BCCI – भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों चोटों की समस्या से जूझ रही है। एक के बाद एक खिलाड़ियों के चोटिल होने के कारण टीम मैनेजमेंट और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की चिंता बढ़ गई है। इसी सिलसिले में BCCI सचिव देवजीत सैकिया रविवार को बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) पहुंचेंगे और क्रिकेट प्रमुख VVS लक्ष्मण से मुलाकात करेंगे।
इस बैठक में खिलाड़ियों के रिहैबिलिटेशन, फिटनेस और मैदान पर वापसी की प्रक्रिया का जायजा लिया जाएगा। मौजूदा समय में कई प्रमुख भारतीय खिलाड़ी अलग-अलग चोटों के कारण COE में रिहैब कर रहे हैं।
बुमराह से लेकर साई सुदर्शन तक कई खिलाड़ी चोटिल
भारतीय टीम को फिलहाल कई अहम खिलाड़ियों की सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
चोटिल खिलाड़ियों में प्रमुख नाम हैं:
- जसप्रीत बुमराह – घुटने में सूजन
- बी साई सुदर्शन – पैर के बड़े अंगूठे में चोट
- हर्षित राणा – मांसपेशियों में खिंचाव
- नीतीश कुमार रेड्डी – हैमस्ट्रिंग और क्वाड्रिसेप्स से जुड़ी समस्या
- वॉशिंगटन सुंदर – जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव
- आकाश दीप – स्ट्रेस फ्रैक्चर
- हार्दिक पांड्या – जांघ की मांसपेशियों में चोट
- वरुण चक्रवर्ती – मांसपेशियों में खिंचाव
- प्रिंस यादव – मांसपेशियों में खिंचाव
इन खिलाड़ियों की वजह से COE की स्पोर्ट्स साइंस टीम पर भी काफी दबाव है।
आकाश दीप सबसे लंबे समय से हैं बाहर
तेज गेंदबाज आकाश दीप लंबे समय से टीम से बाहर हैं। वह बंगाल के रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में हार के बाद से ही मैदान से दूर हैं।
उनकी चोट स्ट्रेस फ्रैक्चर बताई जा रही है, जिसके कारण उनकी वापसी में समय लग रहा है।
BCCI सचिव देवजीत सैकिया करेंगे VVS लक्ष्मण से मुलाकात
चोटों की स्थिति का जायजा लेने के लिए BCCI सचिव देवजीत सैकिया रविवार को बेंगलुरु में VVS लक्ष्मण से मुलाकात करेंगे।
BCCI सूत्र के मुताबिक, दोनों के बीच बैठक तय है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर इस बैठक में ऑनलाइन शामिल होंगे या नहीं।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों की फिटनेस, रिहैब और उनकी संभावित वापसी की समयसीमा की समीक्षा करना होगा।
बुमराह और साई सुदर्शन की फिटनेस बनी बड़ी चिंता
जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन को फिटनेस के अधीन टीम में चुना गया था। हालांकि COE की विशेषज्ञ टीम ने दोनों मामलों में सावधानी बरतने का फैसला किया।
बुमराह के घुटने में चोट के बाद सूजन और वॉटर रिटेंशन की समस्या सामने आई है। इसके कारण उनकी रिकवरी में अनुमान से अधिक समय लग रहा है।
वहीं साई सुदर्शन कुछ समय तक रोजाना लगभग 75 मिनट बल्लेबाजी कर रहे थे, लेकिन उनके पैर के बड़े अंगूठे में दर्द पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
नीतीश कुमार रेड्डी की गेंदबाजी पर पड़ा असर
ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी की चोट के पीछे उनकी गेंदबाजी की गति बढ़ाने की कोशिश को भी वजह माना जा रहा है।
बताया गया कि नीतीश ने अपनी गेंदबाजी की स्पीड में लगभग 7-8 किलोमीटर प्रति घंटे की बढ़ोतरी करने का प्रयास किया। इसके दौरान उनकी हैमस्ट्रिंग और क्वाड्रिसेप्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ा और वह चोटिल हो गए।
यह टीम मैनेजमेंट के लिए इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि नीतीश भारत के भविष्य के महत्वपूर्ण ऑलराउंडरों में शामिल हैं।
चोटों के मैनेजमेंट को लेकर उठे सवाल
चोटों की बढ़ती संख्या के बीच COE और चयन समिति के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों पक्ष खिलाड़ियों की चोट के प्रबंधन और उनकी वापसी की समयसीमा को लेकर हमेशा एकमत नहीं रहे हैं।
कुछ खिलाड़ियों को सभी फिटनेस मानकों पर पूरी तरह खरा उतरने से पहले ही रिलीज किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन दावों पर BCCI की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
हर्षित राणा के फिटनेस स्तर पर भी सवाल
हर्षित राणा को लेकर भी चयन समिति की नाराजगी की खबरें सामने आई हैं।
बताया गया कि इंग्लैंड पहुंचने के समय उनका वजन अपेक्षाकृत अधिक था। चयन समिति इस स्थिति से खुश नहीं थी।
इसके बाद वह चोटिल हो गए और फिलहाल रिहैब की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
COE में नहीं है स्पोर्ट्स साइंस विभाग का प्रमुख
भारतीय खिलाड़ियों की लगातार चोटों के बीच COE के स्पोर्ट्स साइंस विभाग पर भी दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की शुरुआत में नितिन पटेल के इस्तीफे के बाद से इस विभाग में कोई स्थायी प्रमुख नहीं है।
ऐसे में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के एक साथ रिहैब में होने से सपोर्ट स्टाफ के सामने अतिरिक्त चुनौती खड़ी हो गई है।
अब BCCI की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
फिलहाल BCCI और टीम मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ी चुनौती चोटिल खिलाड़ियों को जल्दबाजी किए बिना पूरी तरह फिट करना है।
खासकर बुमराह, साई सुदर्शन, हार्दिक पांड्या, आकाश दीप और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों की फिटनेस भारतीय टीम के आगामी व्यस्त कार्यक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
चोटिल खिलाड़ियों को जल्द मैदान पर वापस लाने की कोशिश में अगर उनकी रिकवरी अधूरी रह गई, तो चोट दोबारा बढ़ने का खतरा भी रहता है। इसलिए COE की आगामी बैठक में फिटनेस प्रोटोकॉल और खिलाड़ियों की वापसी की टाइमलाइन पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है।












