World Cup : रिकॉर्ड, ट्रॉफी और रैंकिंग 35+ कोहली का जलवा

Atul Kumar
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World Cup – उम्र बढ़ना आम तौर पर खेल करियर के ढलान का संकेत माना जाता है। लेकिन विराट कोहली उस परिभाषा को बार-बार तोड़ते रहे हैं। 35 साल की उम्र पार करने के बाद, जब ज्यादातर बल्लेबाज अपने खेल को समेटने लगते हैं, कोहली ने उल्टा गियर बदला—और 2026 में एक बार फिर दुनिया के नंबर-1 वनडे बल्लेबाज बन गए। यह सिर्फ रैंकिंग की वापसी नहीं है, बल्कि उस मानसिकता की जीत है जो कहती है: जब तक भूख है, उम्र सिर्फ एक नंबर है।

कोहली के करियर में यह दौर शायद सबसे दिलचस्प है। पहले की तरह आक्रामक, लेकिन अब ज्यादा परिपक्व। पहले की तरह फिट, लेकिन अब ज्यादा स्मार्ट। और सबसे अहम—पहले की तरह ही लगातार रन बनाने वाले।

35 के बाद भी नंबर-1: क्यों यह खास है?

क्रिकेट इतिहास में बहुत कम खिलाड़ी हैं जो 35 की उम्र के बाद भी वर्ल्ड क्रिकेट पर असर डालते रहे हों। विराट कोहली ने यह न सिर्फ किया, बल्कि सबसे कठिन फॉर्मेट—वनडे क्रिकेट—में किया, जहां निरंतरता सबसे बड़ी चुनौती होती है।

आईसीसी की ताजा रैंकिंग में कोहली का फिर से टॉप पर पहुंचना इस बात का सबूत है कि नई पीढ़ी के आने के बावजूद वह आज भी बेंचमार्क बने हुए हैं।

विश्व कप 2023: जहां कोहली ने इतिहास लिखा

35 के बाद कोहली की सबसे बड़ी उपलब्धि अगर किसी एक टूर्नामेंट में देखनी हो, तो वह वनडे विश्व कप 2023 है।

एक ही विश्व कप में 765 रन—यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का उदाहरण था। हर मैच में टीम को जरूरत थी और हर मैच में कोहली ने जिम्मेदारी उठाई।
नतीजा?

  • टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन
  • प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब

बड़े मंच, बड़ा खिलाड़ी

कोहली की खासियत हमेशा यह रही है कि वह बड़े मैचों में और बेहतर हो जाते हैं। 35 के बाद भी इसमें कोई कमी नहीं आई।

  • विश्व कप सेमीफाइनल में शतक
  • नॉकआउट मुकाबलों में दबाव के बीच रन
  • आईसीसी टूर्नामेंट्स में 81.91 का औसत

ट्रॉफियों में भी योगदान

अक्सर आलोचक कहते रहे हैं कि कोहली के नाम बड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड हैं, लेकिन टीम ट्रॉफियां कम। 35 के बाद यह तर्क भी कमजोर पड़ गया।

  • टी20 विश्व कप जीत: फाइनल में टॉप स्कोरर
  • चैंपियंस ट्रॉफी: सेमीफाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच
  • भारत के लिए लगातार निर्णायक पारियां

इन जीतों में कोहली सिर्फ टीम का हिस्सा नहीं थे, बल्कि फ्रंट से लीड कर रहे थे।

IPL और RCB: अधूरा सपना पूरा

आईपीएल में कोहली का रिश्ता हमेशा भावनात्मक रहा है। सालों तक रन बने, लेकिन ट्रॉफी दूर रही। 35 के बाद उन्होंने यहां भी कहानी बदली।

  • RCB के लिए सबसे ज्यादा रन
  • पूरे सीजन में निरंतरता
  • और आखिरकार आईपीएल ट्रॉफी

यह सिर्फ एक टीम की जीत नहीं थी, बल्कि एक खिलाड़ी के धैर्य की जीत थी।

निरंतरता: कोहली की सबसे बड़ी ताकत

कोहली की असली पहचान उनके शॉट्स नहीं, बल्कि उनकी कंसिस्टेंसी है।

35 के बाद:

  • लगातार 5 वनडे मैचों में 50+ स्कोर
  • ICC टूर्नामेंट्स में 4 शतक
  • बड़े देशों के खिलाफ औसत में कोई गिरावट नहीं

यही वजह है कि 2013 से 2026 तक, अलग-अलग दौर में, वह कई बार नंबर-1 बने। पीढ़ियां बदलीं, गेंदबाज बदले, लेकिन कोहली का नाम वही रहा।

35 के बाद विराट कोहली की 12 बड़ी उपलब्धियां

नंबरउपलब्धि
1एक विश्व कप में 765 रन (वर्ल्ड रिकॉर्ड)
2विश्व कप सेमीफाइनल में शतक
32023 WC प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट
4ICC ODI क्रिकेटर ऑफ द ईयर
5टी20 विश्व कप जीत, फाइनल में टॉप स्कोर
6चैंपियंस ट्रॉफी जीत, सेमीफाइनल में POM
7RCB के साथ IPL ट्रॉफी
8ICC टूर्नामेंट्स में 81.91 का औसत
9ICC इवेंट्स में 5 POM + 1 POT
10साउथ अफ्रीका सीरीज में प्लेयर ऑफ द सीरीज
11लगातार 5 वनडे 50+ स्कोर
122026 में फिर नंबर-1 वनडे बल्लेबाज

क्या यह कोहली का बेस्ट फेज है?

शायद रन के लिहाज से नहीं, लेकिन प्रभाव के लिहाज से—हां।
यह वह दौर है जहां कोहली सिर्फ खुद के लिए नहीं, बल्कि टीम की जरूरत के हिसाब से खेलते हैं।
कभी एंकर, कभी एक्सेलेरेटर।
कभी आक्रामक, कभी धैर्यवान।

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