Team India : कोचिंग पर अतुल वासन का बड़ा दावा बोले- सभी खिलाड़ी खुश नहीं हैं

Atul Kumar
Published On:
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Team India – भारतीय क्रिकेट में जीत सब कुछ बदल देती है… और हार हर दरार को सामने ले आती है। यही वजह है कि गौतम गंभीर को लेकर पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन का हालिया बयान अचानक चर्चा में आ गया है। टीम इंडिया लगातार आईसीसी टूर्नामेंट जीत रही है, लेकिन पर्दे के पीछे सब कुछ उतना शांत नहीं है — कम से कम वासन के संकेत तो यही कहते हैं।

जुलाई 2024 में टीम इंडिया के हेड कोच बने गौतम गंभीर की कोचिंग में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी और टी20 वर्ल्ड कप 2026 जैसे बड़े खिताब जीते। कई युवा खिलाड़ियों को मौका मिला, टीम में आक्रामक सोच दिखी, और चयन नीति में भी बदलाव नजर आया। लेकिन इसी दौरान कुछ विवाद और अंदरूनी असंतोष की खबरें भी सामने आती रहीं।

अब अतुल वासन ने दावा किया है कि टीम इंडिया के सभी खिलाड़ी गंभीर के मैनेजमेंट स्टाइल से खुश नहीं हैं।

क्या बोले अतुल वासन?

पूर्व भारतीय पेसर अतुल वासन ने विक्की लालवानी के YouTube शो पर बातचीत के दौरान कहा कि इतनी मजबूत पर्सनैलिटी वाले कोच के साथ हर खिलाड़ी सहज नहीं रह सकता।

उन्होंने कहा:

“मुझे यकीन है कि सभी खिलाड़ी खुश नहीं हो सकते। कोई न कोई सुई के सहारे सो रहा होगा; ऐसा होता है। पर्सनल पसंद और नापसंद होती हैं। अगर आप जीतते रहते हैं, तो सब ठीक लगता है। लेकिन हारते ही आलोचना शुरू हो जाती है।”

वासन का इशारा साफ तौर पर गंभीर के सख्त और आक्रामक नेतृत्व स्टाइल की तरफ माना जा रहा है।

“कुछ खिलाड़ियों को साइडलाइन किया गया”

जब वासन से पूछा गया कि क्या वह ऐसे खिलाड़ियों को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं जो गंभीर की लीडरशिप से खुश नहीं थे, तो उन्होंने नाम लेने से इनकार कर दिया। लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि कुछ खिलाड़ियों को लगा कि उन्हें किनारे कर दिया गया।

उन्होंने कहा:

“मैं उनमें से 1-2 खिलाड़ियों को जानता हूं, लेकिन उनके नाम नहीं बता सकता। सबको पता है कि क्या हो रहा है। अगर आप कुछ खिलाड़ियों को साइडलाइन करने के बाद भी जीतते रहते हैं, तो फिर कोच सही माना जाता है।”

यानी वासन का मानना है कि टीम की सफलता फिलहाल इन संभावित असंतोषों को दबा रही है।

गंभीर की कोचिंग में क्या बदला?

गौतम गंभीर के आने के बाद टीम इंडिया की approach में बड़ा बदलाव देखा गया।

कुछ प्रमुख बदलाव:

बदलावअसर
युवा खिलाड़ियों पर भरोसानए चेहरों को मौके मिले
आक्रामक क्रिकेटतेज रनरेट और fearless approach
फिटनेस और discipline पर जोरटीम culture में बदलाव
domestic performers को मौकालगातार प्रदर्शन करने वालों की वापसी

इसी दौर में:

  • संजू सैमसन को लगातार मौके मिले
  • ईशान किशन की वापसी हुई
  • घरेलू क्रिकेट प्रदर्शन को महत्व मिला

विराट और रोहित की टेस्ट रिटायरमेंट भी चर्चा में रही

गंभीर के कार्यकाल के दौरान ही विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे सीनियर खिलाड़ियों ने अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया। हालांकि इन फैसलों को लेकर कोई आधिकारिक विवाद सामने नहीं आया, लेकिन सोशल मीडिया और क्रिकेट हलकों में कई तरह की चर्चाएं जरूर हुईं।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि टीम transition phase में जा रही है और management नई generation पर ज्यादा फोकस कर रहा है।

हालांकि यह साफ करना जरूरी है कि:
इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गंभीर का मैनेजमेंट स्टाइल हमेशा से अलग रहा है

गौतम गंभीर अपने playing days से ही बेहद स्पष्ट और aggressive personality के लिए जाने जाते रहे हैं।

चाहे:

  • कप्तानी का तरीका हो
  • dressing room discipline
  • या खिलाड़ियों से expectations

गंभीर हमेशा सीधी बात करने वाले व्यक्ति माने जाते हैं।

कुछ खिलाड़ियों को यह approach motivate करती है…
जबकि कुछ के लिए यही चीज दबाव बन सकती है।

और शायद अतुल वासन का बयान इसी तरफ इशारा करता है।

क्या जीत सब कुछ छिपा देती है?

क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है:

“Winning hides everything.”

अगर टीम लगातार जीत रही हो, तो:

  • selection controversies
  • dressing room tension
  • communication issues

ज्यादा चर्चा में नहीं आते।

लेकिन जैसे ही हार का दौर शुरू होता है, वही बातें headlines बन जाती हैं।

वासन ने भी लगभग यही बात कही कि:
अगर कोच जीत रहा है, तो पूरा सिस्टम उसके साथ खड़ा रहता है।

वासन और गंभीर के रिश्तों का पुराना इतिहास

दिलचस्प बात यह भी है कि अतुल वासन और गौतम गंभीर के रिश्ते पहले भी तनावपूर्ण रहे हैं।

जब वासन दिल्ली क्रिकेट से जुड़े चयन पैनल का हिस्सा थे, तब गंभीर को दिल्ली टीम की कप्तानी से हटाया गया था। उस समय गंभीर ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें इस फैसले की सही जानकारी नहीं दी गई।

यानी दोनों के बीच पुराना मतभेद भी इस बयान को और ज्यादा चर्चा में ला रहा है।

क्या टीम इंडिया में सचमुच सब ठीक नहीं?

यह सवाल फिलहाल पूरी तरह speculation के दायरे में है।

क्योंकि:

  • किसी खिलाड़ी ने खुलकर शिकायत नहीं की
  • BCCI की तरफ से कोई बयान नहीं आया
  • टीम के प्रदर्शन मजबूत रहे हैं

लेकिन बड़े टीम environments में:
हर खिलाड़ी का खुश होना लगभग असंभव माना जाता है।

विशेषकर तब, जब competition इतना ज्यादा हो और चयन के फैसले बेहद कठिन हों।

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