R Ashwin – टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अपने करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। अश्विन ने बताया कि पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर के एक आर्टिकल ने उन्हें उस समय काफी गुस्सा दिला दिया था। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने उसी आलोचना को अपनी कमजोरी के बजाय सीख में बदल दिया।
अश्विन के मुताबिक, मांजरेकर की आलोचना ने उन्हें अपने खेल पर और ज्यादा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। कुछ साल बाद जब मांजरेकर ने उनकी गेंदबाजी की तारीफ की, तो अश्विन ने उन्हें खुद मैसेज करके बताया कि शुरुआती आलोचना ने उनके करियर में किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पहले गुस्सा आया, फिर आलोचना को समझा
आर अश्विन ने JioHotstar के एक शो में बताया कि वह आलोचना को किस तरह लेते हैं। उन्होंने अपने पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद लिखे गए संजय मांजरेकर के आर्टिकल का जिक्र किया।
अश्विन के मुताबिक, जब उन्होंने फ्लाइट में वह पूरा आर्टिकल पढ़ा तो उन्हें काफी गुस्सा आया और बुरा भी लगा। उस समय उनकी पहली प्रतिक्रिया आलोचना को स्वीकार करने की नहीं थी।
हालांकि, यात्रा के दौरान सोने के बाद उन्होंने उस घटना को कुछ समय के लिए छोड़ दिया। घर लौटने के बाद उन्होंने अगले कई वर्षों तक अपने क्रिकेट पर लगातार मेहनत की।
चार साल तक की कड़ी मेहनत
अश्विन ने बताया कि वह खुद को कोई बेहद प्रतिभाशाली एथलीट नहीं मानते थे। इसलिए उन्होंने अपनी कमियों को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत की।
उन्होंने अपने खेल में लगातार सुधार करने पर ध्यान दिया और लगभग चार साल बाद उन्हें इसका परिणाम भी देखने को मिला।
इसी दौरान 2015 में संजय मांजरेकर ने एक और आर्टिकल लिखा, जिसमें उन्होंने अश्विन की गेंदबाजी की तारीफ की और उम्मीद जताई कि वह इसी तरह प्रदर्शन करते रहें।
यही वह समय था जब अश्विन को महसूस हुआ कि शुरुआती आलोचना में कुछ ऐसी बातें थीं, जिन्हें उन्हें अपने खेल में सुधार के लिए इस्तेमाल करना चाहिए था।
‘उनका आर्टिकल मेरे लिए गुरु की तरह आया’
संजय मांजरेकर के दूसरे आर्टिकल के बाद अश्विन ने उनका नंबर मांगा और उन्हें मैसेज किया।
अश्विन ने उन्हें बताया कि शुरुआती आर्टिकल पढ़कर उन्हें बुरा लगा था, लेकिन बाद में उन्होंने महसूस किया कि उसमें कही गई बातों से उन्हें सीखने का मौका मिला।
अश्विन के अनुसार, मांजरेकर की आलोचना उनके लिए एक गुरु की तरह साबित हुई और उसने उनके क्रिकेट करियर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यही वजह है कि अब अश्विन किसी भी आलोचना को तुरंत खारिज करने के बजाय उसमें सीखने की संभावना तलाशते हैं।
आलोचना से सीखने का Ashwin का तरीका
अश्विन ने बताया कि अगर आज कोई उनकी आलोचना करता है, तो वह सबसे पहले यह सोचते हैं कि क्या उस आलोचना में उनके लिए कोई सीख छिपी हुई है।
अगर उन्हें लगता है कि आलोचना से कुछ बेहतर करने का रास्ता मिल सकता है, तो वह उसे स्वीकार कर लेते हैं।
उनकी यह सोच बताती है कि लंबे क्रिकेट करियर के दौरान उन्होंने सिर्फ तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक तौर पर भी खुद को लगातार विकसित किया।
Ashwin की सीख क्या है?
- हर आलोचना को तुरंत व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए।
- आलोचना में अगर कोई सही बात है तो उससे सीखना चाहिए।
- अपनी कमजोरियों पर लगातार काम करना जरूरी है।
- गुस्से की जगह आलोचना का विश्लेषण करना ज्यादा फायदेमंद है।
- सफलता के लिए प्रतिभा के साथ मेहनत भी जरूरी है।
डेढ़ दशक तक Team India का हिस्सा रहे Ashwin
रविचंद्रन अश्विन ने करीब डेढ़ दशक तक भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में खुद को दुनिया के सबसे प्रभावशाली स्पिन गेंदबाजों में स्थापित किया।
अश्विन ने भारत के लिए क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में खेला और कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।
उनका करियर केवल विकेट लेने तक सीमित नहीं रहा। वह जरूरत पड़ने पर बल्ले से भी उपयोगी योगदान देने वाले खिलाड़ी रहे।
Retirement के बाद भी प्रोफेशनल क्रिकेट में वापसी की तैयारी
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अश्विन आईपीएल में भी सक्रिय खिलाड़ी के रूप में नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, अब वह एक बार फिर प्रोफेशनल क्रिकेट में वापसी करते दिखाई दे सकते हैं।
अश्विन European T20 Premier League का हिस्सा बनने वाले हैं, जहां वह मेंटॉर और कप्तान की भूमिका निभाएंगे।
यह रिटायरमेंट के बाद उनके प्रोफेशनल क्रिकेट करियर की एक नई शुरुआत होगी। चोट के कारण वह कुछ टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सके थे, लेकिन अब उनकी नजर एक नई भूमिका में क्रिकेट से जुड़ने पर है।
Sanjay Manjrekar की आलोचना बनी Ashwin के लिए सीख
रविचंद्रन अश्विन का यह किस्सा बताता है कि किसी खिलाड़ी के करियर में आलोचना भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है जितनी तारीफ। शुरुआत में मांजरेकर के आर्टिकल से अश्विन को गुस्सा आया था, लेकिन उन्होंने बाद में उसकी बातों को समझा और अपने खेल पर काम किया।
चार साल की मेहनत के बाद जब वही आलोचक उनकी गेंदबाजी की तारीफ कर रहा था, तो अश्विन ने इसे अपने लिए एक महत्वपूर्ण सीख के रूप में देखा।
आज अश्विन का नजरिया यही है कि अगर आलोचना में सुधार की कोई बात छिपी है, तो उसे स्वीकार करना चाहिए। यही मानसिकता उनके लंबे और सफल क्रिकेट करियर की बड़ी वजहों में से एक रही।













