ICC – अगर किसी टेस्ट मैच के पहले ही दिन 20 विकेट गिर जाएं, तो पहली प्रतिक्रिया यही होती है—पिच ठीक नहीं थी। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जब यही नज़ारा भारत या किसी एशियाई देश में दिखता है, तो हंगामा मच जाता है।
सवाल उठते हैं, आईसीसी की टीमें दौरे पर आ जाती हैं और पिच को लेकर सख़्त टिप्पणियां होती हैं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड में ऐसा हो जाए, तो अक्सर बात को “मौसम”, “मूवमेंट” या “अच्छी गेंदबाज़ी” कहकर टाल दिया जाता है।
इस बार मामला थोड़ा अलग है। एशेज 2025-26 के चौथे टेस्ट में, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर जो हुआ, उसने इस दोहरे मापदंड की बहस को फिर से हवा दे दी है।
पहले ही दिन आधा टेस्ट खत्म
बॉक्सिंग डे टेस्ट, 26 दिसंबर से शुरू हुआ। ऐतिहासिक भीड़, शानदार माहौल और उम्मीद थी कि बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ों के बीच लंबी जंग देखने को मिलेगी। लेकिन पहले ही दिन खेल ऐसा पलटा कि आधा टेस्ट मैच खत्म हो गया।
- ऑस्ट्रेलिया – 152 रन पर ऑलआउट
- इंग्लैंड – 110 रन पर ऑलआउट
यानि 300 रन से भी कम में दोनों टीमों के 20 विकेट गिर गए। इतना ही नहीं, दिन के आखिर में ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी का एक विकेट भी लगभग गिर ही गया था, बस गेंद कैरी नहीं कर पाई।
यह कोई “संतुलित मुकाबला” नहीं था। यहां गेंद और बल्ले की बराबरी दिखी ही नहीं।
दिग्गजों ने उठाए सवाल
अब जब ऐसा नज़ारा मेलबर्न जैसे प्रतिष्ठित मैदान पर दिखा, तो आवाज़ें उठनी ही थीं। और इस बार आलोचना किसी छोटे-मोटे एक्सपर्ट की नहीं, बल्कि दिग्गजों की ओर से आई।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने BBC Test Match Special में साफ कहा:
“बॉक्सिंग डे टेस्ट के पहले दिन की पिच वाकई हैरान करने वाली थी।”
वहीं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कोच डैरेन लेहमन और भी सख़्त दिखे। उन्होंने SEN Radio पर कहा:
“मेलबर्न की पिच घटिया थी। इस तरह की सीम मूवमेंट तेज गेंदबाज़ों के लिए खतरनाक हो सकती है। यह सामान्य नहीं है।”
जब ऐसे नाम पिच की आलोचना करें, तो मामला हल्के में नहीं लिया जा सकता।
सवाल सीधा है: आईसीसी क्या करेगी?
अब असली बहस यहीं से शुरू होती है। अगर यही हाल किसी भारतीय पिच पर होता, तो क्या आईसीसी चुप रहती? शायद नहीं। लेकिन मेलबर्न के मामले में आईसीसी का रुख क्या होगा?
आईसीसी टेस्ट पिचों को चार कैटेगरी में रेट करती है।
आईसीसी की पिच रेटिंग सिस्टम
| रेटिंग | मतलब |
|---|---|
| Very Good | बेहतरीन पिच |
| Satisfactory | संतोषजनक |
| Unsatisfactory | खराब |
| Unfit | खेलने के लिए खतरनाक |
पहली दो कैटेगरी में किसी ग्राउंड को कोई सज़ा नहीं मिलती। असली परेशानी तीसरी और चौथी कैटेगरी में आती है।
क्या MCG की पिच “अनफिट” थी?
इसका जवाब लगभग साफ है—नहीं।
“अनफिट” वही पिच मानी जाती है जो खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने। जैसे असामान्य उछाल, बेकाबू बाउंस या जानलेवा मूवमेंट। MCG की पिच इतनी खतरनाक नहीं थी।
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि सब कुछ ठीक था।
सबसे संभावित रेटिंग: Unsatisfactory
मौजूदा हालात को देखते हुए, MCG की पिच को “Unsatisfactory” रेटिंग मिल सकती है।
इस रेटिंग में:
- ग्राउंड को 1 डिमेरिट पॉइंट मिलता है
- यह चेतावनी की तरह होती है
- ज्यादा बड़ा आर्थिक या आयोजनात्मक नुकसान नहीं होता
यानि नाम की साख बची रहती है, लेकिन रिकॉर्ड में एक निशान जुड़ जाता है।
दिलचस्प तुलना: पहले टेस्ट की मिसाल
इसी एशेज सीरीज के पहले टेस्ट में भी पहले दिन 19 विकेट गिरे थे। इसके बावजूद उस पिच को आईसीसी ने Very Good रेटिंग दी थी।
यही वो बिंदु है, जहां बहस तेज हो जाती है।
अगर 19 विकेट पर “वेरी गुड”, तो 20 विकेट पर “अनसेटिस्फेक्ट्री” क्यों?
दोहरे मापदंड की पुरानी कहानी
क्रिकेट फैंस को यही चुभता है।
एशिया में पिच तेज़ी से खराब घोषित हो जाती है,
ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड में वही हालात “रोमांचक टेस्ट” बन जाते हैं।
MCG का यह टेस्ट एक बार फिर इस सोच को सामने लाता है कि रेटिंग सिर्फ विकेटों की संख्या से नहीं, बल्कि भूगोल से भी प्रभावित होती है।
निष्कर्ष: नाम बड़ा है, सज़ा छोटी होगी
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की प्रतिष्ठा बहुत बड़ी है। बॉक्सिंग डे टेस्ट उसकी पहचान है। यही वजह है कि आईसीसी शायद यहां सख़्त कदम नहीं उठाएगी।
संभावना यही है कि:
- पिच को Unsatisfactory कहा जाए
- 1 डिमेरिट पॉइंट दिया जाए
- और मामला वहीं खत्म कर दिया जाए
लेकिन इस टेस्ट ने एक बार फिर यह सवाल ज़रूर छोड़ दिया है—
क्या पिच की क्वालिटी का पैमाना सबके लिए एक जैसा है?



















