MCG – मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की पिच ने इस एशेज में जितनी चर्चा बटोरी, उतनी शायद किसी खिलाड़ी ने भी नहीं। चौथा एशेज टेस्ट दो दिन में खत्म, बल्लेबाज़ों की कतार ढह गई, और आखिरकार ICC ने MCG की पिच को ‘Unsatisfactory’ करार दे दिया। इंग्लैंड ने मैच जीत लिया, लेकिन जीत से ज़्यादा सवाल पिच और आधुनिक टेस्ट बल्लेबाज़ी पर उठे।
अब इसी बहस के बीच भारत के पूर्व क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा सामने आए हैं—और उन्होंने सीधा निशाना पिच पर नहीं, बल्कि आज की बल्लेबाज़ी सोच पर साधा है। उथप्पा का कहना है कि विकेट मुश्किल ज़रूर थी, लेकिन खेलने लायक थी। फर्क बस इतना है कि अब टेस्ट क्रिकेट में धैर्य गायब होता जा रहा है।
ICC की रेटिंग और MCG की किरकिरी
ICC ने मेलबर्न टेस्ट के बाद पिच को “असंतोषजनक” की कैटेगरी में डाल दिया। वजह साफ थी—
- असमान उछाल
- तेज़ गेंदबाज़ों को ज़रूरत से ज़्यादा मदद
- मैच का दो दिन में खत्म हो जाना
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि दोनों टीमों के बल्लेबाज़ संघर्ष करते दिखे। स्टीव स्मिथ और जो रूट जैसे दिग्गज भी इस विकेट पर सहज नहीं लग रहे थे।
उथप्पा का सवाल: क्या विकेट सच में खराब थी?
रॉबिन उथप्पा ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस पूरे विवाद को अलग नज़रिये से देखा। उनका मानना है कि समस्या सिर्फ पिच की नहीं, बल्कि बल्लेबाज़ों के अप्रोच की भी है।
उथप्पा ने कहा,
“ये स्थिति दो विपरीत पहलुओं वाली है। विकेट खेलने लायक नहीं थी—ऐसा कहना पूरी तरह सही नहीं है। मेलबर्न की पिचें पारंपरिक तौर पर तेज़ गेंदबाज़ों के लिए मददगार रहती हैं।”
यानी, यह विकेट कोई अनप्लेयेबल ट्रैक नहीं था। यह एक पुराने ज़माने का टेस्ट विकेट था—जहां आपको टिकना पड़ता है।
“पुजारा-रहाणे जैसा खेलिए”
उथप्पा की बात का सबसे दिलचस्प हिस्सा था उनका उदाहरण। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि अगर इस विकेट पर रन बनाने हैं, तो चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे वाला टेम्परामेंट चाहिए।
उनके शब्दों में,
“अगर आपके पास सही तकनीक है, सही मानसिकता है और जज़्बा है, तो आप रास्ता ढूंढ लेंगे। ये हाई-स्कोरिंग विकेट नहीं था, लेकिन 250 रन बनाए जा सकते थे। इसके लिए जुझारूपन दिखाना होगा। पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसा खेलिए—आप रन बनाएंगे।”
यह बयान सीधे आधुनिक टेस्ट क्रिकेट की फिलॉसफी पर सवाल उठाता है, जहां—
- आक्रामक शॉट्स
- जल्दी रन
- और रिज़ल्ट-ओरिएंटेड सोच
धैर्य को पीछे छोड़ देती है।
आज की टेस्ट बल्लेबाज़ी बनाम पुरानी सोच
उथप्पा ने साफ कहा कि उन्हें आज का टेस्ट क्रिकेट खेलने का तरीका पसंद नहीं है।
उन्होंने कहा,
“आज टेस्ट क्रिकेट खेलने का तरीका बदल गया है। एशेज टेस्ट दो दिन में खत्म हो रहे हैं। एंटरटेनमेंट के लिए हम खेल के साथ क्या कर रहे हैं?”
