Kohli – विशाखापत्तनम की हवा में राहत भी थी और रफ्तार भी—क्योंकि भारत ने न सिर्फ दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से हराकर सीरीज 2-1 पर कब्ज़ा किया, बल्कि इस निर्णायक मुकाबले के बाद विराट कोहली ने अपनी बैटिंग, आत्मविश्वास और बीते दो-तीन साल की मानसिक यात्रा पर जिस ईमानदारी से बात की, उसने क्रिकेट संवाद को एक अलग गहराई दे दी।
प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे कोहली ने इस बार रन ही नहीं बनाए—उन्होंने अपने मन का भी दरवाज़ा खोल दिया।
विराट कोहली—“मैंने पिछले 2–3 साल में ऐसा महसूस नहीं किया”
तीसरे वनडे में 65* और सीरीज में लगातार प्रभावी प्रदर्शन के बाद विराट ने कहा:
“ईमानदारी से कहूं, जिस तरह से मैंने ये सीरीज खेला, ये मेरे लिए काफी संतोषजनक रहा है। मेरे दिमाग में अच्छा महसूस होता है—मैंने पिछले 2–3 साल में ऐसा नहीं खेला है।”
ये लाइनें सुनकर साफ महसूस हुआ कि यह सीरीज सिर्फ उनके लिए एक आंकड़ा नहीं—एक राहत थी।
विराट ने माना कि इतने साल खेलने के बाद खिलाड़ी अपने आप पर शक करने लगता है, खासकर एक बल्लेबाज़ जो एक छोटी-सी गलती से आउट हो जाता है।
रांची का शतक—‘खास’ क्यों?
कोहली ने बताया कि रांची में लगाया शतक उन्हें भीतर तक छू गया क्योंकि:
- वह ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद कोई मैच खेले बिना सीधे इस सीरीज में उतरे थे
- उन्हें नहीं पता था कि बैट से प्रतिक्रिया कैसी होगी
- मैच के दिन की ऊर्जा और रिद्म ने उन्हें भरोसा दिया कि “अब भी सब ठीक है, अब भी मैं वही कर सकता हूं”
उनके शब्द थे:
“रांची मेरे लिए बहुत खास है… उस दिन ऊर्जा कैसी थी, वह मैं कभी नहीं भूलूंगा।”
यह बयान उन क्रिकेट प्रेमियों के लिए भी सुकूनभरा है जो पिछले कुछ सालों में कोहली की मानसिक लड़ाई और वापसी को करीब से महसूस कर चुके हैं।
“जब मैं आज़ादी से खेलता हूँ, मुझे पता है कि मैं छक्के लगा सकता हूँ”
मजेदार बात यह है कि विराट ने अपने गेम का एक और सच बताया:
- वह खुद को फिर से फ्री-फ्लो मोड में पा रहे हैं
- उन्हें पता है कि उनकी रेंज कितनी बड़ी है
- और हाँ—वह मौके आने पर बड़े शॉट आसानी से लगा सकते हैं
यह बयान उनके हालिया मैचों की झलक भी देता है—रायपुर, रांची और फिर विशाखापत्तनम।
स्ट्राइक रेट, शॉट चयन और टाइमिंग—सब पुराने लेवल पर वापस।
“लंबे समय तक खेलो तो शक भी आता है… यही यात्रा है”
कोहली का यह स्वीकार करना कि 15–16 साल बाद भी खिलाड़ी मानसिक असुरक्षा महसूस करता है, उनके अनुभव को और अधिक वास्तविक बना देता है।
“आप बेहतर बनते जाते हैं, एक व्यक्ति के रूप में भी। खेल आपको निखारता है।”
यह वो कोहली हैं जो सिर्फ एक आक्रामक बल्लेबाज़ नहीं—अब क्रिकेट का दार्शनिक पक्ष भी समझते हैं।
रोहित–विराट: “खुशी है कि हम दोनों इतने लंबे समय से टीम के लिए कर रहे हैं”
कोहली ने रोहित के लिए भी बेहद गर्मजोशी से बात की:
- दोनों ने निजी और टीम दोनों स्तर पर लंबा सफर तय किया
- बड़े मैचों में दोनों भरोसे का दूसरा नाम हैं
- और सीरीज के निर्णायक क्षणों में यह जोड़ी आज भी उतनी ही खतरनाक है
कोहली बोले:
“जब स्कोर 1-1 होता है, हमें लगता है कि टीम के लिए कुछ खास करना है… बस खुशी है कि हम दोनों इतने लंबे समय से ऐसा कर रहे हैं।”
क्रिकेट में जोड़ी सिर्फ ओपनिंग पार्टनरशिप से नहीं बनती—
विराट और रोहित की जोड़ी भारतीय क्रिकेट का पूरा युग है।
भारत की बल्लेबाज़ी—जायसवाल, रोहित, विराट… एकदम ‘क्लिनिकल फिनिश’
तीसरे वनडे की चेज़ पूरी तरह एकतरफा थी:
- यशस्वी जायसवाल – 116 (121)*
- रोहित शर्मा – 75 (73)
- विराट कोहली – 65 (45)*
39.5 ओवर में 271 रन—61 गेंद शेष रहते जीत।
दक्षिण अफ्रीका गेंदबाज़ी में शुरू से ही दबाव में थी।
केशव महाराज को छोड़कर बाकी किसी के पास जवाब नहीं था।
गेंदबाज़ी में कृष्णा–कुलदीप की राहत
भारत ने अफ्रीका को 270 पर रोका, और इसमें:
- प्रसिद्ध कृष्णा – 4 विकेट
- कुलदीप यादव – 4 विकेट
- अर्शदीप – 1
- जडेजा – 1
डिकॉक के शतक के बावजूद मिडिल ओवर्स में भारत का कंट्रोल शानदार था।















