Suthar – भारत के युवा बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में शानदार गेंदबाजी करते हुए अपनी प्रतिभा का एक बार फिर परिचय दिया। गॉल टेस्ट में सुथार ने 76 रन देकर चार विकेट हासिल किए और श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि, सुथार की इस सफलता के पीछे केवल गॉल की पिच पर उनका प्रदर्शन नहीं था। टेस्ट सीरीज से पहले उन्होंने बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में करीब 10 दिनों तक खास तैयारी की थी। इस दौरान उन्होंने कूकाबुरा गेंद से अभ्यास किया और ऐसी परिस्थितियों में गेंदबाजी की, जो गॉल के माहौल से काफी हद तक मेल खाती थीं।
COE में 10 दिन की खास तैयारी
मानव सुथार ने अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच के बाद गॉल टेस्ट की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लगभग 10 दिनों तक कूकाबुरा गेंद से अभ्यास किया।
इस अभ्यास की खास बात यह थी कि खुले मैदान में चलने वाली हवाओं के बीच सुथार को गेंदबाजी कराई गई। इसका उद्देश्य उन्हें श्रीलंका की परिस्थितियों के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार करना था।
वहां मौजूद कोच ने केवल उनकी गेंदबाजी पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि सुथार के क्रीज तक पहुंचने के तरीके और गेंद डालने की प्रक्रिया पर भी काम कराया।
गॉल की पिच के हिसाब से बनाया प्लान
सुथार ने बताया कि उनका लक्ष्य गॉल की पिच के मुताबिक सही लाइन, लेंथ और गति के साथ गेंदबाजी करना था।
उनके मुताबिक, गॉल की पिच पर कुछ उछाल भी मौजूद था। ऐसे में बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए गेंद को सही लाइन पर लगातार डालना जरूरी था।
सुथार ने कहा कि अफगानिस्तान टेस्ट के बाद उन्होंने कूकाबुरा गेंद से अभ्यास शुरू किया था और उनकी योजना बिल्कुल स्पष्ट थी—सही जगह, सही लेंथ और सही गति।
पहली गेंद पर ही मिला Dinesh Chandimal का विकेट
मानव सुथार ने टेस्ट मैच की शुरुआत ही शानदार अंदाज में की। उन्होंने अपनी पहली गेंद पर अनुभवी श्रीलंकाई बल्लेबाज दिनेश चांदीमल को आउट कर दिया।
पहली ही गेंद पर विकेट मिलने से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।
सुथार के लिए यह इसलिए भी खास था क्योंकि इससे पहले वह काउंटी क्रिकेट में वारविकशर के लिए खेल चुके थे। विदेशी परिस्थितियों में खेलने का अनुभव उन्हें श्रीलंका में भी फायदा देता दिखाई दिया।
76 रन देकर 4 विकेट का शानदार प्रदर्शन
सुथार ने मैच में कुल चार विकेट हासिल किए। उन्होंने 76 रन खर्च किए और श्रीलंका की बल्लेबाजी को लगातार चुनौती दी।
भारत ने लंच तक श्रीलंका के पांच विकेट सिर्फ 99 रन पर गिरा दिए थे। हालांकि, इसके बाद सोनल दिनूशा और निरोशन डिकवेला ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों का सामना किया।
दिनूशा ने शतक लगाया, जबकि डिकवेला ने 80 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली।
ऐसे समय में सुथार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी रणनीति पर कायम रहना था।
दूसरे सत्र में विकेट नहीं मिला, लेकिन नहीं बदली रणनीति
सुथार ने बताया कि दूसरे सत्र में भारतीय गेंदबाजों को विकेट नहीं मिले, लेकिन टीम ने अपनी योजना नहीं बदली।
उनके अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों के लिए धैर्य बनाए रखना बेहद जरूरी है। पहले सत्र में विकेट लेने का लक्ष्य था, लेकिन दूसरे सत्र में विकेट नहीं मिलने के बावजूद गेंदबाजों का ध्यान लगातार अच्छी जगह गेंद डालने पर रहा।
इसका फायदा तीसरे सत्र में मिला।
यही निरंतरता टेस्ट क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजों की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
Ravindra Jadeja से सीखना चाहते हैं बहुत कुछ
मानव सुथार को दूसरे छोर पर अनुभवी रवींद्र जडेजा का साथ मिला।
जडेजा ने इस मैच में तीन विकेट हासिल किए और इसी दौरान टेस्ट क्रिकेट में 350 विकेट पूरे करने की उपलब्धि भी हासिल की।
सुथार ने जडेजा की गेंदबाजी की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि जडेजा गेंदबाजी क्रीज का बहुत अच्छे तरीके से इस्तेमाल करते हैं और स्टंप्स की लाइन में लगातार गेंदबाजी करने में उनकी कोई बराबरी नहीं है।
सुथार जडेजा से यही सीखना चाहते हैं कि बल्लेबाज कितना भी दबाव बनाने की कोशिश करे, गेंदबाज किस तरह लंबे समय तक स्टंप्स की लाइन में गेंद डालता रहे और बल्लेबाज को गलत शॉट खेलने के लिए मजबूर करे।
श्रीलंकाई स्पिनरों से भी मिली सीख
मानव सुथार ने मैच के शुरुआती दो दिनों में श्रीलंकाई स्पिन गेंदबाजों की रणनीति को करीब से देखा।
उन्होंने पाया कि इस पिच पर गेंदबाज के लिए निरंतरता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
सुथार के अनुसार, श्रीलंकाई स्पिनरों ने अपनी गति में बदलाव किया और लगातार सही जगह गेंद डालकर बल्लेबाजों को परेशान किया। उन्होंने भी इसी रणनीति को अपनाने की कोशिश की।
गॉल की पिच पर स्पिनरों के लिए गेंद की गति और लाइन में छोटे बदलाव काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
पहली गेंद के विकेट ने बढ़ाया आत्मविश्वास
टेस्ट की पहली ही गेंद पर विकेट हासिल करना किसी भी युवा गेंदबाज के लिए बड़ा आत्मविश्वास बढ़ाने वाला पल होता है।
सुथार ने भी माना कि पहली गेंद पर विकेट मिलने से पूरे मैच के दौरान उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।
इसके बाद उन्होंने धैर्य के साथ गेंदबाजी की और श्रीलंकाई बल्लेबाजों को लगातार चुनौती देते रहे।
Manav Suthar के लिए बड़ा अनुभव
24 वर्षीय मानव सुथार के लिए श्रीलंका में यह प्रदर्शन उनके करियर के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
विदेशी परिस्थितियों में खेलने से पहले COE में कूकाबुरा गेंद से की गई तैयारी और गॉल की परिस्थितियों से मेल खाता अभ्यास उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ।
वहीं रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी स्पिनर के साथ गेंदबाजी करने से उन्हें सीखने का एक और बड़ा अवसर मिला।
अगर सुथार इसी तरह अपनी लाइन, लेंथ और गति में निरंतरता बनाए रखते हैं, तो वह आने वाले समय में भारतीय टेस्ट टीम के लिए एक उपयोगी स्पिन विकल्प बन सकते हैं।













