Kohli – 37 की उम्र। करियर के आख़िरी पड़ाव की बातें। रिटायरमेंट की अटकलें।
और फिर मैदान पर उतरकर वही भूख, वही जुनून, वही रन।
विराट कोहली को देखकर यही लगता है कि यह खिलाड़ी तब तक रुकने वाला नहीं, जब तक उसका मन और बल्ला—दोनों साथ दे रहे हैं। और यही बात अब खुलकर कही है भारत के पूर्व क्रिकेटर और कोच डब्ल्यूवी रमन ने।
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ वडोदरा वनडे में 93 रन की शानदार पारी खेलने के बाद कोहली एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। भारत ने 301 रन का लक्ष्य चेज़ किया, कोहली प्लेयर ऑफ द मैच बने, और सवाल फिर वही—
कब तक खेलेंगे विराट?
“सुबह उठकर जैसा महसूस होता है, उसी पर फैसला होता है”
डब्ल्यूवी रमन ने अपने यूट्यूब चैनल पर विराट कोहली के भविष्य को लेकर बेहद दिलचस्प और सटीक बात कही। उन्होंने साफ किया कि ऐसे खिलाड़ी कैलेंडर देखकर नहीं, फीलिंग देखकर फैसले लेते हैं।
रमन के शब्दों में,
“ऐसे क्रिकेटर आमतौर पर इस आधार पर फैसले लेते हैं कि सुबह उठने पर उन्हें कैसा महसूस होता है। विराट कोहली भी अलग नहीं हैं। वह तब तक खेलते रहेंगे, जब तक खेल को एंजॉय कर रहे हैं और रन बना रहे हैं।”
यानी, जब तक कोहली को खुद लगेगा कि वह मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ दे पा रहे हैं—तब तक रिटायरमेंट कोई एजेंडा नहीं है।
सिर्फ खेलना नहीं, अपनी लेगेसी से भी ईमानदारी
रमन ने एक और अहम बात कही—लेगेसी।
उनका मानना है कि विराट कोहली सिर्फ खेल से नहीं, बल्कि अपनी बनाई हुई पहचान से भी समझौता नहीं करेंगे।
“जब तक वह अपनी रेप्युटेशन और अपनी लेगेसी के साथ न्याय नहीं कर लेते, तब तक वह खेलते रहेंगे।”
और यह बात आंकड़ों में भी झलकती है।
रिकॉर्ड्स जो खुद बोलते हैं
वडोदरा वनडे सिर्फ एक मैच नहीं था।
वह विराट कोहली के करियर में एक और मील का पत्थर लेकर आया।
- इंटरनेशनल क्रिकेट में 28,000+ रन
- कुमार संगकारा (28,016) को पीछे छोड़ते हुए
- अब सिर्फ सचिन तेंदुलकर (34,357) आगे
सिर्फ वनडे, लेकिन दबदबा पूरा
कोहली अब:
- टेस्ट क्रिकेट से रिटायर
- टी20 इंटरनेशनल से रिटायर
- और सिर्फ वनडे क्रिकेट खेल रहे हैं
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि एक ही फॉर्मेट में खेलने के बावजूद उनका प्रभाव कम नहीं हुआ है।
557 इंटरनेशनल मैच
औसत – 52.66
84 शतक
146 अर्धशतक
ये आंकड़े किसी ऐसे खिलाड़ी के नहीं लगते, जो “बस समय काट रहा हो”।
“आलोचकों को जवाब मैदान पर मिलता है”
डब्ल्यूवी रमन ने कोहली के आलोचकों पर भी सीधी बात कही। उनका कहना है कि विराट बार-बार यह साबित करते रहे हैं कि वह अपने टर्म्स पर जाएंगे।
रमन बोले,
“कोहली अपने आलोचकों को संदेश दे रहे हैं कि वह आने वाले समय में टिके रहेंगे। और जब उन्हें ठीक लगेगा, तभी स्टेज छोड़ेंगे।”
यही विराट कोहली का डीएनए है—
बाहर से कोई टाइमलाइन नहीं,
कोई प्रेशर नहीं,
कोई फेयरवेल प्लान नहीं।
क्यों अब भी खतरनाक हैं विराट?
37 की उम्र में भी कोहली इसलिए अलग हैं क्योंकि:
- फिटनेस अभी भी टॉप लेवल की है
- गेम अवेयरनेस पहले से बेहतर है
- और सबसे अहम—भूख खत्म नहीं हुई है
आगे क्या?
वनडे वर्ल्ड कप 2027 अभी दूर है।
लेकिन अगर मौजूदा फॉर्म को देखें, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि विराट कोहली:
- अभी थके नहीं हैं
- अभी संतुष्ट नहीं हैं
- और अभी खत्म नहीं हुए हैं
रिटायरमेंट की तारीख शायद उनके फोन में भी सेव नहीं है।















