ODI – भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ सालों से अगर किसी खिलाड़ी को “big-match chaos creator” कहा जाता रहा है, तो वह ऋषभ पंत हैं। ऑस्ट्रेलिया हो, इंग्लैंड हो या फिर दबाव में फंसी भारतीय टीम — पंत अक्सर वहां खड़े दिखे जहां बाकी बल्लेबाज़ टूट जाते थे।
लेकिन अब Team India के अंदर उनकी स्थिति बदलती हुई दिख रही है। मंगलवार को घोषित भारतीय टीम ने शायद पहली बार साफ संकेत दिया कि selectors अब reputation से ज्यादा format-specific planning पर भरोसा कर रहे हैं।
अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट और वनडे सीरीज के लिए घोषित squads में ऋषभ पंत को बड़ा झटका लगा। टेस्ट टीम में जगह तो मिली, लेकिन उपकप्तानी उनसे लेकर केएल राहुल को सौंप दी गई। वहीं ODI squad में उनका नाम तक नहीं था।
और सच कहें तो यह सिर्फ एक selection update नहीं है। यह Team India के अगले दो साल के रोडमैप की झलक भी माना जा रहा है।
टेस्ट टीम में बने रहे, लेकिन leadership role खत्म
BCCI की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस फैसले पर हुई, वह था टेस्ट उपकप्तानी में बदलाव।
Test Leadership बदलाव
| पहले | अब |
|---|---|
| उपकप्तान – ऋषभ पंत | उपकप्तान – केएल राहुल |
भारतीय टीम management के करीबी सूत्रों के मुताबिक यह फैसला सिर्फ “administrative change” नहीं माना जा रहा। टीम अब ऐसे खिलाड़ियों को leadership group में प्राथमिकता देना चाहती है जो तीनों formats में stability ला सकें।
ODI टीम से बाहर होना सबसे बड़ा संकेत
अगर उपकप्तानी जाना symbolic था, तो ODI squad से बाहर होना practical झटका माना जा रहा है।
Selectors ने विकेटकीपर विकल्प के तौर पर:
| भूमिका | खिलाड़ी |
|---|---|
| First-choice keeper | केएल राहुल |
| Backup option | ईशान किशन |
पर भरोसा दिखाया।
यानी फिलहाल white-ball cricket में पंत hierarchy में नीचे खिसकते दिख रहे हैं। और यह बात अचानक नहीं हुई।
पिछले डेढ़ साल में Team India लगातार ODI setup को stabilize करने की कोशिश कर रही है। खासकर 2027 ODI World Cup को ध्यान में रखते हुए management अब role clarity पर ज्यादा फोकस कर रहा है।
सिलेक्टर्स आखिर क्या सोच रहे हैं?
अजीत अगरकर की अगुवाई वाली selection committee reportedly यह मानती है कि पंत की सबसे बड़ी value अभी भी टेस्ट क्रिकेट में है।
एक selector ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“ऋषभ पंत world-class टेस्ट खिलाड़ी हैं। हम चाहते हैं कि वह उसी format में अपना best दें। वनडे में फिलहाल हमने अलग combination चुना है।”
इस बयान को क्रिकेट circles में “soft demotion” की तरह देखा जा रहा है।
क्योंकि selectors अब ODI cricket में तीन चीजें लगातार दोहरा रहे हैं:
- consistency
- fitness availability
- defined batting role
और यहीं पंत पिछड़ते नजर आए।
ODI आंकड़े इतने खराब भी नहीं हैं
दिलचस्प बात यह है कि numbers पूरी तरह selectors के फैसले को justify नहीं करते।
Rishabh Pant ODI Career
| मैच | रन | औसत |
|---|---|---|
| 31 | 871 | 33.50 |
कई खिलाड़ियों के मुकाबले यह रिकॉर्ड खराब नहीं कहा जाएगा। लेकिन समस्या सिर्फ रन नहीं रही।
Experts मानते हैं कि पंत की ODI innings अक्सर “high-risk mode” में चली जाती हैं। कभी मैच जिताने वाली brilliance दिखती है, तो कभी unnecessary dismissal।
इसके उलट टेस्ट क्रिकेट में उनकी batting का impact अलग ही स्तर पर दिखाई देता है।
Test Career Stats
| मैच | रन | औसत |
|---|---|---|
| 49 | 3476 | 42.91 |
इसी वजह से टीम management शायद उन्हें “red-ball asset” की तरह सुरक्षित रखना चाहता है।
