Duleep Trophy 2026 – 23 अगस्त से दलीप ट्रॉफी 2026 का आगाज होने जा रहा है। इस बार टूर्नामेंट में छह जोन की टीमें हिस्सा लेंगी और सभी की नजरें युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेंगी। इनमें सबसे बड़ा नाम 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का है।
वैभव इस टूर्नामेंट में सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर नहीं उतरेंगे, बल्कि उन्हें ईस्ट जोन का उप-कप्तान भी बनाया गया है। टीम की कप्तानी ईशान किशन करेंगे। ऐसे में वैभव के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां होंगी—रेड-बॉल क्रिकेट में खुद को साबित करना और इतनी कम उम्र में नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाना।
वैभव के लिए दलीप ट्रॉफी क्यों है खास?
वैभव सूर्यवंशी का करियर बेहद कम उम्र में तेजी से आगे बढ़ा है। 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाले वैभव ने कम समय में ही आईपीएल और टी20 क्रिकेट में अपनी पहचान बना ली है।
लेकिन दलीप ट्रॉफी उनके लिए बिल्कुल अलग परीक्षा होगी।
व्हाइट-बॉल क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले वैभव को अब लंबे फॉर्मेट में धैर्य, तकनीक और डिफेंस का प्रदर्शन करना होगा।
ईस्ट जोन अपने अभियान की शुरुआत बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ करेगा। इस मुकाबले में वैभव पर खास नजर रहेगी।
15 साल की उम्र में मिली उप-कप्तानी
वैभव को ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनाया जाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
उनकी टीम में मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, अभिमन्यु ईश्वरन और ईशान किशन जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं। ऐसे खिलाड़ियों के बीच 15 साल के वैभव को नेतृत्व समूह में शामिल करना बताता है कि चयनकर्ता उनके भविष्य को लेकर कितने गंभीर हैं।
यह उनके लिए केवल सम्मान नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है।
उन्हें मैदान पर अनुभवी खिलाड़ियों के साथ संवाद करना होगा और जरूरत पड़ने पर कप्तान ईशान किशन का साथ देना होगा।
रेड-बॉल क्रिकेट में वैभव की सबसे बड़ी परीक्षा
वैभव ने टी20 क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से काफी प्रभावित किया है, लेकिन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड अभी उतना प्रभावशाली नहीं है।
उन्होंने अब तक 8 प्रथम श्रेणी मैचों में 207 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 17.25 रहा है और उनके नाम सिर्फ एक अर्धशतक है।
यही वजह है कि दलीप ट्रॉफी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण बन जाती है।
अगर वैभव इस टूर्नामेंट में लंबी पारियां खेलने में सफल रहते हैं तो वह साबित कर सकते हैं कि उनकी प्रतिभा सिर्फ टी20 क्रिकेट तक सीमित नहीं है।
जिम्बाब्वे के बाद शुरू की रेड-बॉल की तैयारी
जिम्बाब्वे दौरे से लौटने के बाद वैभव ने रेड-बॉल क्रिकेट की तैयारियों पर खास ध्यान दिया।
उन्होंने नागपुर स्थित राजस्थान रॉयल्स के परफॉर्मेंस सेंटर में 10 दिन के शिविर में हिस्सा लिया। इस दौरान उनका फोकस सिर्फ बड़े शॉट खेलने पर नहीं था।
उन्होंने अपनी तकनीक के उन हिस्सों पर काम किया जिनकी टेस्ट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
विशेष रूप से वैभव ने:
- रक्षात्मक शॉट खेलने की तकनीक पर काम किया।
- स्टंप से बाहर जाती गेंदों को छोड़ने का अभ्यास किया।
- आक्रामक बल्लेबाजी के साथ संयम पर जोर दिया।
- लंबे समय तक क्रीज पर टिकने की तैयारी की।
वैभव ने अपने प्रशिक्षण का एक वीडियो भी साझा किया था, जिसका शीर्षक ‘तैयारी’ था।
व्हाइट-बॉल और रेड-बॉल रिकॉर्ड में बड़ा अंतर
वैभव के करियर की सबसे दिलचस्प बात यही है कि टी20 क्रिकेट में उनकी सफलता और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के आंकड़ों में काफी अंतर है।
आईपीएल में उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से बड़े गेंदबाजों को परेशान किया है। अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में भी उन्होंने कम उम्र में अपनी क्षमता दिखाई।
लेकिन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अभी तक वह उसी प्रभाव को दोहरा नहीं पाए हैं।
इसलिए दलीप ट्रॉफी में उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा—क्या वैभव अपनी टी20 वाली आक्रामकता को रेड-बॉल क्रिकेट के धैर्य के साथ जोड़ पाएंगे?
इंग्लैंड में शुरुआत रही मुश्किल
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वैभव की शुरुआत इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज से हुई थी।
उन्होंने शुरुआती तीन मुकाबलों में 14, 13 और 15 रन बनाए। ये पारियां बड़ी नहीं थीं, लेकिन इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।
इसके बाद जिम्बाब्वे दौरे पर उन्होंने शानदार वापसी की।
जिम्बाब्वे में दो अर्धशतक और प्लेयर ऑफ द सीरीज
जिम्बाब्वे के खिलाफ वैभव ने शानदार बल्लेबाजी की और सीरीज में दो अर्धशतक लगाए।
भारत ने यह सीरीज 3-0 से अपने नाम की और वैभव को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित किया कि वैभव बड़े मंच पर दबाव संभालने की क्षमता रखते हैं।
अब उनकी अगली परीक्षा रेड-बॉल क्रिकेट में होगी।
क्या टी20 का सितारा फर्स्ट क्लास में भी चमकेगा?
दलीप ट्रॉफी वैभव के लिए सिर्फ एक घरेलू टूर्नामेंट नहीं है। यह उनके क्रिकेटिंग विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
टी20 क्रिकेट में तेजी से सफलता हासिल करने के बाद अब उन्हें यह दिखाना होगा कि वह अलग-अलग परिस्थितियों और फॉर्मेट में खुद को ढाल सकते हैं।
रेड-बॉल क्रिकेट में बल्लेबाज की असली परीक्षा उसकी तकनीक, धैर्य और परिस्थितियों के अनुसार खेलने की क्षमता से होती है।
वैभव ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अब बारी मैदान पर उसका असर दिखाने की है।
लीडरशिप भी होगी वैभव की परीक्षा
बल्लेबाजी के अलावा वैभव की नेतृत्व क्षमता पर भी नजर रहेगी।
15 साल की उम्र में उप-कप्तान की जिम्मेदारी मिलना असाधारण है। उनके आसपास उनसे उम्र और अनुभव में काफी बड़े खिलाड़ी होंगे।
ऐसे में वैभव को सिर्फ रन बनाने पर ध्यान नहीं देना होगा, बल्कि टीम के माहौल में योगदान देना, अनुभवी खिलाड़ियों से सीखना और कप्तान के साथ रणनीति में सहयोग करना भी होगा।













