नहीं लगता कि मैं आज जितना तैयार होता।”
यह बयान बताता है कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही अहम है जितनी तकनीक। आज वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर हैं—लेजेंड्स और कमेंटेटर्स से तारीफ मिल रही है—और वह इसे एंजॉय कर रहे हैं।
न्यूजीलैंड के खिलाफ प्लान
सुपर-8 में हर मैच करो या मरो जैसा होता है। तारिक ने रणनीति पर ज्यादा खुलासा नहीं किया, लेकिन संकेत साफ था—
“अगर विकेट में स्पिनर्स के लिए कुछ है, तो यह हमारे प्लान को एग्जीक्यूट करने में मदद करेगा।”
न्यूजीलैंड के बल्लेबाज़ स्पिन के खिलाफ धैर्य रखते हैं। ऐसे में तारिक की वैरिएशन और वह ‘पॉज़’ अहम भूमिका निभा सकता है।
हेडबैंड की कहानी
और हां, चर्चा सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं। उनका हेडबैंड भी पहचान बन गया है।
“कभी-कभी बाल आंखों के सामने आ जाते हैं… इसलिए मैं हेडबैंड पहनता हूं। और अब जब इसकी इतनी तारीफ हो रही है, तो छोटे बालों के साथ भी पहनूंगा।”
क्रिकेट में स्टाइल भी कहानी का हिस्सा बन जाता है—और तारिक फिलहाल दोनों मोर्चों पर चर्चा में हैं।















