Ashes 2025 – पर्थ की ठंडी हवा में पहली ही शाम यह साफ हो गया था कि एशेज 2025 इंग्लैंड के लिए आसान नहीं होने वाली। लेकिन जिस तरह पहला टेस्ट दो दिनों में खत्म हुआ और इंग्लैंड 8 विकेट से हार गया—उसके बाद सबसे बड़ा विस्फोट मैदान में नहीं, इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जेफ्री बॉयकॉट के कॉलम में हुआ।
बॉयकॉट ने इंग्लैंड की टीम को “बेवकूफी भरी गलतियां” दोहराने वाला बताया और साफ कहा—“यह टीम अपनी सोच की वजह से हार रही है।”
बॉयकॉट का हमला—“एक ही मूर्खतापूर्ण हरकतें… कैसे सीरियस लें?”
द टेलीग्राफ में लिखे गए अपने तीखे कॉलम में बॉयकॉट ने कहा:
“जब आप बार-बार एक ही बेवकूफी भरी हरकतें करके टेस्ट मैच गंवाते रहते हैं, तो आपको गंभीरता से लेना मुश्किल है।”
यह टिप्पणी इसलिए और तगड़ी लगी क्योंकि ठीक एक दिन पहले बेन स्टोक्स ने दावा किया था कि “पूर्व खिलाड़ी हमारी आलोचना नहीं करते, खेल आगे बढ़ चुका है।”
जवाब में बॉयकॉट ने साफ कहा—अनुभव आज भी मायने रखता है।
40 रन की बढ़त, लेकिन बैटिंग फिर ढही
इंग्लैंड ने पर्थ की उछालभरी पिच पर जबरदस्त गेंदबाज़ी की थी।
- पहली इनिंग में ऑस्ट्रेलिया को 132 पर आउट किया
- 40 रन की लीड ली
- और मैच अपने कंट्रोल में ला लिया
लेकिन दूसरी पारी में वही पुरानी कहानी—
100/1 से गिरकर 164 ऑल आउट।
यही वह मोड़ था जहाँ बॉयकॉट फिर भड़क गए।
बॉयकॉट का विश्लेषण—”डकेट को अच्छी बॉल मिली, पर पोप और ब्रुक ने विकेट फेंके”
उन्होंने तीन प्रमुख विकेटों पर कड़ी टिप्पणी की:
- डकेट: “ठीक है, उन्हें एक अच्छी गेंद मिली। ऐसा हो जाता है।”
- ओली पोप: “ऑफ-स्टंप से बाहर वाइड गेंद पर दूसरी बार शॉट फेंका। उसे कैसे नहीं पता चला कि यह सकर बॉल है जो उसे बेवकूफी करने के लिए फुसला रही है?”
- हैरी ब्रुक: “3 गेंदों में आउट… टीम खुशी से सीधे निराशा की गहराई में चली गई।”
उन्होंने कहा कि इंग्लैंड ने मोमेंटम ऐसे खोया जैसे चाय का एक कप बनने में वक्त लगता है—और उतने में मैच ऑस्ट्रेलिया की मुट्ठी में चला गया।
हेड की पारी—और इंग्लैंड की रणनीति पूरी तरह बिखरी
ट्रैविस हेड ने चौथी पारी में वो तूफान मचाया जिसे इंग्लैंड रोक नहीं पाया।
69 गेंदों में शतक, 83 गेंदों में 123 रन—और इंग्लैंड के बॉलिंग प्लान हवा हो गए।
बॉयकॉट ने लिखा:
“एक बार हेड ने मोमेंटम पकड़ लिया, इंग्लैंड की चाल बिगड़ गई। फिर वे लगातार बाउंसर फेंकते रहे—बिना सोचे समझे।”
“बैजबॉल… अतिआत्मविश्वास… गलत फैसले—यही वजहें हार की जड़ हैं”
बॉयकॉट ने अंत में जो बात कही, वह इंग्लैंड की पूरी रणनीति पर चोट करती है:
“मुश्किल पलों में बैट्समैन, बॉलर और कप्तान को तुरंत सोचना पड़ता है। दुख की बात यह है कि हमारे खिलाड़ियों के पास काम करने का सिर्फ एक तरीका है। बैजबॉल, गलत फैसले या अतिआत्मविश्वास—जो भी कह लो, इससे भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों को हराना असंभव हो जाता है।”
पर्थ की हार सिर्फ एक मैच की हार नहीं—यह इंग्लैंड के ‘नए जमाने के क्रिकेट’ बनाम परंपरागत टेस्ट समझ के बीच टकराव का सबसे ताज़ा उदाहरण है।
आगे एशेज लंबी है, लेकिन बॉयकॉट का यह प्रहार इंग्लैंड ड्रेसिंग रूम तक ज़रूर गूंजेगा।
















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