Ishan Kishan – “आगे भी जाने ना तू, पीछे भी जाने ना तू…”—1965 की फिल्म वक्त का यह गीत समय की अनिश्चितता की बात करता है। लेकिन अगर आप कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ ईशान किशन की 77 रन की पारी देखें, तो लगेगा कि यह गाना जैसे उनके करियर की पटकथा हो। अतीत में विवाद, भविष्य अनिश्चित—और बीच में एक पल, जिसने कहानी बदल दी।
27 साल का यह विकेटकीपर बल्लेबाज उस दौर से लौटा है, जब चयन सूची में उसका नाम ढूंढना मुश्किल हो गया था।
चयन की सीढ़ी पर पांचवां नाम
भारतीय टीम में विकेटकीपर-बल्लेबाजों की लाइन छोटी नहीं थी। ऋषभ पंत वापसी कर चुके थे, ध्रुव जुरेल ने टेस्ट में प्रभावित किया, संजू सैमसन हमेशा चर्चा में रहे, और जितेश शर्मा अपनी भूमिका निभा रहे थे। ऐसे में ईशान किशन—कभी भविष्य का चेहरा कहे जाने वाले—अचानक पांचवें विकल्प बन गए।
ब्रेक लेने का उनका फैसला, जो मानसिक थकान के चलते लिया गया था, उन्हें भारी पड़ा। केंद्रीय अनुबंध से बाहर, घरेलू क्रिकेट में भागीदारी पर सवाल, और सोशल मीडिया पर आलोचना। क्रिकेट की दुनिया में नैरेटिव जल्दी बनता है—और उससे भी जल्दी फैलता है।
लोगों ने मान लिया कि वह गंभीर नहीं हैं
उनके करीबी मित्र और ‘ईशान किशन क्रिकेट अकादमी’ के सह-संस्थापक अंशुमत श्रीवास्तव कहते हैं, “अगले ही दिन लोगों ने मान लिया कि वह क्रिकेट को लेकर गंभीर नहीं हैं। तरह-तरह की बातें लिखी गईं। लेकिन किशन ने कभी प्रतिक्रिया नहीं दी। मुस्कुराते रहे, मेहनत करते रहे।”
यह बयान सिर्फ बचाव नहीं, एक प्रक्रिया का संकेत है।
अंशुमत के मुताबिक, “आज जो आप पाकिस्तान के खिलाफ देख रहे हैं, वह दो साल पहले शुरू हुई प्रक्रिया का परिणाम है। यह एक दिन की कहानी नहीं है।”
गिरावट से पुनर्निर्माण तक
किशन ने अपने जीवन की दिनचर्या बदल दी। ध्यान शुरू किया। पिता की सलाह पर भगवद गीता पढ़नी शुरू की—फोकस और संतुलन के लिए। दिन में दो बार अकादमी जाकर अभ्यास। निजी शेफ रखा। बाहर का खाना बंद। नींद की निगरानी। रिकवरी पर खास ध्यान।
यह सिर्फ नेट्स में समय बिताना नहीं था—यह एक पेशेवर रीसेट था।
| बदलाव | उद्देश्य |
|---|---|
| ध्यान (Meditation) | मानसिक एकाग्रता |
| निजी शेफ | नियंत्रित पोषण |
| दिन में दो बार अभ्यास | तकनीकी सुधार |
| नींद मॉनिटरिंग | बेहतर रिकवरी |
क्रिकेट में प्रतिभा जरूरी है, लेकिन निरंतरता अनुशासन मांगती है। और शायद यही वह हिस्सा था, जिसे उन्होंने फिर से गढ़ा।
पाकिस्तान के खिलाफ 77: सिर्फ रन नहीं, जवाब
कोलंबो में जब भारत ने पाकिस्तान को 61 रन से हराया, तो ईशान किशन की 40 गेंदों में 77 रन की पारी मैच का निर्णायक मोड़ बनी। 10 चौके, 3 छक्के—और वह आत्मविश्वास, जो लंबे समय बाद उनके खेल में साफ दिखा।
यह पारी सिर्फ पाकिस्तान के खिलाफ नहीं थी। यह आलोचकों के खिलाफ भी थी।
हल्के स्वभाव को गंभीरता की कमी समझ लिया गया
ईशान का स्वभाव मिलनसार है। टीम माहौल को हल्का रखना उन्हें पसंद है। लेकिन क्रिकेट की दुनिया में मुस्कुराता चेहरा अक्सर गलत समझ लिया जाता है।
अंशुमत कहते हैं, “वह मजाक करना पसंद करते हैं। हल्के-फुल्के स्वभाव को गंभीरता की कमी समझ लिया गया। लेकिन होटल लौटते ही पाकिस्तान मैच के बाद उन्होंने सबसे पहले रिकवरी पर ध्यान दिया—क्योंकि अगला मैच नीदरलैंड के खिलाफ है।”
यानी प्रोफेशनलिज्म शब्दों से नहीं, आदतों से दिखता है।
आलोचना की चोट
भारतीय क्रिकेट के प्रति प्रतिबद्धता पर उठे सवाल उन्हें अंदर तक चुभे। उन्होंने सार्वजनिक बयान नहीं दिए, लेकिन अपने काम से जवाब देने का रास्ता चुना।
आगे की राह
टी20 विश्व कप 2026 अभी लंबा है। सुपर-8, नॉकआउट, दबाव—सब बाकी है। चयन की प्रतिस्पर्धा भी खत्म नहीं हुई। पंत, जुरेल, सैमसन—सब मौजूद हैं।
लेकिन अब ईशान किशन फिर से चर्चा में हैं—सकारात्मक कारणों से।
शायद वह गाना सच ही कहता है—“जो भी है बस यही एक पल है।”
और फिलहाल, यह पल ईशान किशन का है।















