Salil : 1989 में सचिन के साथ डेब्यू फिर अचानक खत्म हुआ करियर कौन हैं सलिल अंकोला

Atul Kumar
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Salil – 16 नवंबर 1989… पाकिस्तान के खिलाफ कराची टेस्ट… और भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक ऐसा दिन जिसे दुनिया सिर्फ सचिन तेंदुलकर के डेब्यू के लिए याद करती है। लेकिन उसी मैच में एक और भारतीय खिलाड़ी ने पहली बार इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा था — तेज गेंदबाज सलिल अंकोला।

दिलचस्प बात ये है कि जहां सचिन तेंदुलकर आगे चलकर “क्रिकेट के भगवान” बन गए, वहीं सलिल अंकोला का इंटरनेशनल करियर बेहद छोटा रहा। मगर उनकी जिंदगी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रही। चोट, बीमारी, मानसिक संघर्ष, एक्टिंग, कमेंट्री और फिर क्रिकेट प्रशासन… सलिल अंकोला की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती।

कौन हैं सलिल अंकोला?

सलिल अंकोला भारत के पूर्व तेज गेंदबाज हैं जिन्होंने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। उसी मैच में पाकिस्तान के लिए वकार यूनुस और शाहीद सईद ने भी डेब्यू किया था।

उस मैच में:

खिलाड़ीटीमआगे का करियर
सचिन तेंदुलकरभारतमहान बल्लेबाज
वकार यूनुसपाकिस्तानदिग्गज तेज गेंदबाज
सलिल अंकोलाभारतछोटा इंटरनेशनल करियर
शाहीद सईदपाकिस्तानसीमित पहचान

सचिन और वकार ने विश्व क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई, लेकिन सलिल अंकोला का सफर ज्यादा लंबा नहीं चल पाया।

टेस्ट डेब्यू ही आखिरी टेस्ट बन गया

सलिल अंकोला का टेस्ट करियर सिर्फ एक मैच तक सीमित रहा।

उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट में 2 विकेट लिए, लेकिन इसके बाद उन्हें दोबारा टेस्ट टीम में मौका नहीं मिला।

हालांकि वनडे क्रिकेट में उन्होंने:

  • 20 मुकाबले खेले
  • 13 विकेट लिए
  • 47.30 की औसत से गेंदबाजी की

उनका इंटरनेशनल रिकॉर्ड भले बहुत बड़ा नहीं रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन काफी मजबूत माना जाता था।

मुंबई क्रिकेट का अहम तेज गेंदबाज

90 के दशक में सलिल अंकोला मुंबई क्रिकेट का बड़ा नाम थे।

उन्होंने:

फॉर्मेटमैचविकेट
फर्स्ट-क्लास क्रिकेट54181 विकेट

उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6/47 रहा।

उस दौर में मुंबई क्रिकेट ज्यादातर बल्लेबाजों के लिए मशहूर था, लेकिन अंकोला उन चुनिंदा तेज गेंदबाजों में थे जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

सिर्फ 28 साल की उम्र में लेना पड़ा रिटायरमेंट

क्रिकेट करियर अपने पीक पर पहुंच सकता था…
लेकिन जिंदगी ने अलग मोड़ ले लिया।

सलिल अंकोला को ठोड़ी में ट्यूमर हो गया, जिसकी वजह से उन्हें 1997 में सिर्फ 28 साल की उम्र में क्रिकेट छोड़ना पड़ा।

एक तेज गेंदबाज के लिए यह बेहद बड़ा झटका था।

जहां बाकी खिलाड़ी अपने करियर के सबसे अच्छे दौर में पहुंचते हैं, वहीं अंकोला को अचानक क्रिकेट से दूर होना पड़ा।

क्रिकेट छोड़ने के बाद एक्टिंग की दुनिया में एंट्री

क्रिकेट से दूरी के बाद सलिल अंकोला ने टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा।

90s और 2000s में उन्होंने कई टीवी शो और फिल्मों में काम किया। उनकी पर्सनैलिटी और स्क्रीन प्रेजेंस की काफी चर्चा हुई।

कई क्रिकेट फैंस के लिए यह हैरानी वाली बात थी कि:
एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर अचानक टीवी स्टार बन गया।

मानसिक संघर्ष और डिप्रेशन से जंग

हाल ही में सलिल अंकोला एक बार फिर चर्चा में आए, लेकिन इस बार वजह बेहद भावुक थी।

उनकी पत्नी रिया अंकोला ने Times of India को बताया कि सलिल डिप्रेशन से जूझ रहे थे और उन्होंने खुद को पुणे के पास एक mental health care centre में एडमिट करवाया।

रिया के मुताबिक:

“अक्टूबर 2024 में अपनी मां को खोने के बाद सलिल पूरी तरह टूट गए थे और उनकी मौत को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।”

उन्होंने यह भी कहा कि सलिल ने समय रहते मदद लेने का फैसला किया, जो बेहद साहसिक कदम था।

परिवार ने क्या कहा?

रिया अंकोला ने बताया कि परिवार खुश है कि सलिल ने खुद को पूरी तरह टूटने देने के बजाय इलाज और recovery का रास्ता चुना।

उन्होंने कहा:

  • सलिल नियमित workout कर रहे हैं
  • तेजी से recover हो रहे हैं
  • और जल्द क्रिकेट से फिर जुड़ सकते हैं

उनके शब्दों में:

“क्रिकेट उनका पहला प्यार था और हमेशा रहेगा।”

यह बयान सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ क्योंकि लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उनकी ईमानदारी की सराहना की।

क्रिकेट प्रशासन और कमेंट्री में भी निभाई भूमिका

सलिल अंकोला क्रिकेट से पूरी तरह कभी दूर नहीं हुए।

उन्होंने:

  • मुंबई के चीफ सिलेक्टर के रूप में काम किया
  • 7 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय चयनकर्ता बने
  • अगस्त 2024 तक इस पद पर रहे

इसके अलावा:

  • घरेलू क्रिकेट
  • IPL
  • टीवी कमेंट्री

में भी वह लगातार सक्रिय रहे।

सलिल अंकोला की कहानी क्यों खास है?

क्योंकि यह सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं है।

यह कहानी है:

  • अधूरे सपनों की
  • अचानक खत्म हुए करियर की
  • मानसिक संघर्ष की
  • और फिर वापसी की कोशिश की

कई खिलाड़ी मैदान पर हारते हैं…
लेकिन जिंदगी के खिलाफ लड़ाई कहीं ज्यादा कठिन होती है।

और शायद यही वजह है कि सलिल अंकोला की journey लोगों को emotionally connect करती है।

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