जब द्रविड़ ने पकड़ा धोनी का हाथ, पहले मैच में कहा था अपने दिल का जज़्बात, करोड़ों लोग नहीं जानते हैं वो शुरुआती कहानी।

क्रिकेट की दुनिया में राहुल द्रविड़ और महेंद्र सिंह धोनी के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे हैं। एक ‘द वॉल’ के नाम से मशहूर, तो दूसरा ‘कैप्टन कूल’। दोनों के खेलने का अंदाज़ अलग, लेकिन टीम इंडिया के लिए समर्पण एक समान। यह कहानी है इन दो दिग्गजों की, जो क्रिकेट के मैदान पर साथ मिलकर इतिहास रचते गए।

शुरुआत: जब ‘द वॉल’ ने ‘माही’ का किया स्वागत

साल 2004, विशाखापत्तनम का मैदान। एक नौजवान खिलाड़ी, लंबे बाल, आक्रामक तेवर। यह था महेंद्र सिंह धोनी का डेब्यू मैच। क्रीज़ पर उनका साथ देने पहुंचे राहुल द्रविड़, शांत, सौम्य और तकनीक के धनी। धोनी का बल्ला उस दिन कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया, लेकिन द्रविड़ ने उन्हें हौसला दिया, “माही, तुम्हारे अंदर कुछ खास है, बस खुद पर भरोसा रखो।”

dravi and dhoni

साझेदारियाँ: जब दो बल्लेबाजों ने दिखाई एकजुटता

द्रविड़ और धोनी की कई यादगार पार्टनरशिप भारतीय क्रिकेट की शान बनीं। द्रविड़ की तकनीक और धोनी की आक्रामकता का मेल ऐसा था, मानो दो अलग-अलग ध्रुव एक साथ मिलकर खेल रहे हों। एक बार तो 2009 में पाकिस्तान के खिलाफ धोनी ने द्रविड़ के साथ मिलकर मैच ही पलट दिया था!

कप्तानी का दौर: जब ‘द वॉल’ ने ‘कैप्टन कूल’ को सौंपी कमान

2007 में जब द्रविड़ ने कप्तानी छोड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने धोनी को कप्तान बनाने की सिफारिश की। यह फैसला एक नए युग की शुरुआत थी। द्रविड़ की शांत और रणनीतिक सोच ने धोनी की कप्तानी में एक अहम भूमिका निभाई। इसी जोड़ी ने 2007 में भारत को पहला टी20 वर्ल्ड कप जिताया, और फिर 2011 में 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप घर लाए!

एक-दूसरे के लिए सम्मान: दोस्ती से बढ़कर रिश्ता

द्रविड़ और धोनी के बीच का रिश्ता सिर्फ खिलाड़ी-कप्तान का नहीं, दोस्ती का था। द्रविड़ धोनी की आक्रामकता और जोखिम लेने की क्षमता की तारीफ करते, तो धोनी द्रविड़ के अनुभव और शांत स्वभाव का लोहा मानते। यह सम्मान और एक-दूसरे पर भरोसा ही था, जिसने टीम इंडिया को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई।

विरासत: क्रिकेट की दुनिया में एक मिसाल

द्रविड़ और धोनी की जोड़ी भारतीय क्रिकेट की एक सुनहरी विरासत है। दोनों ने अपने-अपने अंदाज़ में टीम इंडिया को आगे बढ़ाया। द्रविड़ ने तकनीक और धैर्य की मिसाल पेश की, तो धोनी ने आक्रामकता और नेतृत्व का एक नया आयाम स्थापित किया। आज भी जब ये दोनों नाम साथ आते हैं, तो क्रिकेट प्रेमियों के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है। यह मुस्कान है उन यादगार जीतों की, जो इन दो दिग्गजों ने हमें दी हैं।

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