BCCI : बीसीसीआई का ऐतिहासिक फैसला – महिला क्रिकेटरों की फीस में बंपर बढ़ोतरी

Atul Kumar
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BCCI – मुंबई में बोर्डरूम की एक बैठक ने इस बार स्कोरबोर्ड नहीं, सिस्टम बदल दिया।
भारत की पहली महिला वनडे वर्ल्ड कप जीत की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने घरेलू क्रिकेट में एक बड़ा और लंबे समय से इंतज़ार किया गया कदम उठा लिया—महिला क्रिकेटरों और मैच अधिकारियों की मैच फीस में दो गुना से भी ज़्यादा बढ़ोतरी।

यह फैसला सिर्फ़ रकम का नहीं है। यह उस सोच का संकेत है, जिसमें घरेलू क्रिकेट को अब “स्टेप-चाइल्ड” नहीं, करियर की तरह ट्रीट किया जा रहा है।

बराबरी की तरफ़ एक ठोस कदम

बीसीसीआई की शीर्ष परिषद से मंज़ूरी मिलने के बाद लागू हुई नई वेतन संरचना का सीधा असर महिला क्रिकेटरों की जेब पर पड़ेगा—और उससे भी ज़्यादा, उनके आत्मविश्वास पर।

अब तक सीनियर महिला खिलाड़ियों को घरेलू मैचों में:

  • ₹20,000 प्रति दिन
  • और रिज़र्व खिलाड़ियों को ₹10,000

मिलते थे।

नई संरचना में यह आंकड़ा सीधे 50,000 से 60,000 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया है।

यह सिर्फ़ बढ़ोतरी नहीं है—यह मान्यता है।

नई फीस संरचना: साफ़, सरल, असरदार

बीसीसीआई ने अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग दरें तय की हैं, ताकि काम और भुगतान के बीच सीधा रिश्ता बने।

सीनियर महिला घरेलू क्रिकेट (नई फीस)

टूर्नामेंट / भूमिकाफीस
वनडे/बहुदिवसीय (प्लेइंग XI)₹50,000 प्रतिदिन
वनडे/बहुदिवसीय (रिज़र्व)₹25,000 प्रतिदिन
टी20 (प्लेइंग XI)₹25,000 प्रति मैच
टी20 (रिज़र्व)₹12,500 प्रति मैच

बीसीसीआई अधिकारियों के मुताबिक, अगर कोई महिला खिलाड़ी पूरे सीज़न में सभी फॉर्मेट खेलती है, तो उसकी सालाना कमाई ₹12 लाख से ₹14 लाख तक पहुंच सकती है—जो घरेलू महिला क्रिकेट के लिए अब तक असंभव-सी लगती थी।

जूनियर क्रिकेटरों के लिए भी राहत

यह फैसला सिर्फ़ सीनियर खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है।

अंडर-19 और अंडर-23 महिला क्रिकेटरों के लिए भी फीस में बड़ा इज़ाफा किया गया है—जो भविष्य की नींव को मज़बूत करता है।

जूनियर महिला क्रिकेट (नई फीस)

श्रेणीफीस
अंडर-19 / अंडर-23 (प्लेइंग XI)₹25,000 प्रतिदिन
अंडर-19 / अंडर-23 (रिज़र्व)₹12,500 प्रतिदिन

यानी अब जूनियर लेवल पर खेलना सिर्फ़ “एक्सपीरियंस” नहीं, आर्थिक सहारा भी देगा।

अंपायर और मैच रेफरी भी गेम में

इस बदलाव का एक अहम लेकिन अक्सर अनदेखा हिस्सा—मैच अधिकारी।

घरेलू क्रिकेट की रीढ़ माने जाने वाले अंपायर और मैच रेफरी भी इस बढ़ोतरी से सीधे लाभान्वित होंगे।

मैच अधिकारियों के लिए नई दरें

मैच का प्रकारप्रतिदिन आय
लीग मैच₹40,000
नॉकआउट मैच₹50,000–₹60,000

रणजी ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में:

