Vaibhav – 15 साल की उम्र में ज्यादातर खिलाड़ी अंडर-16 क्रिकेट में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश कर रहे होते हैं… लेकिन वैभव सूर्यवंशी को लेकर अब चर्चा सीधे भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंच गई है।
आईपीएल में विस्फोटक बल्लेबाजी के बाद इस युवा बल्लेबाज को लेकर जो उत्साह बना हुआ था, अब वह और बढ़ गया है। और इसकी सबसे बड़ी वजह बने हैं राजस्थान रॉयल्स के हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर और उनके मेंटर जुबिन भरूचा।
भरूचा का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी को उसी तरह सीधे भारतीय टीम में मौका दिया जाना चाहिए जैसे 1989 में सचिन तेंदुलकर को मिला था। यह तुलना छोटी नहीं है… और इसी वजह से क्रिकेट जगत में इस बयान की काफी चर्चा हो रही है।
“सचिन की तरह भरोसा दिखाना चाहिए”
जुबिन भरूचा ने Wisden से बातचीत में कहा कि वैभव सूर्यवंशी के आंकड़े और प्रभाव इतने मजबूत हैं कि उन्हें सीधे मौका देने से डरना नहीं चाहिए।
उन्होंने कहा:
“अगर आप स्कोर, स्ट्राइक रेट और रन देखें, तो वह पहले से लाइन में खड़े कई खिलाड़ियों से आगे हैं। मुझे लगता है कि उन पर सचिन तेंदुलकर की तरह भरोसा करना चाहिए और सीधे मौका देना चाहिए।”
1989 में जब बीसीसीआई ने 16 साल के सचिन तेंदुलकर को पाकिस्तान दौरे पर टेस्ट डेब्यू कराया था, तब भी कई लोगों को यह फैसला जोखिम भरा लगा था। लेकिन बाद में वही भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा turning point साबित हुआ।
अब भरूचा को लगता है कि वैभव सूर्यवंशी में भी वैसी ही rare cricketing intelligence मौजूद है।
क्या वैभव सूर्यवंशी सच में टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार हैं?
यही सबसे बड़ा सवाल है।
वैभव ने अब तक:
| फॉर्मेट | अनुभव |
|---|---|
| First-Class मैच | 8 |
| युवा टेस्ट मैच | कुछ |
| T20 क्रिकेट | सबसे ज्यादा |
| List-A/वनडे | सीमित |
यानी उनका सबसे मजबूत format फिलहाल T20 ही माना जा रहा है।
लेकिन भरूचा का कहना है कि तकनीकी रूप से यह खिलाड़ी भविष्य में लंबे फॉर्मेट में भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
तकनीक को लेकर क्या बोले जुबिन भरूचा?
भरूचा ने वैभव की बल्लेबाजी तकनीक पर काफी विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा:
“वह पूरी तरह committed नहीं होते, हमेशा बैकफुट पर रहते हैं। मेरे लिए बल्लेबाजी का यही मूल मंत्र है।”
उनका मानना है कि:
- वैभव का बैकफुट गेम मजबूत है
- pace को जल्दी pick करते हैं
- लेकिन swinging conditions में front-foot technique पर काम करना होगा
यानी फिलहाल उनका natural game white-ball cricket में ज्यादा suited दिखता है।
“ओपनिंग उनके लिए सही जगह नहीं”
दिलचस्प बात यह रही कि भरूचा ने वैभव सूर्यवंशी को टेस्ट क्रिकेट में ओपनर बनाने के विचार से सहमति नहीं जताई।
हालांकि वैभव ने ज्यादातर क्रिकेट opening batter के तौर पर खेला है, लेकिन भरूचा का मानना है कि उनकी असली क्षमता middle-order में छिपी है।
उन्होंने कहा:
“मैं उन्हें चौथे नंबर पर भी अभी नहीं खिलाऊंगा। पांचवें या छठे नंबर पर वह ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं।”
यानी भरूचा वैभव को ऐसे बल्लेबाज के रूप में देखते हैं जो:
- पुराने गेंदबाजों पर हमला करे
- 60-70 ओवर के बाद मैच बदल दे
- counter-attacking innings खेले
कुछ हद तक यह role मौजूदा भारतीय टीम में ऋषभ पंत जैसे बल्लेबाज निभाते हैं।
विदेशी परिस्थितियां होंगी असली परीक्षा
भरूचा ने इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि:
- बेंगलुरु जैसी pitches पर वैभव opening करके सफल हो सकते हैं
- लेकिन लीड्स या इंग्लैंड की swinging conditions अलग challenge होंगी
उन्होंने कहा:
“अगर वह गेंद की movement और pace variations को समझना सीख जाएं, तो भविष्य में top-order में भी उतने ही खतरनाक हो सकते हैं।”
यानी फिलहाल focus technique refinement पर होना चाहिए।
IPL ने क्यों बढ़ा दी चर्चा?
वैभव सूर्यवंशी की चर्चा अचानक नहीं शुरू हुई।
पिछले एक साल में उन्होंने:
- IPL में fearless batting की
- बड़े गेंदबाजों पर attack किया
- pressure situations में maturity दिखाई
और सबसे बड़ी बात —
15 साल की उम्र में भी वह दबाव में घबराते नहीं दिखे।
यही चीज selectors और experts को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है।
क्या भारत फिर युवा प्रतिभा पर बड़ा दांव लगाएगा?
भारतीय क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को लेकर अब approach बदल चुकी है।
पहले selectors:
- लंबा घरेलू अनुभव
- लगातार first-class प्रदर्शन
देखते थे।
लेकिन अब:
- impact
- temperament
- high-pressure adaptability
को भी उतना ही महत्व दिया जा रहा है।
यही वजह है कि वैभव जैसे खिलाड़ी इतनी कम उम्र में भी राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं।
क्या सचिन से तुलना सही है?
यह तुलना फिलहाल काफी बड़ी मानी जाएगी।
क्योंकि:
- सचिन तेंदुलकर एक generational phenomenon थे
- और टेस्ट क्रिकेट में उनका impact ऐतिहासिक रहा
लेकिन भरूचा शायद skills से ज्यादा courage की बात कर रहे हैं —
यानी selectors को डरना नहीं चाहिए अगर talent exceptional हो।
और शायद यही वजह है कि उन्होंने “trust” शब्द पर सबसे ज्यादा जोर दिया।
अभी जल्दबाजी होगी या सही समय?
क्रिकेट experts इस मुद्दे पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं।
कुछ का मानना है:
- वैभव को घरेलू red-ball cricket ज्यादा खेलना चाहिए
- तकनीक और temperament को develop होने देना चाहिए
जबकि दूसरे पक्ष का कहना है:
- exceptional talents का development अलग होता है
- उन्हें बड़े स्तर पर जल्दी exposure देना चाहिए
यानी बहस अभी लंबी चलने वाली है।