T20I setup से पहले ही बाहर
असल तस्वीर तो तब साफ होने लगी थी जब अगस्त 2024 के बाद से पंत T20I setup से लगभग गायब हो गए।
इस दौरान:
| खिलाड़ी | फायदा |
|---|---|
| ईशान किशन | Aggressive starts |
| संजू सैमसन | Stable middle-order batting |
ने लगातार मौके भुनाए।
और भारतीय क्रिकेट में competition ऐसा है कि एक बार rhythm टूट जाए तो वापसी आसान नहीं होती। Especially wicketkeeper-batter slot में तो बिल्कुल नहीं।
IPL 2026 भी turning point नहीं बन पाया
बहुत लोगों को उम्मीद थी कि IPL 2026 पंत के comeback narrative को बदल देगा। लेकिन season average ही रहा।
IPL 2026 Performance
| मैच | रन | औसत | फिफ्टी |
|---|---|---|---|
| 12 | 251 | 27.88 | 1 |
लखनऊ सुपर जायंट्स playoff तक नहीं पहुंची। कप्तानी के दौरान कई फैसलों और उनकी batting approach पर भी सवाल उठे।
कुछ मैचों में वह पुराने पंत जैसे दिखे — fearless, attacking, unpredictable। लेकिन consistency फिर भी missing रही।
और selectors अब शायद flashes नहीं, sustained performances देखना चाहते हैं।
Injury history भी बड़ा factor
यह बात अक्सर fans नजरअंदाज कर देते हैं कि पिछले कुछ साल पंत के लिए physically बेहद मुश्किल रहे हैं।
विशेषकर:
- accident recovery
- repeated rehab phases
- workload management concerns
ने उनके career momentum को प्रभावित किया।
Team India management reportedly अब ऐसे core white-ball players चाहता है जो लगातार available रहें। क्योंकि 2027 World Cup cycle में experimentation का समय सीमित माना जा रहा है।
केएल राहुल की बढ़ती अहमियत
दिलचस्प बात यह है कि राहुल सिर्फ wicketkeeper option नहीं रह गए हैं।
अब वह:
| पहलू | असर |
|---|---|
| Calm batting | Middle-order balance |
| Safe keeping | Bowling flexibility |
| Experience | Leadership support |
जैसे factors की वजह से टीम management के भरोसेमंद खिलाड़ी बन चुके हैं।
इसीलिए उन्हें टेस्ट उपकप्तानी सौंपना कई experts के लिए surprising नहीं था।
क्या 2027 World Cup का सपना खतरे में?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऋषभ पंत का ODI career खत्म हो गया है। लेकिन competition अब brutal हो चुका है।
भारत की ODI wicketkeeper race
| खिलाड़ी |
|---|
| केएल राहुल |
| ईशान किशन |
| संजू सैमसन |
| ऋषभ पंत |
और यहां सिर्फ talent काफी नहीं होगा।
अब domestic cricket, IPL और limited international chances — हर जगह impact दिखाना पड़ेगा।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
Squad announcement के बाद इंटरनेट पर reactions काफी divided रहे।
कुछ fans ने लिखा:
- “Pant deserves longer rope.”
- “Selectors are finally rewarding consistency.”
- “Rahul is safer in ODIs.”
- “Pant should dominate Tests now.”
पूर्व क्रिकेटरों की राय भी लगभग यही रही कि पंत का सबसे बड़ा match-winning value अभी भी टेस्ट क्रिकेट में ही नजर आता है।
क्या यह career का reset button है?
क्रिकेट में कई बड़े careers ऐसे phases से गुजरे हैं जहां खिलाड़ी को formats चुनने पड़े। शायद पंत अब उसी मोड़ पर खड़े हैं।
उनके सामने फिलहाल दो रास्ते
| विकल्प | चुनौती |
|---|---|
| White-ball comeback | Intense competition |
| Test dominance | Legacy building |
और सच कहें तो टेस्ट क्रिकेट में पंत अब भी दुनिया के सबसे dangerous wicketkeeper-batters में गिने जाते हैं।
Gabba हो या Oval — उनकी innings आज भी opposition teams को याद हैं।