  • लीग मैच में अंपायर को अब लगभग ₹1.60 लाख प्रति मैच
  • नॉकआउट में ₹2.5–3 लाख प्रति मैच

मिलेंगे।

यह बढ़ोतरी सिर्फ़ पैसे की नहीं—यह प्रोफेशनलिज़्म को बनाए रखने की कीमत है।

क्यों अभी? टाइमिंग भी कहानी कहती है

यह फैसला ऐसे समय आया है जब:

  • भारत ने पहली बार महिला वनडे वर्ल्ड कप जीता
  • महिला क्रिकेट की व्यूअरशिप रिकॉर्ड तोड़ रही है
  • WPL ने घरेलू टैलेंट को नया मंच दिया है

बीसीसीआई साफ़ समझता है कि अगर इंटरनेशनल लेवल पर सफलता चाहिए, तो डोमेस्टिक सिस्टम को मज़बूत करना ही होगा।

और वह सिस्टम सिर्फ़ टैलेंट से नहीं चलता—सिक्योरिटी से चलता है।

घरेलू क्रिकेट: अब बैकअप नहीं, बेस

अब तक कई महिला खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट को मजबूरी की तरह खेलती थीं:

  • सीमित पैसे
  • अनिश्चित कैलेंडर
  • और कम पहचान

नई फीस संरचना इस सोच को बदल सकती है।

अब घरेलू क्रिकेट:

  • करियर प्लानिंग का हिस्सा बनेगा
  • परिवारों को भरोसा देगा
  • और खिलाड़ियों को खेल पर फोकस करने की आज़ादी देगा

यही वो बदलाव है जो लंबे समय में फर्क डालता है।

“समान वेतन” नहीं, लेकिन सही दिशा

यह फैसला अभी पुरुष और महिला क्रिकेट के बीच पूर्ण समान वेतन नहीं लाता।
लेकिन यह वह रास्ता ज़रूर खोलता है, जिस पर चलते हुए बराबरी संभव है।

बीसीसीआई का मैसेज साफ़ है:

  • परफॉर्मेंस मायने रखती है
  • जेंडर नहीं

और घरेलू इकोसिस्टम को मज़बूत किए बिना, कोई भी वर्ल्ड कप टिकाऊ नहीं होता।

बोर्ड का नज़रिया: निवेश, खर्च नहीं

बीसीसीआई का मानना है कि:

  • यह बढ़ोतरी महिला क्रिकेटरों को वित्तीय सुरक्षा देगी
  • मैच अधिकारियों को प्रेरणा देगी
  • और पूरे घरेलू ढांचे को स्टेबल बनाएगी

यह खर्च नहीं, इन्वेस्टमेंट है—भविष्य के लिए।

आगे क्या बदलेगा?

इस फैसले के बाद कुछ बदलाव लगभग तय दिखते हैं:

  • ज़्यादा खिलाड़ी घरेलू सीज़न पूरा खेलेंगे
  • ड्रॉपआउट रेट कम होगा
  • और टैलेंट जल्दी खोया नहीं जाएगा

संक्षेप में—भारतीय महिला क्रिकेट को अब सिर्फ़ मौके नहीं, सपोर्ट सिस्टम भी मिल रहा है।

एक शांत लेकिन ऐतिहासिक फैसला

यह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस वाला शोर नहीं था।
कोई बड़े दावे नहीं।
बस एक बोर्ड मीटिंग—और ज़मीनी हकीकत में बड़ा बदलाव।

कभी-कभी क्रांति ऐसे ही आती है।
बिना शोर।
लेकिन लंबे असर के साथ।

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Atul Kumar

Atul Kumar

क्रिकेट को देखता हूं और समझता हूं और आप लोगों तक नए-नए सूचनाएं पहुंचाने की कोशिश करता हूं। लाइफ में हमेशा नई-नई चीजों को सीखने का शौक रखता हु, पुराने न्यूज़ को नए तरीके से प्रस्तुत करता हूं।

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