Test – जब गुवाहाटी टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के लिए सेनुरन मुथुसामी ने अपना बल्ला उठाकर शतक का जश्न मनाया, तो तस्वीर सिर्फ 109 रनों की इनिंग से कहीं बड़ी थी। यह कहानी एक ऐसे खिलाड़ी की थी जिसे कभी लगता था कि उसका इंटरनेशनल करियर भारत में शुरू होकर यहीं खत्म हो गया है।
लेकिन छह साल बाद—उसी भारत में—उसने अपनी ज़िंदगी की सबसे यादगार पारी खेल दी।
2019: भारत दौरे ने almost करियर खत्म कर दिया था
मुथुसामी ने 2019 में भारत के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था।
उम्मीदें बड़ी थीं, लेकिन प्रदर्शन इससे उलट—पूरी सीरीज में सिर्फ 2 विकेट।
टीम से बाहर, निराशा बढ़ती गई, और यहीं से उन्होंने मान लिया—
“शायद मैं फिर कभी भारत में नहीं खेल पाऊँगा।”
यह बयान उन्होंने खुद दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद स्वीकार किया।
2025: वापसी की असली पटकथा—पाकिस्तान में 11 विकेट + 89*
बीच के चार साल तक उन्हें टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिला।
लेकिन उन्होंने हाथ नहीं छोड़ा—घरेलू क्रिकेट में कड़ी मेहनत, फिटनेस, रिदम और लगातार धैर्य।
और 2025 में पाकिस्तान दौरे पर बड़ी वापसी:
- पहले टेस्ट में 11 विकेट
- दूसरे टेस्ट में नाबाद 89 रन
यही प्रदर्शन उन्हें फिर से मज़बूत आत्मविश्वास के साथ भारत लेकर आया।
गुवाहाटी में मैच-बचाने वाला शतक—109 रन, स्थिति 5/201
भारत के खिलाफ इस टेस्ट में साउथ अफ्रीका की हालत 201/5 थी।
मैच एक मोड़ पर था—और फिर मुथुसामी क crease पर आए।
धीरे-धीरे पिच पढ़ी, गेंदबाज़ों को थकाया और शॉट्स निकालते गए।
उनका 109 रन का शतक न सिर्फ SA को 489 के विशाल स्कोर तक पहुंचा गया, बल्कि मैच की दिशा बदल दी।
यह सिर्फ शतक नहीं—यह उनके करियर की पुनर्जन्म कहानी थी।
“मेरी यात्रा अनोखी रही है”—मुथुसामी ने खोला दिल
दूसरे दिन के बाद उन्होंने कहा—
“2019 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का पहला अनुभव भारत में मिला—लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ। लगा था कि टेस्ट करियर शायद खत्म हो गया है।”
उन्होंने यह भी कहा—
“मैं कभी नहीं सोचता था कि फिर से भारत में खेल पाऊँगा। लेकिन समर्थन मिलता रहा—कोचों, परिवार, साथियों से। क्रिकेट एक सफर है, जिसे दिन-प्रतिदिन जीना पड़ता है।”
भारतीय जड़ें—तमिलनाडु के नागपट्टिनम से कनेक्शन
बहुत कम लोग जानते हैं कि मुथुसामी का परिवार भारतीय मूल का है।
उनके पूर्वज तमिलनाडु के नागपट्टिनम से आते हैं।
उन्होंने बताया—
“मेरी जड़ें भारतीय हैं, लेकिन यह कई पीढ़ियों पुरानी बात है। मेरी मां और मौसियों ने भारत जाकर अपने परिवार से मुलाकात की है, लेकिन मैं अब तक नहीं जा पाया।”
यानी, शतक सिर्फ क्रिकेटीय उपलब्धि नहीं—उनकी जड़ों के देश में एक भावनात्मक अध्याय भी था।
छह साल बाद, उसी देश में—करियर का सबसे बड़ा पल
- 2019: भारत में संघर्ष, करियर लगभग खत्म
- 2025: भारत में शतक, करियर नई ऊंचाई पर
सेनुरन मुथुसामी की यह पारी सिर्फ एक स्कोर नहीं—एक बयान है कि कैसे खिलाड़ी चुपचाप काम करते हैं और एक दिन सही वक्त आने पर चमक जाते हैं।
















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