ODI : 93 रन, नर्वस 90 और एक और रिकॉर्ड – विराट कोहली की वडोदरा कहानी

Atul Kumar
Published On:
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ODI – 11 जनवरी 2026। वडोदरा का कोटम्बी स्टेडियम। सामने न्यूजीलैंड। स्कोरबोर्ड पर 301 रन का पहाड़। रोहित शर्मा जल्दी लौट चुके थे और स्टेडियम में हल्की बेचैनी तैरने लगी थी। तभी क्रीज़ पर आए विराट कोहली—और कहानी ने वही मोड़ लिया, जिसकी अब आदत हो चुकी है।

91 गेंदों में 93 रन।
आठ चौके।
एक छक्का।

शतक नहीं आया, लेकिन मैच भारत के हाथ से फिसला भी नहीं। कोहली ने एक बार फिर दिखा दिया कि क्यों बड़े रनचेज़ में उनका नाम सबसे पहले लिया जाता है।

शतक से 7 रन दूर, फिर वही नर्वस 90

यह पारी ऐतिहासिक थी, लेकिन अधूरी भी।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का 85वां शतक सिर्फ 7 रन दूर था, लेकिन किस्मत ने फिर वही पुराना खेल खेला। कोहली वनडे करियर में 7वीं बार ‘नर्वस 90’ का शिकार हो गए।

यह पहली बार नहीं है। और शायद आखिरी भी नहीं।

मैच से पहले सम्मान, मैच में इतिहास

इस मुकाबले की खास बात यह भी रही कि बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन ने मैच के दौरान रोहित शर्मा और विराट कोहली—दोनों को उनके भारतीय क्रिकेट में योगदान के लिए सम्मानित किया। यह एक तरह से उस विरासत का सेलिब्रेशन था, जो इन दोनों ने पिछले डेढ़ दशक में बनाई है।

और फिर, उसी मैच में कोहली ने इतिहास का एक और पन्ना पलट दिया।

संगकारा पीछे, अब सिर्फ सचिन आगे

जैसे ही कोहली ने अपनी पारी में 42 रन पूरे किए, वह श्रीलंका के महान बल्लेबाज़ कुमार संगकारा (28,016 रन) को पीछे छोड़ गए। इसके साथ ही विराट कोहली बन गए—

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज़।

अब उनसे आगे सिर्फ एक नाम है—
सचिन रमेश तेंदुलकर (34,357 रन)।

84 शतक और फिर वही सवाल

इस पारी के बाद चर्चा फिर उसी पुराने सवाल पर लौट आई—
क्या विराट कोहली सचिन तेंदुलकर के 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों के रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे?

फिलहाल कोहली 84 शतकों पर हैं।
शतक नहीं आया, लेकिन निरंतरता कायम है। और यही बात इस बहस को ज़िंदा रखती है।

नर्वस 90: विराट की अनचाही सूची

विराट कोहली के करियर में नर्वस 90 का जिक्र आते ही कुछ टीमें बार-बार सामने आती हैं—वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड।

वनडे क्रिकेट में कोहली अब तक 7 बार 90 के दशक में आउट हो चुके हैं।

विराट कोहली की वनडे नर्वस 90 सूची

स्कोरविपक्षस्थानतारीख
91बांग्लादेशमीरपुर7 जनवरी 2010
94वेस्टइंडीजकिंग्स्टन16 जून 2011
99वेस्टइंडीजविशाखापत्तनम24 नवंबर 2013
91ऑस्ट्रेलियापर्थ12 जनवरी 2016
92ऑस्ट्रेलियाईडन गार्डन्स21 सितंबर 2017
95न्यूजीलैंडधर्मशाला22 अक्टूबर 2023
93न्यूजीलैंडवडोदरा11 जनवरी 2026

नर्वस 90 से फर्क नहीं पड़ता—क्यों?

क्योंकि कोहली की महानता सिर्फ शतक से नहीं मापी जाती।
301 के चेज़ में 93 रन बनाकर उन्होंने:

  • रन रेट कंट्रोल किया
  • मिडिल ओवर्स में दबाव खत्म किया
  • और टीम को जीत की ओर मोड़ा

भारत ने यह लक्ष्य 49 ओवर में 6 विकेट खोकर हासिल कर लिया।

37 की उम्र, लेकिन भूख जस की तस

37 साल की उम्र में भी कोहली:

  • गैप खोजते हैं
  • स्ट्राइक रोटेट करते हैं
  • और गलत गेंद का इंतज़ार करते हैं

यही वजह है कि रिकॉर्ड टूटते रहते हैं, भले ही शतक हर बार न आए।

सचिन से तुलना—अब भी ज़िंदा क्यों?

क्योंकि कोहली अब सिर्फ रन नहीं बना रहे,
वह इतिहास के करीब आते जा रहे हैं।

सचिन का 100 शतक का रिकॉर्ड अभी सुरक्षित है।
लेकिन हर ऐसी पारी—93 जैसी—उस बहस में एक नई चिंगारी डाल देती है।

अधूरा शतक, पूरी कहानी

वडोदरा की यह पारी शतक नहीं थी।
लेकिन यह एक और सबूत थी कि विराट कोहली का दौर अब भी जारी है।

नर्वस 90? हां।
रिकॉर्ड? एक और।
मैच विनिंग इंपैक्ट? हमेशा की तरह।

और शायद यही वजह है कि हर बार जब कोहली क्रीज़ पर उतरते हैं, सवाल सिर्फ रन का नहीं होता—
इतिहास का होता है।

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