Ranji Final : 67 साल का इंतजार खत्म – जम्मू कश्मीर पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में

Atul Kumar
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Ranji Final

Ranji Final – कोलकाता के ईडन गार्डन्स में बुधवार की शाम इतिहास ने चुपचाप करवट ली। कोई शोर-शराबा नहीं, कोई बड़ी भविष्यवाणी नहीं—बस 126 रन का मामूली लक्ष्य और सामने दो बार की चैंपियन बंगाल।

लेकिन 67 साल से इंतज़ार कर रही जम्मू कश्मीर की टीम ने वह कर दिखाया जो कभी “संभावना” भी नहीं माना गया था। 34.4 ओवर में चार विकेट खोकर लक्ष्य हासिल, और पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में एंट्री।

छोटा लक्ष्य था, लेकिन कहानी बड़ी।

126 रन… और एक लंबा इतिहास

बंगाल ने जम्मू कश्मीर के सामने 126 रन का लक्ष्य रखा था। कागज़ पर आसान। लेकिन सेमीफाइनल, चौथा दिन, ईडन गार्डन्स की पिच और सामने मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, आकाश दीप जैसे अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज—यह किसी भी टीम की परीक्षा लेने के लिए काफी था।

तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक जम्मू कश्मीर 43/2 पर था। चौथे दिन सुबह ही झटके लगे—शुभम पुंडीर (27) और कप्तान पारस डोगरा (9) जल्दी आउट। स्कोरबोर्ड ने जैसे फुसफुसाया—“क्या फिर वही कहानी?”

लेकिन यहां से वंशज शर्मा और अब्दुल समद ने स्क्रिप्ट बदल दी।

वंशज और समद: बेखौफ साझेदारी

22 वर्षीय वंशज शर्मा—शांत, संयमित। दूसरी तरफ आईपीएल में अपनी आक्रामक छवि के लिए मशहूर अब्दुल समद। दोनों ने 55 रन की नाबाद साझेदारी की।

समद ने 30 रन बनाए, लेकिन वह सिर्फ रन नहीं थे—वे संदेश थे। हर गेंद पर इरादा साफ था: डर नहीं।

और फिर वह पल। समद ने वंशज को स्ट्राइक दी। मुकेश कुमार गेंदबाजी पर। वंशज ने लॉन्ग-ऑन के ऊपर से छक्का जड़ा। बस। मैच खत्म। इतिहास शुरू।

वंशज 43 रन पर नाबाद रहे—एक ऐसी पारी, जिसे आंकड़ों से ज्यादा संदर्भ याद रखेगा।

आकिब नबी: असली टर्निंग पॉइंट

अगर इस जीत की नींव तलाशनी हो, तो वह आकिब नबी के स्पेल में मिलेगी। तेज गेंदबाज ने मैच में कुल नौ विकेट लेकर बंगाल की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

दूसरी पारी में बंगाल सिर्फ 99 रन पर ढेर हो गया। पहली पारी में 328 रन बनाने वाली टीम का ऐसा पतन—यही सेमीफाइनल की असली कहानी थी।

इससे पहले क्वार्टर फाइनल में मध्य प्रदेश के खिलाफ नबी ने 110 रन देकर 12 विकेट लिए थे। लगातार बड़े मैचों में यह प्रदर्शन संयोग नहीं, लय है।

मैच का स्कोरकार्ड एक नजर में

पारीटीमरन
पहली पारीबंगाल328
पहली पारीजम्मू कश्मीर302
दूसरी पारीबंगाल99
लक्ष्यजम्मू कश्मीर126
परिणामजम्मू कश्मीर 6 विकेट से विजयी

1959 से 2026 तक: संघर्ष की दास्तान

जम्मू कश्मीर ने 1959-60 में पहली बार रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया। तब से अब तक 334 मैच खेले—सिर्फ 45 जीत। पहली जीत के लिए 44 साल का इंतज़ार। 1982-83 में सेना के खिलाफ वह जीत आई थी।

सोचिए, एक टीम जिसे दशकों तक “कमजोर” कहा गया, आज फाइनल में है।

2013-14 में नेट रन रेट के आधार पर क्वार्टर फाइनल में पहुंचना एक उपलब्धि थी। 2015-16 में परवेज़ रसूल की कप्तानी में वानखेड़े में मुंबई को हराना—वह बड़ी जीत थी। लेकिन निरंतरता नहीं थी।

इस बार कहानी अलग है।

कोच और कप्तान की भूमिका

कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा ने इस सीजन टीम की मानसिकता बदली। मुंबई के खिलाफ शुरुआती हार के बाद टीम बिखरी नहीं। राजस्थान के खिलाफ पारी की जीत, दिल्ली और हैदराबाद के खिलाफ अहम मुकाबले—और फिर नॉकआउट में ठोस प्रदर्शन।

यह सिर्फ प्रतिभा नहीं, योजना और अनुशासन का नतीजा है।

स्टार बनाम सिस्टम

बंगाल की टीम में चार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी—मोहम्मद शमी, आकाश दीप, मुकेश कुमार, शाहबाज अहमद। साथ में भारत ए के स्टार बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन। घरेलू मैदान का फायदा अलग।

जम्मू कश्मीर? कोई बड़ा “नाम” नहीं। लेकिन टीम के तौर पर खेली।

क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है—स्टार मैच जिताते हैं, टीम टूर्नामेंट जिताती है। सेमीफाइनल ने इस कहावत को फिर सही साबित किया।

अब जम्मू कश्मीर खिताब से सिर्फ एक कदम दूर है। पहली बार फाइनल में। एक ऐसी टीम, जिसे कभी गंभीर दावेदार नहीं माना गया, अब ट्रॉफी छूने के करीब है।

क्या वे इतिहास को पूरा कर पाएंगे? कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है—इस सीजन उन्होंने अपनी पहचान बदल दी है।

ईडन गार्डन्स की वह शाम सिर्फ एक जीत नहीं थी। वह एक बयान था—कि संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन अंत तय नहीं होता।

और शायद यही क्रिकेट का सबसे बड़ा आकर्षण है।

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Atul Kumar

Atul Kumar

क्रिकेट को देखता हूं और समझता हूं और आप लोगों तक नए-नए सूचनाएं पहुंचाने की कोशिश करता हूं। लाइफ में हमेशा नई-नई चीजों को सीखने का शौक रखता हु, पुराने न्यूज़ को नए तरीके से प्रस्तुत करता हूं।

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