Abhishek : सुपर आठ से पहले परीक्षा – अभिषेक पर सबकी नजरें

Atul Kumar
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Abhishek

Abhishek – अहमदाबाद में भारत और नीदरलैंड के बीच टी20 विश्व कप का 36वां मुकाबला भले औपचारिक लगे, लेकिन एक खिलाड़ी के लिए यह मैच बेहद निजी हो सकता है—अभिषेक शर्मा। टूर्नामेंट से पहले जिनसे विस्फोट की उम्मीद थी, वे अब तक खामोश हैं। और टी20 में खामोशी लंबी हो जाए तो सवाल तेज हो जाते हैं।

दो मैच, दो बार शून्य। नामीबिया के खिलाफ पेट के संक्रमण के कारण नहीं खेले। पाकिस्तान के खिलाफ वापसी, लेकिन पहली ही गेंद पर आउट। आंकड़े कह रहे हैं—संघर्ष। लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं।

फॉर्म बनाम फितरत

अभिषेक शर्मा पिछले 18 महीनों में टी20 के सबसे आक्रामक सलामी बल्लेबाजों में गिने गए हैं। पावरप्ले में जोखिम लेने की उनकी आदत ने भारत को कई तेज शुरुआतें दी हैं। गेंद हवा में जाती है, लेकिन अक्सर सीमा रेखा पार करती है।

समस्या यह है कि हालिया छह पारियों में चार बार शून्य। यह महज खराब दिन नहीं, एक पैटर्न जैसा दिखने लगा है।

हालिया पारियांस्कोर
बनाम अमेरिका0
बनाम नामीबियानहीं खेले
बनाम पाकिस्तान0
पिछली घरेलू पारियां (अन्य)0, 0, 35, 12

यह आंकड़े बताते हैं कि पावरप्ले में उनकी रणनीति विपक्ष पढ़ चुका है। ऑफ स्टंप के बाहर शॉर्ट ऑफ लेंथ, या फुल गेंदें जिन पर वह लॉफ्टेड शॉट खेलना चाहते हैं—जोखिम बड़ा है।

कोच का भरोसा

बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनका बचाव किया।
“उसकी तबीयत ठीक नहीं थी… हम ज्यादा विश्लेषण नहीं करना चाहते। अब वह ठीक है।”

यह बयान सिर्फ औपचारिक समर्थन नहीं, टीम मैनेजमेंट की रणनीति का हिस्सा है। टी20 में आत्मविश्वास आधा खेल होता है। अगर ड्रेसिंग रूम खिलाड़ी के साथ है, तो बाहर का शोर कम असर करता है।

कोटक ने यह भी कहा कि विपक्षी टीमें अभिषेक को लेकर प्लान बनाती हैं। “अगर आप उसे आउट नहीं करते हैं, तो उसे रोकना मुश्किल है।” यह बात सही है—उनकी स्ट्राइक रेट मैच की दिशा बदल सकती है।

शास्त्री की सलाह: थोड़ा समय दो

यह सलाह दिलचस्प है। टी20 में अक्सर बल्लेबाज पहले छह गेंदों में ही रफ्तार पकड़ना चाहते हैं। लेकिन कभी-कभी दो ओवर “देखकर” खेलना भी रणनीति हो सकती है।

रणनीतिक बदलाव की जरूरत?

अभिषेक की शैली बेखौफ है। लेकिन बेखौफ और बेपरवाह के बीच महीन अंतर होता है।

भारत की टीम पहले ही सुपर आठ में पहुंच चुकी है। ऐसे में यह मैच प्रयोग का मौका हो सकता है। क्या अभिषेक इस बार पावरप्ले में थोड़ा संयम दिखाएंगे? क्या वह पहली 10 गेंदें टिककर खेलेंगे?

अगर वह 15 गेंदों पर 10 रन भी बना लेते हैं और फिर गियर बदलते हैं, तो उनका प्रभाव वही रह सकता है—बस जोखिम कम होगा।

दबाव कितना?

घरेलू विश्व कप, भरा हुआ स्टेडियम, और सोशल मीडिया की लगातार प्रतिक्रिया—यह सब किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए चुनौती है। लेकिन अभिषेक की खासियत यही है कि वह ज्यादा सोचते नहीं।

कोटक ने कहा, “वह ऐसा इंसान नहीं है जो चीजों की बहुत ज्यादा परवाह करता हो, जिसकी T20 गेम में जरूरत होती है।” यह गुण ताकत भी है, और कभी-कभी कमजोरी भी।

नीदरलैंड के खिलाफ मौका

नीदरलैंड का गेंदबाजी आक्रमण अनुभवहीन है, खासकर नई गेंद से। यह अभिषेक के लिए सही मौका हो सकता है—फॉर्म में वापसी का, आत्मविश्वास वापस पाने का।

अगर वह इस मैच में बड़ी पारी खेलते हैं, तो सारी चर्चा खत्म। अगर फिर जल्दी आउट होते हैं, तो सुपर आठ से पहले चयन पर बहस तेज हो सकती है।

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