Gambhir : क्यों द्रविड़–रोहित से अलग है गंभीर–सूर्यकुमार की कहानी

Atul Kumar
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Gambhir

Gambhir – रोहित शर्मा ने इंस्टाग्राम पर एक लाइन लिखी और भारतीय क्रिकेट की एक पूरी कहानी उसमें सिमट गई। “मेरी पत्नी आपको मेरी वर्क वाइफ कहती है…” यह कोई हल्का-फुल्का मज़ाक नहीं था। यह उस भरोसे, तालमेल और साझा सोच की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति थी, जिसने राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा की जोड़ी को भारत की सबसे सफल कोच-कप्तान साझेदारियों में बदल दिया।

अब द्रविड़ का अध्याय बंद हो चुका है। और ठीक उसी मोड़ पर, जब भारत 72 घंटे से भी कम समय में टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अपने खिताब बचाने उतरने वाला है, एक नई जोड़ी पर नज़र टिक गई है—सूर्यकुमार यादव और गौतम गंभीर।

द्रविड़–रोहित: जहां कप्तान बॉस था, कोच साथी

भारतीय क्रिकेट का इतिहास साफ कहता है—सबसे सफल दौर वही रहे हैं जहां कप्तान निर्विवाद रूप से टीम का जनरल रहा है।
सौरव गांगुली–जॉन राइट,
एमएस धोनी–गैरी कर्स्टन,
विराट कोहली–रवि शास्त्री,
और अब द्रविड़–रोहित।

द्रविड़ कभी फ्रंटफुट पर आकर कप्तान को ओवररूल करने वाले कोच नहीं रहे। वह स्ट्रक्चर बनाते थे, दिशा देते थे और फिर कप्तान को आगे बढ़ने देते थे। रोहित के लिए यह आदर्श माहौल था—जहां निर्णय लेने की आज़ादी भी थी और बैकअप भी।

इस मॉडल का नतीजा?
2024 का टी20 वर्ल्ड कप,
लगातार द्विपक्षीय सीरीज जीत,
और एक ड्रेसिंग रूम जो शांत, स्पष्ट और भरोसे से भरा रहा।

गंभीर–सूर्यकुमार: रोल्स साफ, स्वभाव अलग

गौतम गंभीर इस स्कूल से नहीं आते।
टी20 क्रिकेट में बदलाव की रफ्तार इतनी तेज़ है कि अब “कोच as manager” मॉडल ज़्यादा कारगर होता जा रहा है—और गंभीर ठीक उसी प्रोफाइल के हैं।

पिछले एक साल के आंकड़े चीख-चीखकर कहते हैं कि यह प्रयोग काम कर रहा है।
39 मैच, 31 जीत।
लगभग 80 प्रतिशत जीत का रिकॉर्ड।

लेकिन यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। असली फर्क है रोल्स की क्लैरिटी में।

गंभीर प्लान बनाते हैं।
सूर्यकुमार उसे मैदान पर जीते हैं।

पुराना रिश्ता, नई जिम्मेदारी

यह कोई नई केमिस्ट्री नहीं है।
सूर्यकुमार यादव पहली बार बड़े स्तर पर तब चमके थे, जब वह केकेआर में गौतम गंभीर की कप्तानी में फिनिशर बने। “स्काई” नाम भी वहीं से निकला—और यह बात इंडियन क्रिकेट सर्कल में किसी से छिपी नहीं है।

यह भी अब ओपन सीक्रेट है कि 2024 में सूर्यकुमार को टी20 कप्तान बनाने के पीछे गंभीर की मजबूत पैरवी थी। हार्दिक पंड्या से ऊपर सूर्या का नाम—यह सिर्फ फॉर्म का फैसला नहीं था, यह सोच का फैसला था।

अलग बैकग्राउंड, एक जैसी आग

सामाजिक पृष्ठभूमि में दोनों बिल्कुल अलग हैं।
गंभीर—दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर से, मजबूत कारोबारी परिवार।
सूर्यकुमार—मुंबई के चेंबूर से, मिडिल क्लास संघर्ष की पैदाइश।

लेकिन अंदर की आग?
वह बिल्कुल एक जैसी है।

गंभीर को कभी सहवाग जैसा टैलेंट नहीं मिला, उन्हें जगह बनाने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ी।
सूर्या को टैलेंट के बावजूद देर से पहचान मिली, और शुरुआती दौर में अहंकार के आरोप भी लगे।

दोनों राज्य क्रिकेट से टकराए।
दोनों सिस्टम से भिड़े।
और दोनों आज उसी सिस्टम के सबसे अहम चेहरे हैं।

राष्ट्रवाद, इगो नहीं—यह कॉमन थ्रेड है

एक और चीज जो दोनों को जोड़ती है—खुला राष्ट्रवाद।
यह छिपा हुआ नहीं है, यह दिखता है।
मैदान पर फैसलों में,
प्रेस कॉन्फ्रेंस के शब्दों में,
और टीम से “कम्फर्ट” की जगह “कमिटमेंट” की मांग में।

यह जोड़ी दोस्ताना नहीं है।
यह प्रोफेशनल है।
“आओ, काम करो, जीतने की कोशिश करो, घर जाओ”—इस दर्शन पर चलने वाली।

क्या यह द्रविड़–रोहित जैसा बनेगा?

शायद नहीं।
और शायद बनने की जरूरत भी नहीं।

द्रविड़–रोहित भरोसे की शादी थी।
गंभीर–सूर्यकुमार एक हाई-परफॉर्मेंस पार्टनरशिप है।

टी20 क्रिकेट में रोमांस नहीं, रफ्तार चाहिए।
और फिलहाल, यह जोड़ी उसी रफ्तार में चलती दिख रही है।

अब सवाल सिर्फ एक है—
क्या यह साझेदारी वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी परीक्षा पास कर पाएगी?

जवाब आने में ज़्यादा वक्त नहीं है।
वानखेड़े तैयार है।
टीम तैयार है।
और अब, कहानी लिखने की बारी इस नई “वर्किंग रिलेशनशिप” की है।

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