Kishan – विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 के पहले दिन को अगर एक लाइन में समेटना हो, तो यही कहा जाएगा—यह दिन घरेलू क्रिकेट के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
रिकॉर्ड टूटे, उम्मीदें बदलीं और एक ऐसा रनचेज़ देखने को मिला, जिसे देखकर पुराने स्कोर भी छोटे लगने लगे। इस ऐतिहासिक शाम के नायक बने कर्नाटक, जिन्होंने झारखंड के खिलाफ 413 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य न सिर्फ हासिल किया, बल्कि ऐसा करते हुए टूर्नामेंट का सबसे बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।
किसी ने नहीं सोचा था कि यह स्कोर चेज़ हो सकता है। लेकिन क्रिकेट अक्सर वहीं जाता है, जहां तर्क खत्म हो जाते हैं।
ईशान किशन का तूफान, जिसने कहानी लिखी
इस मैच की कहानी झारखंड की बल्लेबाज़ी से शुरू होती है। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए झारखंड ने 413 रन ठोक दिए। और इस स्कोर की आत्मा थे ईशान किशन।
ईशान ने सिर्फ 33 गेंदों में शतक पूरा किया और 39 गेंदों पर 125 रन की विस्फोटक पारी खेली। स्टेडियम में बैठे लोगों को लगा—मैच यहीं खत्म।
400 से ऊपर का स्कोर। विजय हजारे। सामने कर्नाटक।
काग़ज़ पर मुकाबला एकतरफा दिख रहा था।
जब इतिहास ने करवट बदली
लेकिन कर्नाटक की टीम अलग सोच लेकर उतरी थी।
मयंक अग्रवाल की कप्तानी में यह सिर्फ रनचेज़ नहीं था—यह एक स्टेटमेंट था। और उस बयान की शुरुआत हुई पहले ओवर से।
मयंक–पडिक्कल: शुरुआत ने ही तोड़ दी उम्मीदें
413 रन का पीछा करते हुए कर्नाटक को चाहिए थी बिजली जैसी शुरुआत।
और वही हुआ।
मयंक अग्रवाल और देवदत्त पडिक्कल ने पहले विकेट के लिए 11.5 ओवर में 114 रन जोड़ दिए।
- मयंक अग्रवाल: 34 गेंदों पर 54 रन
- स्ट्राइक रेट: 158+
- दबाव? न के बराबर
मयंक आउट हुए, लेकिन तब तक कहानी का रुख बदल चुका था।
देवदत्त पडिक्कल: पारी जो याद रहेगी
एक छोर पर देवदत्त पडिक्कल खड़े रहे—शांत, संतुलित और खतरनाक।
उन्होंने 118 गेंदों पर:
- 147 रन
- 10 चौके
- 7 छक्के
यह पारी सिर्फ बड़ी नहीं थी, स्मार्ट थी। जब तेजी चाहिए, तब अटैक। जब विकेट गिरा, तब एंकर।
यही वजह रही कि 400+ चेज़ कभी बोझ नहीं लगा।
अंत में अभिनव मनोहर का फिनिशिंग टच
जब लगा कि मैच अंत की ओर है, तब आए अभिनव मनोहर।
- 32 गेंदों पर नाबाद 56 रन
- स्ट्राइक रेट 175 से ऊपर
उनका साथ दिया ध्रुव प्रभाकर ने, जिन्होंने 22 गेंदों पर 40 रन बनाए।
और फिर 47.3 ओवर में वह पल आया—
कर्नाटक ने 413 रन चेज़ कर लिए।
स्टेडियम सन्न। रिकॉर्ड टूट चुका था।
विजय हजारे ट्रॉफी की सबसे बड़ी रनचेज़
इस जीत के साथ कर्नाटक ने विजय हजारे ट्रॉफी के इतिहास में सबसे बड़ी सफल रनचेज़ का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
विजय हजारे ट्रॉफी – सबसे बड़ी सफल रनचेज़
| स्कोर | टीम | विरोधी | साल |
|---|---|---|---|
| 413/5 | कर्नाटक | झारखंड | 2025 |
| 385/6 | आंध्र | गोवा | 2012 |
| 383/3 | कर्नाटक | मुंबई | 2024 |
| 383/7 | बंगाल | विदर्भ | 2025 |
यह पहली बार है जब विजय हजारे ट्रॉफी में 400+ स्कोर का सफल पीछा हुआ।
पहले दिन का असर: टूर्नामेंट का टोन सेट
यह सिर्फ एक मैच नहीं था। यह पूरे टूर्नामेंट के लिए संकेत था।
- पिचें बल्लेबाज़ों के पक्ष में हैं
- NRR सबसे बड़ा हथियार बनेगा
- 350–400 अब “सेफ स्कोर” नहीं
कर्नाटक की पहचान फिर मजबूत
कर्नाटक पहले से ही भारत की सबसे मजबूत घरेलू टीमों में गिनी जाती है।
इस मैच ने उस पहचान पर स्टैम्प लगा दी।
- कप्तान मयंक अग्रवाल
- अनुभवी बल्लेबाज़
- डेप्थ वाला मिडिल ऑर्डर
और सबसे अहम—निडर सोच।
यह सिर्फ जीत नहीं, इतिहास था
413 रन का पीछा करना हमेशा खास रहेगा।
लेकिन इसे 47.3 ओवर में करना—यह असाधारण है।
विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 का पहला दिन पहले ही बता चुका है कि:
- रिकॉर्ड टिकने वाले नहीं
- गेंदबाज़ों के लिए सीज़न लंबा होगा
- और फैंस के लिए—पूरा पैसा वसूल
कर्नाटक ने सिर्फ मैच नहीं जीता।
उन्होंने इतिहास लिख दिया।















