BCCI – बरसापारा स्टेडियम में चल रहे टेस्ट के दूसरे दिन जैसे-जैसे सूरज तेज हुआ, कुलदीप यादव की आवाज़ भी थोड़ी कड़वी होती गई। दक्षिण अफ्रीका का निचला क्रम ऐसा खेला कि भारतीय गेंदबाज़ों को 489 तक खिंचती पहली पारी झेलनी पड़ी। लेकिन सबसे चुभने वाली बात? वो पिच—जिसे कुलदीप ने खुलकर “सड़क” कह दिया।
ऐसा बयान किसी जूनियर ने दिया होता तो बात अलग थी, लेकिन भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिनर ने यह टिप्पणी ऐसे समय की जब यह गुवाहाटी ग्राउंड बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के घरेलू मैदान पर पहली बार टेस्ट होस्ट कर रहा है।
“यह तो सड़क है”—कुलदीप का तीखा कमेंट
कुलदीप से जब कोलकाता और गुवाहाटी की पिच का अंतर पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कान में तंज का हल्का नमक मिलाते हुए कहा—
“कोलकाता का विकेट तो अलग था। यह तो सड़क की तरह है… बिल्कुल सपाट।”
स्पिनर का इशारा साफ था—गेंदबाजों के लिए बरसापारा की पिच पर काम करना मुश्किलों का पहाड़ है।
मदद न के बराबर थी, और इसी वजह से दक्षिण अफ्रीका का निचला क्रम छक्के छुड़ाते हुए स्कोर को लगभग 500 तक ले गया।
कुलदीप खुद भारत के सबसे सफल गेंदबाज़ रहे—29.1 ओवर, 115 रन, 4 विकेट—मगर पिच ने जिस तरह साथ नहीं दिया, उसने उनकी झुंझलाहट बढ़ा दी।
“टेस्ट क्रिकेट है, शिकायत नहीं”—लेकिन दर्द साफ दिखा
कुलदीप ने आगे कहा कि ऐसी परिस्थितियों में गेंदबाजों को सिर्फ जुझारूपन दिखाना पड़ता है।
उनके शब्दों में—
“यह सिर्फ दबदबे की बात नहीं। अच्छी बल्लेबाजी पिच पर कैसे वापसी करते हैं, यही मायने रखता है। विकेट से मदद नहीं मिल रही थी, लेकिन यह टेस्ट क्रिकेट है… इसका मज़ा लेना चाहिए।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि तेज़ गेंदबाजों को भी खास सपोर्ट नहीं दिखा, और ऐसे में स्पिनरों से ज्यादा उम्मीद रखना व्यर्थ था।
पहले सत्र में हल्की उम्मीद, फिर पूरा फ्लैट
कुलदीप ने खुलकर कहा कि शुरुआती सुबह की नमी ने उन्हें कुछ टर्न दिया, लेकिन उसके बाद की पाँच सेशन…
“स्पिनरों के लिए कुछ नहीं। आज तो बिल्कुल भी नहीं। मुझे लगभग कोई टर्न नहीं मिला। मैं और जडेजा इस पर बात कर रहे थे।”
साफ है कि भारतीय स्पिन जोड़ी लगातार एक जैसा संघर्ष कर रही थी—न गेंद पकड़ी, न पिच टूटी, न उछाल मिला।
निचले क्रम की साझेदारी ने भारत को परेशान किया
मार्को यानसन की लंबी, टिकाऊ और आक्रामक पारी ने भारतीय गेंदबाज़ों की योजना बिगाड़ दी।
कुलदीप बोले—
“जब साझेदारियां लंबी होती हैं, और विपक्ष अच्छी स्थिति में होता है, तो वे इसका फायदा उठाते हैं। विकेट बल्लेबाजी के लिए बहुत अच्छा था।”
एक तरह से कुलदीप यह कह रहे थे—दक्षिण अफ्रीका ने मौका पकड़ा, भारत ने बस मेहनत की।
पिच विवाद अब कहाँ जाएगा?
दिलचस्प यह है कि बरसापारा स्टेडियम—जो बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया का होम ग्राउंड है—पहली बार टेस्ट करा रहा है, और उसी मौके पर एक सीनियर भारतीय खिलाड़ी ने पिच को “सड़क” कह डाला।
अब देखना होगा कि बोर्ड इस बयान को कैसे लेता है, क्योंकि पिच की आलोचना भारत में हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रही है।
















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