Netherlands – अहमदाबाद की शाम ढल रही थी, लेकिन नरेंद्र मोदी स्टेडियम के नेट्स में तापमान अलग ही था। नीदरलैंड के खिलाफ मुकाबले से एक दिन पहले भारतीय टीम के अभ्यास सत्र में स्पिन का बोलबाला दिखा—और उस माहौल के बीच सबसे ऊंची उड़ान अभिषेक शर्मा के बल्ले से निकली।
टूर्नामेंट में अब तक खाता नहीं खोल पाए इस युवा सलामी बल्लेबाज ने लगभग एक घंटे से ज्यादा समय तक नेट्स में पसीना बहाया। और यह कोई हल्का-फुल्का सत्र नहीं था। यह बयान था—अपने आप से भी, और आलोचकों से भी।
स्पिन पर खास फोकस
नेट सत्र की पहली झलक यही थी—स्पिनर्स एक के बाद एक। वरुण चक्रवर्ती की ऑफ स्पिन, फिर कुलदीप यादव की कलाई का जादू। पास वाले नेट में तिलक वर्मा और रिंकू सिंह भी स्पिनरों के खिलाफ अभ्यास कर रहे थे।
यह संकेत साफ है। सुपर आठ से पहले टीम उपमहाद्वीपीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्पिन के खिलाफ तैयारी को प्राथमिकता दे रही है।
अभिषेक: शैली में बदलाव नहीं
अभिषेक शर्मा की खासियत यही है—वह अपनी शैली से समझौता नहीं करते। आमतौर पर विकेट के सामने दोनों ओर बड़े शॉट खेलने वाले इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने नेट्स में भी वही रुख बनाए रखा।
काउ कॉर्नर। डीप कवर। एक्स्ट्रा कवर।
गेंद हवा में, और कई बार नेट्स के ऊपरी हिस्से से टकराती हुई।
जब कुलदीप यादव गेंदबाजी करने आए, तो अभिषेक ने फुल लेंथ गेंदों को तुरंत एक्स्ट्रा कवर की दिशा में भेजना शुरू कर दिया। यह वही शॉट है जिससे वह अक्सर पावरप्ले में दबाव तोड़ते हैं।
तेज गेंदबाजों के खिलाफ पुल और विकेट के पीछे पिक-अप शॉट का अभ्यास भी जारी रहा। तीनों तरह की गेंदबाजी—तेज, ऑफ स्पिन, लेफ्ट आर्म स्पिन—के खिलाफ छक्कों की झड़ी लगी रही।
अतिरिक्त सत्र: संकेत क्या?
जब लगा कि उनका अभ्यास खत्म हो चुका है, अभिषेक कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ दोबारा नेट्स में लौटे। यह छोटा-सा दृश्य बहुत कुछ कहता है।
यह सिर्फ अतिरिक्त अभ्यास नहीं था। यह मानसिक तैयारी थी।
दो शून्य के बाद आलोचना बढ़ी है। लेकिन लंबा सत्र बताता है कि खिलाड़ी समस्या से भाग नहीं रहा—सीधे सामना कर रहा है।
बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक पहले ही कह चुके हैं कि टीम को ज्यादा विश्लेषण नहीं करना है। लेकिन नेट्स में दिखी गंभीरता बताती है कि अंदरूनी स्तर पर काम जारी है।
विपक्ष की नकल: रिंकू का प्रयोग
दिलचस्प दृश्य तब दिखा जब रिंकू सिंह ने लंबे बल्लेबाजी सत्र के बाद राउंड-आर्म एक्शन से ऑफ स्पिन डाली। उनका एक्शन नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस की याद दिला रहा था, जिन्होंने पिछले सप्ताह दिल्ली में स्टंप्स के काफी पीछे से गेंद डालकर भारतीय बल्लेबाजों को चौंकाया था।
यह तैयारी सिर्फ तकनीकी नहीं, सामरिक भी है।
विपक्ष के असामान्य एक्शन की नकल करना—ताकि मैच में चौंकाने वाली गेंदें नई न लगें।
पाकिस्तान के खिलाफ भी उस्मान तारीक और साइम अयूब जैसे गेंदबाजों के सामने भारतीय बल्लेबाजी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकी थी। ऐसे में नेट्स में यह अभ्यास भविष्य की गलतियों को कम करने की कोशिश है।
स्पिन बनाम आक्रामकता
भारत पहले ही सुपर आठ में पहुंच चुका है। लेकिन टीम मैनेजमेंट स्पष्ट रूप से लय बनाए रखना चाहता है।
| अभ्यास का फोकस | संभावित रणनीति |
|---|---|
| स्पिन के खिलाफ लंबे सत्र | मिडिल ओवर स्थिरता |
| असामान्य एक्शन की नकल | अप्रत्याशित गेंदबाजी से निपटना |
| आक्रामक शॉट अभ्यास | पावरप्ले में दबदबा |
क्या यह संकेत है बड़ी पारी का?
नेट्स में शॉट मारना और मैच में रन बनाना दो अलग चीजें हैं। लेकिन आत्मविश्वास अक्सर अभ्यास से ही लौटता है।
अभिषेक की समस्या तकनीक से ज्यादा टाइमिंग और शुरुआती निर्णय की रही है। अगर वह पहली 10 गेंदों में खुद को सेट कर लेते हैं, तो उनकी नैसर्गिक आक्रामकता मैच का रुख बदल सकती है।
नीदरलैंड का गेंदबाजी आक्रमण अनुभव में सीमित है। यह अभिषेक के लिए मंच हो सकता है—या फिर दबाव का अगला अध्याय।















