Ashes – पहले दिन की तेज़ हवा हो, दूसरी शाम का उछाल या पर्थ के ऑप्टस स्टेडियम की सतह पर तेज़ गेंदबाजों की धमक—एशेज के इस पहले मुकाबले में सब कुछ इतना अचानक और उग्र हुआ कि पूरा टेस्ट मैच सिर्फ दो दिनों में खत्म हो गया।
19 विकेट पहले दिन, कुल 847 गेंदों में निपटता मैच, और पेसरों की बेबाक दहाड़…लोगों को साफ लगा कि ये पिच ‘खराब’ रेटिंग की हकदार है।
लेकिन हैरानी की बात?
ICC को ऐसा नहीं लगता।
बल्कि उल्टा—पर्थ की इस पिच को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने अपनी सबसे ऊंची रेटिंग दी है—‘वेरी गुड।’
ICC ने पर्थ पिच को दिया ‘वेरी गुड’—क्यों, कैसे, और किस तर्क पर?
एशेज के पर्थ टेस्ट को रेफरी रंजन मदुगले ने आधिकारिक रिपोर्ट में ‘वेरी गुड पिच’ करार दिया।
यह ICC के चार-स्तरीय रेटिंग सिस्टम का टॉप ग्रेड है।
| ICC Pitch Rating | अर्थ |
|---|---|
| Very Good | शानदार कैरी, सीम मूवमेंट सीमित, लगातार बाउंस, बैट–बॉल का संतुलन |
| Good | हल्की असमानता लेकिन खेलने योग्य |
| Average | कुछ शरीर पर खेल, अस्थिर बर्ताव |
| Below Average / Poor | शॉर्ट बाउंस, असुरक्षित, या अत्यधिक मददगार |
मदुगले की रिपोर्ट के मुताबिक:
- गेंद लगातार अच्छे से कैरी कर रही थी
- सीम मूवमेंट कंट्रोल में था, अव्यवस्थित नहीं
- पिच पर तेज लेकिन बराबर बाउंस था
- बैटिंग असंभव नहीं थी, बस चुनौतीपूर्ण थी
और यही वजह है कि ICC ने 2-दिन के मैच को भी खराब पिच के रूप में नहीं देखा।
लेकिन 19 विकेट पहले दिन? मैच दो दिनों में खत्म? फिर ये रेटिंग कैसे?
यही वह सवाल है जो लगातार उठ रहा है।
लोगों का मानना था—इतने विकेट गिरना मतलब पिच दोषी।
लेकिन इस मैच में कहानी अलग थी।
क्यों?
क्योंकि:
- शुरू के सेशन में हवा और नई गेंद ने तेज़ मदद की
- बल्लेबाजों ने भी कई बार गलत शॉट चुने
- पेसर्स का कौशल असाधारण था—स्टार्क ने 7/58, हेड ने 123 रन
- और सबसे अहम—ट्रैविस हेड ने दिखा दिया कि पिच पर रन बन सकते थे
हेड की पारी ने ICC को सही साबित कर दिया?
काफी हद तक, हाँ।
83 गेंदों का 123 रन—हमलावर, नियंत्रित, और खेल को पलटने वाला।
इस पारी ने ICC की रिपोर्ट का सबसे बड़ा आधार मजबूत किया—कि पिच “अनफेयर” नहीं थी।
मैच दो दिन में खत्म जरूर हुआ, पर उसकी वजह सिर्फ पिच नहीं, खेल का तरीका, एटैकिंग एंगल और पेसरों का दबदबा भी था।
पर्थ टेस्ट—847 गेंदों में निपटता मुकाबला और एशेज इतिहास की अनोखी कड़ी
पर्थ में एशेज का यह मुकाबला 847 गेंदों में समाप्त हुआ—
- ऑस्ट्रेलिया में दूसरा सबसे छोटा पूरा टेस्ट
- और 1888 के बाद का सबसे छोटा एशेज टेस्ट (गेंदों के आधार पर)
पहली तीन पारियाँ तेज़ गेंदबाजों की विजय गाथा बन गईं:
प्रमुख प्रदर्शन
| खिलाड़ी | आंकड़े |
|---|---|
| मिचेल स्टार्क | 7 विकेट, 58 रन |
| बेन स्टोक्स | 5 विकेट |
| हेड | 123 (83) |
इंग्लैंड पहले दिन चाय से पहले 160/5 पर था—मतलब मुश्किल में, पर डूबता नहीं दिख रहा था।
लेकिन बाद में उनके अपने पेसरों ने भी हालात दिलचस्प बनाए और ऑस्ट्रेलिया को 123/9 तक पहुंचा दिया।
इस मैच में हवा, पिच, गेंद और बल्लेबाज—चारों ने मिलकर एक तेज़, ड्रामा-भरा टेस्ट पैदा किया।
क्या ICC सही है या आलोचक? संतुलन की भाषा क्या कहती है?
टेस्ट क्रिकेट में चुनौती होनी चाहिए—यह ICC की आधिकारिक सोच है।
बाउंस, सीम और पेस—ये तीनों पर्थ की पहचान रहे हैं।
ICC की नज़र में यह पिच:
- सेफ थी
- प्रेडिक्टेबल थी
- बल्लेबाजों को मौका दे रही थी
- गेंदबाजों को भी टेस्ट कर रही थी
हार-जीत के नतीजे की अवधि रेटिंग तय नहीं करती—यह बात ICC कई बार दोहरा चुका है।















