Pant – मुंबई की एक चमकदार शाम, कैमरों की फ्लैश लाइट और पिकलबॉल की चर्चा के बीच जब ऋषभ पंत माइक के सामने आए, तो सवाल सिर्फ एक था—वापसी कब? जवाब में न कोई तारीख थी, न जल्दबाज़ी।
बस एक भरोसा था। “दिन-प्रतिदिन बेहतर हो रहा हूं।” भारतीय क्रिकेट के सबसे जुझारू चेहरों में से एक की यह पंक्ति छोटी थी, लेकिन इसके पीछे बीते महीनों की मेहनत, दर्द और सब्र साफ झलक रहा था।
पंत बुधवार को वर्ल्ड पिकलबॉल लीग के एक कार्यक्रम में मौजूद थे, जहां वे मुंबई पिकल पावर टीम के सह-मालिक के तौर पर पहुंचे। मगर मंच खेल बदलने का नहीं, बल्कि वापसी की कहानी सुनाने का बन गया।
बेंगलुरु से वापसी की तैयारी
ऋषभ पंत इस वक्त बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैबिलिटेशन के दौर से गुजर रहे हैं। यही वह जगह है जहां भारतीय क्रिकेट के कई करियर दोबारा गढ़े गए हैं।
पंत ने साफ कहा,
“मैं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कड़ी मेहनत कर रहा हूं और मुझे लगता है कि मैं जल्द ही मैदान पर वापसी करूंगा।”
चोट से जूझना, लेकिन खेल से जुड़े रहना
28 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज 10 जनवरी से भारतीय टीम से बाहर हैं। वडोदरा में एक अभ्यास सत्र के दौरान उन्हें साइड स्ट्रेन हुआ था—एक ऐसी चोट जो दिखती मामूली है, लेकिन टी20 और टेस्ट जैसे फॉर्मेट में विकेटकीपर के लिए बेहद जटिल हो सकती है।
पंत के लिए यह सिर्फ शारीरिक लड़ाई नहीं थी।
उन्होंने कहा,
“जब मैं चोटिल होता हूं, तो एक चीज जो मुझे खेल के करीब रखती है, वह है खेल के प्रति प्यार और आसपास के लोगों का समर्थन।”
यह वही मानसिक मजबूती है जिसने उन्हें पहले भी कई बार वापसी करने में मदद की है—चाहे वह तकनीकी आलोचना हो या फिटनेस से जुड़े सवाल।
एक क्रिकेटर के तौर पर खुद को फिर से गढ़ना
ऋषभ पंत ने साफ कर दिया कि वापसी का मतलब सिर्फ मैदान पर लौटना नहीं है, बल्कि खुद को बेहतर बनाकर लौटना है।
उनके शब्दों में,
“एक क्रिकेटर के तौर पर, आपको हमेशा अपने खेल में कुछ न कुछ जोड़ते रहना होता है। मुझे अपने खेल के हर पहलू में बेहतर होने की कोशिश करते रहना होगा।”
बीते कुछ वर्षों में पंत ने खुद को सिर्फ एक आक्रामक बल्लेबाज से कहीं आगे साबित किया है—चाहे ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट जीत हो या इंग्लैंड में मुश्किल हालात में शतक। यही वजह है कि टीम मैनेजमेंट उनकी वापसी को लेकर जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता।
मैदान से दूर रहना: सबसे मुश्किल हिस्सा
पंत ने स्वीकार किया कि चोट के दौरान सबसे ज्यादा जिस चीज की कमी खलती है, वह है शीर्ष स्तर की प्रतिस्पर्धा।
उन्होंने कहा,
“आप खेल से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन आप शीर्ष स्तर पर खेलते हुए इसका आनंद लेते हैं। मुझे उसकी कमी खलती है।”
यह बयान सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि उस प्रतिस्पर्धी मानसिकता का है जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलग बनाती है। ट्रेनिंग, नेट्स और जिम—सब अपनी जगह हैं, लेकिन लाइव मैच का रोमांच किसी और चीज से नहीं मिलता।
हर वापसी ने सिखाया कुछ नया
ऋषभ पंत के करियर में “वापसी” कोई नया शब्द नहीं है। हर ब्रेक ने उन्हें खेल ही नहीं, जीवन को देखने का नजरिया भी दिया है।
उनका कहना था,
“हर वापसी ने मुझे जीवन के बारे में कुछ सिखाया है। इसने मुझे और अधिक कृतज्ञता सिखाई है।”
यही सोच उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग करती है। जहां कई खिलाड़ी चोट के बाद सिर्फ फिट होने पर ध्यान देते हैं, वहीं पंत मानसिक मजबूती और संतुलन की बात करते हैं।
चयनकर्ताओं की नजर और टीम इंडिया की जरूरत
बीसीसीआई और चयनकर्ताओं की ओर से फिलहाल पंत की वापसी को लेकर कोई आधिकारिक समयसीमा नहीं दी गई है। भारतीय टीम के लिए आने वाले महीनों में टेस्ट और सीमित ओवरों के अहम मुकाबले हैं, और विकेटकीपर स्लॉट पर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
पंत की मौजूदा स्थिति: एक नजर
| पहलू | स्थिति |
|---|---|
| उम्र | 28 वर्ष |
| चोट | साइड स्ट्रेन |
| बाहर रहने की तारीख | 10 जनवरी से |
| रिहैब | बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बेंगलुरु |
| वापसी | चरणबद्ध, मेडिकल क्लीयरेंस के बाद |
बड़ी तस्वीर
ऋषभ पंत की कहानी सिर्फ फिटनेस अपडेट नहीं है। यह आधुनिक क्रिकेट की उस सच्चाई को दिखाती है, जहां करियर सिर्फ रन और कैच से नहीं, बल्कि धैर्य, मानसिक मजबूती और सही समय पर सही फैसला लेने से बनता है।
पिकलबॉल जैसे नए खेलों में निवेश करना दिखाता है कि पंत मैदान के बाहर भी आगे की सोच रहे हैं, लेकिन उनका दिल अब भी उसी 22-यार्ड पिच पर अटका है।















