Suryavanshi – भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए सितारे वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी कल्पना उनकी उम्र के अधिकांश खिलाड़ी भी नहीं कर पाते। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है और अब भारतीय टीम के लिए खेलने की दहलीज पर खड़े हैं।
लेकिन वैभव की इस सफलता के पीछे उनके पिता संजीव सूर्यवंशी का वर्षों का संघर्ष और त्याग छिपा है। अपने बेटे का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेच दी, लेकिन कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
पिता ने पहचानी बेटे की प्रतिभा
वैभव सूर्यवंशी के पिता संजीव ने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) से बातचीत में बताया कि उन्होंने अपने बेटे के अंदर की प्रतिभा तब पहचान ली थी, जब वह सिर्फ चार साल का था।
प्लास्टिक की गेंद से खेलते समय वैभव की टाइमिंग और शॉट खेलने की क्षमता ने उन्हें प्रभावित किया। तभी उन्होंने तय कर लिया कि वह बेटे को क्रिकेटर बनाएंगे।
समस्तीपुर से पटना तक संघर्ष का सफर
वैभव को बेहतर प्रशिक्षण दिलाने के लिए उनके पिता उन्हें समस्तीपुर से पटना कोचिंग के लिए लेकर जाया करते थे।
यह सफर लंबा और खर्चीला था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बेटे के क्रिकेट करियर को आसान बनाने के लिए उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन बेचकर एक कार खरीदी, ताकि नियमित रूप से अभ्यास के लिए जा सकें।
‘अब जमीन और पैसे का कोई महत्व नहीं’
संजीव सूर्यवंशी ने अपने संघर्ष को याद करते हुए कहा,
“अब सपना सच हो गया है। अब जमीन, पैसा और रुपया का कोई महत्व नहीं है। भारत और विदेशों में जो सम्मान और पहचान मिल रही है, उससे हम बहुत खुश हैं।”
उन्होंने कहा कि बेटे की सफलता उनके लिए हर त्याग से कहीं बड़ी है।
त्याग पर नहीं है कोई पछतावा
जब उनसे पूछा गया कि क्या जमीन बेचने का कभी अफसोस हुआ, तो उन्होंने साफ कहा,
“कोई पछतावा नहीं है। वैभव जो भी हासिल कर रहा है, वह इन सब चीजों से कहीं ऊपर है। बचपन से उसने बहुत मेहनत की है और हमारा सपना था कि वह देश के लिए खेले। आज उसे यह सौभाग्य मिला है।”
15 साल की उम्र में बनाई खास पहचान
वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बना ली है।
हाल ही में समाप्त हुए आईपीएल में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पुरस्कार जीते और अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।
उनके प्रदर्शन के दम पर उन्हें विभिन्न भारतीय टीमों में मौका मिला है।
जल्द भारतीय जर्सी में दिखेंगे वैभव
आने वाले महीनों में वैभव सूर्यवंशी आयरलैंड, इंग्लैंड और एशियाई खेलों में भारतीय जर्सी पहनते हुए नजर आ सकते हैं।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उनका यही प्रदर्शन जारी रहा तो भविष्य में वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शामिल हो सकते हैं।
श्रीलंका ए के खिलाफ नहीं चला बल्ला
इंडिया ए टीम के साथ जारी ट्राई सीरीज में वैभव सूर्यवंशी को 50 ओवर के प्रारूप में भी खुद को साबित करने का मौका मिल रहा है।
श्रीलंका ए के खिलाफ वह बड़ी पारी नहीं खेल सके थे, लेकिन अफगानिस्तान ए के खिलाफ उन्होंने 22 गेंदों में 44 रन की विस्फोटक पारी खेलकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
चयनकर्ताओं की उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं
वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी और आत्मविश्वास ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया है। कम उम्र में बड़े मंच पर दबाव झेलने की उनकी क्षमता उन्हें अन्य युवा खिलाड़ियों से अलग बनाती है।















