Mandhana – नई दिल्ली के एक सजे-धजे हॉल में जब स्मृति मंधाना का नाम 2025 की बीबीसी ‘इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ द ईयर’ के लिए पुकारा गया, तो यह सिर्फ एक व्यक्तिगत सम्मान नहीं था—यह उस भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जीत का विस्तार था, जिसने हाल ही में वनडे विश्व कप जीतकर इतिहास रचा।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम के साथ मौजूद मंधाना ने वीडियो संदेश के जरिए कहा, “2025 महिला क्रिकेट के लिए खास साल रहा, खासकर साल के अंत में विश्व कप जीतना। मुझे खुशी है कि मैं उस जीत में योगदान दे सकी।”
29 वर्षीय बाएं हाथ की बल्लेबाज ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाई दी है। और अब, उस सफर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिल गई है।
विश्व कप से पुरस्कार मंच तक
महिला वनडे विश्व कप 2025 में मंधाना भारत की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में रहीं। बड़े मैचों में संयम और आक्रामकता का संतुलन—यही उनकी पहचान है। मौजूदा समय में वह महिला वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक शतकों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं और सक्रिय खिलाड़ियों में कुल रनों के मामले में विश्व में तीसरे नंबर पर काबिज हैं।
पिछले साल सितंबर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 50 गेंदों में शतक जड़कर 50 ओवर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी भी भारतीय (पुरुष और महिला) द्वारा सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड विराट कोहली के नाम था। वह पारी सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बयान थी।
सांगली से दुनिया तक
महाराष्ट्र के सांगली की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची मंधाना की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। क्रिकेट का जुनून उन्हें पिता और भाई से विरासत में मिला, जो जिला स्तर पर खेल चुके थे। बचपन में लड़कों के साथ खेलना, लंबी ट्रेन यात्राएं, और धीरे-धीरे घरेलू क्रिकेट से राष्ट्रीय टीम तक का सफर—यह सब आज की उपलब्धि की नींव है।
उभरते सितारे और प्रेरक चेहरे
इस समारोह में सिर्फ मंधाना ही नहीं, कई और प्रेरक नाम भी सम्मानित हुए।
20 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख को फिडे महिला विश्व कप जीतने के लिए ‘साल की सर्वश्रेष्ठ उभरती हुई खिलाड़ी’ चुना गया। इतनी कम उम्र में विश्व खिताब—भारतीय शतरंज की नई लहर का संकेत है।
पैरा एथलीट प्रीति पाल को 2024 पेरिस पैरालंपिक में ट्रैक एवं फील्ड में दो कांस्य पदक जीतने के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ महिला पैरा खिलाड़ी’ का पुरस्कार मिला। यह उपलब्धि भारतीय पैरा स्पोर्ट्स के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
पूर्व निशानेबाज अंजलि भागवत को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ सम्मान मिला। वह ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली महिला निशानेबाज रही हैं। भारतीय ओलंपिक इतिहास में उनका योगदान स्थायी है।
पुरस्कार विजेताओं का चयन लिएंडर पेस, दीपा मलिक और अंजू बॉबी जॉर्ज की जूरी ने किया—खेल जगत के अनुभवी नाम, जिनकी विश्वसनीयता खुद एक प्रमाण है।
टीमों का सामूहिक सम्मान
इस समारोह में टीम उपलब्धियों को भी सराहा गया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम को विश्व कप जीत के लिए सम्मानित किया गया। भारतीय महिला दृष्टिबाधित टीम और महिला कबड्डी टीम को भी विश्व कप जीत के लिए मंच पर बुलाया गया।
सिमरन शर्मा, एकता भयान, दीप्ति जीवांजी और प्रीति पाल को विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। भारतीय महिला आइस हॉकी टीम को गैर-परंपरागत खेल में बाधाएं तोड़ने के लिए सराहा गया।
राजबीर कौर और सविता पूनिया—भारतीय हॉकी की मजबूत आवाजें—भी सम्मानित रहीं। और पानी देवी को जमीनी स्तर पर खेलों में योगदान के लिए विशेष मान्यता मिली।
महिला खेलों का बदलता परिदृश्य
भारत में महिला खेल अब अपवाद नहीं, मुख्यधारा बनते जा रहे हैं। क्रिकेट, शतरंज, पैरा स्पोर्ट्स, हॉकी, कबड्डी—हर क्षेत्र में भारतीय महिलाएं वैश्विक मंच पर चुनौती दे रही हैं।
मंधाना की सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है; यह उस बदलाव का प्रतीक है, जहां महिला खिलाड़ी अब प्रेरणा की मुख्य धारा बन चुकी हैं। कॉर्पोरेट समर्थन बढ़ रहा है, दर्शकों की संख्या बढ़ रही है, और मीडिया कवरेज भी पहले से कहीं अधिक है।















