Luke Ronchi : रोंची और ओरम का डबल रोल – NZ और PSL दोनों में जिम्मेदारी

Atul Kumar
Published On:
Luke Ronchi

Luke Ronchi – क्रिकेट की दुनिया में अब सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, कोच भी “ग्लोबल फ्री एजेंट” बन चुके हैं। और न्यूजीलैंड ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वो इस ट्रेंड को रोकने के बजाय—उसे अपनाने में विश्वास रखते हैं।

पीएसएल 2026 शुरू होने से ठीक पहले एक दिलचस्प फैसला सामने आया है—ब्लैक कैप्स के दो अहम कोच, ल्यूक रोंची और जैकब ओरम, पाकिस्तान सुपर लीग में इस्लामाबाद यूनाइटेड के साथ काम करेंगे… और वो भी ऐसे समय में जब न्यूजीलैंड खुद इंटरनेशनल सीरीज खेल रहा होगा।

कोचिंग शेड्यूल का टकराव—फिर भी मंजूरी

आमतौर पर, ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि नेशनल टीम के कोच किसी फ्रेंचाइजी लीग में उसी समय काम करें जब इंटरनेशनल मैच चल रहे हों।

लेकिन यहां मामला अलग है।

टकराव कैसे हो रहा है?

इवेंटतारीख
NZ vs साउथ अफ्रीका T2015–25 मार्च
PSL 202626 मार्च से शुरू
NZ vs बांग्लादेश दौरा(तारीख लंबित)

यानी, सीरीज खत्म होते ही—सीधा PSL।

और बांग्लादेश दौरे के दौरान भी उनकी गैरमौजूदगी तय है।

रोंची—खिलाड़ी से कोच, अब फिर PSL में वापसी

ल्यूक रोंची का इस्लामाबाद यूनाइटेड से रिश्ता नया नहीं है।

वो:

खिलाड़ी के तौर पर खेल चुके हैं
अब हेड कोच बनकर लौट रहे हैं

रोंची प्रोफाइल

रोलडिटेल
NZ टीमबैटिंग कोच
PSL टीमहेड कोच (इस्लामाबाद)
PSL इतिहास3 सीजन खिलाड़ी

यानी, टीम और माहौल—दोनों से परिचित।

जैकब ओरम—सपोर्ट, लेकिन अहम

जैकब ओरम, जो न्यूजीलैंड के बॉलिंग कोच हैं, इस सेटअप में रोंची के साथ जुड़ेंगे।

वो “असिस्टेंट” होंगे—
लेकिन उनका अनुभव टीम के लिए बड़ा प्लस है।

न्यूजीलैंड का नजरिया—रोकना नहीं, बढ़ावा देना

यहां सबसे दिलचस्प चीज है—न्यूजीलैंड क्रिकेट का अप्रोच।

उन्होंने इन कोचों को रोका नहीं… बल्कि सपोर्ट किया।

परफॉर्मेंस मैनेजर माइक सैंडल ने साफ कहा—

“यह उनके लिए सीखने और ग्रो करने का मौका है।”

इसका मतलब क्या?

पहलूफायदा
इंटरनेशनल एक्सपोजरअलग कंडीशंस में अनुभव
नई रणनीतियांअलग टीमों के साथ काम
नॉलेज ट्रांसफरNZ टीम को भविष्य में फायदा

यानी, यह “लॉस” नहीं—एक तरह का “इन्वेस्टमेंट” है।

लेकिन टीम का क्या?

अब सवाल—जब कोच नहीं होंगे, तो टीम कैसे चलेगी?

न्यूजीलैंड ने इसका भी प्लान तैयार कर लिया है।

रिप्लेसमेंट कोचिंग सेटअप

सीरीज/टूरजिम्मेदारी
साउथ अफ्रीका T20जॉनी बैसेट-ग्राहम, एल्ड्रिज
बांग्लादेश दौराब्रेंडन डोनकर्स

यानी, “बेंच स्ट्रेंथ” सिर्फ खिलाड़ियों में नहीं—कोचिंग में भी।

क्या यह ट्रेंड बढ़ेगा?

सीधा जवाब—हाँ।

आज:

फ्रेंचाइजी लीग्स = ज्यादा पैसा + ज्यादा एक्सपोजर
इंटरनेशनल क्रिकेट = प्रतिष्ठा + स्थिरता

और कोच—दोनों का बैलेंस बना रहे हैं।

रिस्क भी है

हालांकि, यह फैसला पूरी तरह “स्मूद” नहीं है।

कुछ सवाल उठते हैं:

क्या इंटरनेशनल टीम का फोकस डिस्टर्ब होगा?
क्या प्लानिंग में गैप आएगा?

लेकिन न्यूजीलैंड का मॉडल साफ है—

सिस्टम पर भरोसा।

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