World Cup – कटक में भारत ने जब दक्षिण अफ्रीका को 101 रनों की करारी शिकस्त दी, स्कोरबोर्ड के पीछे एक और कहानी quietly चल रही थी—टी20 वर्ल्ड कप 2026 की प्लानिंग। और इस प्लानिंग का पहला बड़ा संकेत था:
जितेश शर्मा को संजू सैमसन पर तरजीह देना।
पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे में जितेश की शामिली को कई लोगों ने “एक्सपेरिमेंट” कहा था, मगर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टी20 में प्लेइंग XI देखकर साफ हो गया—यह प्रयोग नहीं, बल्कि रोडमैप है।
टीम प्रबंधन अब शीर्ष क्रम की जगह middle-order finisher के स्पेशलाइज्ड रोल को ज्यादा महत्व दे रहा है। और यह रोल सैमसन नहीं, बल्कि जितेश की ताकत है।
जितेश vs संजू—कौन फिट बैठता है वर्ल्ड कप प्लान में?
संजू सैमसन की कहानी दुखद रूप से साफ है—
टॉप-3 में जगह नहीं, और टीम उन्हें फिनिशर की भूमिका में फिट नहीं मानती।
शुभमन गिल की वापसी के बाद सैमसन को टॉप ऑर्डर से हटना पड़ा, जिसके बाद उनकी batting-role fluid रही—और इस फ्लुइडिटी ने टीम में उनकी जगह को कमजोर कर दिया।
दूसरी तरफ़:
– जितेश 6–7 नंबर पर batting को अपनी “रोज़ी-रोटी” कहते हैं
– वह high-risk, low-ball-volume batting में विशेषज्ञ हैं
– टीम का template अब एक specialist finisher की मांग करता है
क्रिकेट विशेषज्ञ भी यही कह रहे हैं—
अगर संजू को टॉप ऑर्डर नहीं मिलता, तो वर्ल्ड कप में जितेश ही सही विकल्प होंगे।
दीप दासगुप्ता का साफ बयान—“सही फैसला है”
पूर्व भारतीय विकेटकीपर दीप दासगुप्ता की बात इस डिबेट को और स्पष्ट करती है:
“अगर आपका विकेटकीपर टॉप-3 में नहीं खेल रहा, तो आपको middle-order specialist रखना चाहिए।
2–4 गेंद खेलना हर किसी के बस की बात नहीं।
जितेश इस फॉर्मेट के स्पेशलिस्ट हैं।”
वर्ल्ड कप से पहले भारत कुल 9 टी20 मैच खेलेगा—यानी बदलाव की संभावना कम है और जितेश के पास अपनी सीट फिक्स करने का सुनहरा मौका है।
अर्शदीप vs कुलदीप—टीम बैलेंस का मुश्किल गणित
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए पहले टी20 ने एक और महत्वपूर्ण संकेत दिया—
टीम प्रबंधन 8वें नंबर तक बल्लेबाजी मजबूत रखना चाहता है।
इसका सीधा असर ये हुआ कि:
– अर्शदीप सिंह टीम में आए
– कुलदीप यादव को बाहर बैठना पड़ा
हालांकि यह फैसला सिर्फ पिच के कारण नहीं था।
अर्शदीप की दो सुपरपॉवर हैं:
- नई गेंद में शुरुआती विकेट
- डेथ ओवर में विश्वस्तरीय नियंत्रण
दासगुप्ता के शब्दों में:
“अर्शदीप को छोड़ना मुश्किल है—वह भारत के सबसे सफल टी20 गेंदबाज हैं। दुख की बात है कि इससे कुलदीप को बाहर बैठना पड़ रहा है।”
अर्शदीप—टी20 में भारत की अनिवार्य ताकत
यूएई में उन्हें स्पिन-अनुकूल पिचों के कारण बैठना पड़ा, ऑस्ट्रेलिया में भी कई मैचों में बाहर रहे—लेकिन कटक ने दिखाया कि टीम इंडिया के संतुलन में अर्शदीप एक प्रमुख स्तंभ हैं।
– बुमराह के साथ opening burst
– Hard length + angle variations
– डेथ-ओवर mastery
वर्ल्ड कप की अमेरिकी पिचों को देखते हुए, भारत के पास एक बाएं हाथ का swing + yorker specialist होना एक tactical luxury जैसा है।
टेबल: WC 2026 के लिए भारत के विकेटकीपर विकल्प
| खिलाड़ी | भूमिका | बल्लेबाजी क्रम | फिट? |
|---|---|---|---|
| संजू सैमसन | WK-बल्लेबाज | टॉप-3 | नहीं (वर्तमान प्लान में) |
| जितेश शर्मा | WK-फिनिशर | 6–7 | हाँ (टीम स्ट्रैटेजी फिट) |
| इशान किशन | बाहर | अनिश्चित | टीम विचार में नहीं |
स्पष्ट है—जितेश की वापसी सिर्फ फॉर्म नहीं, टीम-डायनेमिक्स की जरूरत है।
टीम की फिलॉसफी—“विशेषज्ञों का युग” लौट रहा है
भारतीय टीम इस समय एक Modern-T20 दृष्टिकोण अपनाए हुए है:
– टॉप-3: हाई-स्किल एंकर + पावर
– मिडल-ऑर्डर: मैक्सिमम इम्पैक्ट
– नंबर 6–7: Professional finishers
– Bowlers: 8वें नंबर तक रन बना सकने की क्षमता
इसी template में जितेश शर्मा और अर्शदीप सिंह दोनों फिट बैठते हैं—और कुलदीप व सैमसन जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी थोड़ा बाहर हो जाते हैं।