यह सवाल सिर्फ इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक टेस्ट क्रिकेट की बहस है—क्या हम पांच दिन के खेल को टी20 माइंडसेट से देख रहे हैं?
जो रूट का संघर्ष: एक संकेत?
उथप्पा ने जो रूट का उदाहरण देते हुए इस मुद्दे को और गहरा किया। उन्होंने ब्रिसबेन में खेले गए दूसरे टेस्ट का जिक्र किया, जहां रूट असहज दिखे।
“जो रूट जैसे बल्लेबाज़ टेस्ट मैच में खो जा रहे हैं। वह समझ नहीं पा रहे कि आक्रामक क्रिकेट खेलनी है या अपने नेचुरल गेम पर टिके रहना है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
जब आधुनिक युग का सबसे तकनीकी रूप से साउंड बल्लेबाज़ भी कन्फ्यूज़ दिखे, तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी की समस्या नहीं लगती—यह सिस्टम की समस्या है।
मेलबर्न टेस्ट: स्कोरकार्ड क्या कहता है?
अगर भावनाओं से हटकर आंकड़ों की बात करें, तो मैच का हाल खुद बहुत कुछ कह देता है।
| पारी | टीम | स्कोर |
|---|---|---|
| पहली पारी | ऑस्ट्रेलिया | 152 |
| पहली पारी | इंग्लैंड | 110 |
| दूसरी पारी | ऑस्ट्रेलिया | 132 |
| दूसरी पारी | इंग्लैंड | 178/6 |
इंग्लैंड ने यह टेस्ट 4 विकेट से जीता, लेकिन कोई भी पारी ऐसी नहीं थी जिसे बल्लेबाज़ी का मास्टरक्लास कहा जा सके।
दोनों टीमों के लिए यह विकेट—
- स्किल की परीक्षा
- धैर्य की परीक्षा
- और माइंडसेट की परीक्षा
तीनों था।
क्या ICC सही है, या बहस अधूरी?
ICC का काम है विकेट की क्वालिटी देखना—और दो दिन में खत्म हुआ टेस्ट, स्वाभाविक तौर पर रेड फ्लैग उठाता है। लेकिन उथप्पा की बात यहां एक अहम काउंटर-पॉइंट रखती है—
- क्या हर मुश्किल विकेट खराब होता है?
- या हमने बल्लेबाज़ों को बहुत आरामदेह परिस्थितियों का आदी बना दिया है?
ऑस्ट्रेलिया की पारंपरिक पिचें हमेशा से तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करती रही हैं। MCG भी उससे अलग नहीं रहा। फर्क सिर्फ इतना है कि अब बल्लेबाज़ लंबी लड़ाई के लिए तैयार नहीं दिखते।
टेस्ट क्रिकेट किस दिशा में जा रहा है?
यह बहस अब सिर्फ एक पिच तक सीमित नहीं है।
- डेढ़-दो दिन में खत्म होते टेस्ट
- आक्रामक अप्रोच
- रिज़ल्ट फर्स्ट क्रिकेट
यह सब टेस्ट क्रिकेट की पहचान बदल रहा है।
ICC और बोर्ड्स के सामने भी दुविधा है—
एंटरटेनमेंट बढ़ाएं या टेस्ट की आत्मा बचाएं?
विकेट नहीं, आईना था MCG
मेलबर्न की पिच खराब थी या नहीं—इस पर राय बंटी रह सकती है। लेकिन एक बात साफ है—
यह विकेट आधुनिक टेस्ट क्रिकेट के लिए एक आईना था।
जहां—
- धैर्य कम दिखा
- टेम्परामेंट हिला
- और तकनीक दबाव में आई
रॉबिन उथप्पा का संदेश सीधा है—
अगर टेस्ट क्रिकेट को जिंदा रखना है, तो पुजारा-रहाणे वाला माइंडसेट वापस लाना होगा।
क्योंकि हर विकेट फ्लैट नहीं होगा।
और हर टेस्ट दो दिन का शो नहीं होना चाहिए।



















