Arshdeep – भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह की नजरें अब टेस्ट क्रिकेट में जगह बनाने पर हैं। वह भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में खेलना चाहते हैं।
अर्शदीप ने सीमित ओवरों में अपनी जगह मजबूत कर ली है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका डेब्यू अभी बाकी है। दलीप ट्रॉफी 2026 के क्वार्टर फाइनल में उन्होंने लाल गेंद से शानदार वापसी करते हुए चार विकेट चटकाए और नॉर्थ जोन की वेस्ट जोन पर 52 रन की जीत में अहम योगदान दिया।
यह मुकाबला बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खेला गया था। लंबे समय बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उतरे अर्शदीप के लिए यह मुकाबला सिर्फ जीत हासिल करने का मौका नहीं था, बल्कि खुद को चार दिवसीय क्रिकेट के लिए परखने का भी अवसर था।
टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू का इंतजार
अर्शदीप अब तक भारत के लिए 18 वनडे और 91 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके हैं। हालांकि, टेस्ट टीम में जगह बनाने का उनका इंतजार जारी है।
व्यस्त सीमित ओवरों के कार्यक्रम की वजह से उन्हें अपने 22वें और 23वें प्रथम श्रेणी मैच के बीच लगभग एक साल का इंतजार करना पड़ा। ऐसे में दलीप ट्रॉफी में लाल गेंद से गेंदबाजी करना उनके लिए काफी महत्वपूर्ण था।
मैच के बाद अर्शदीप ने कहा कि उन्हें लाल गेंद से खेलने के बहुत कम मौके मिलते हैं और वह यह देखना चाहते थे कि वह कितने ओवर गेंदबाजी कर सकते हैं। लंबे अंतराल के बाद लाल गेंद से खेलने के बावजूद उन्हें अपनी लय अच्छी लगी।
‘शरीर में दर्द है, लेकिन यह अच्छा दर्द है’
अर्शदीप ने कहा कि उन्होंने दलीप ट्रॉफी से पहले लाल गेंद के साथ अभ्यास में काफी समय बिताया था।
उन्होंने कहा कि शरीर में दर्द जरूर है, लेकिन टीम के मैच जीतने के बाद यह दर्द अच्छा लग रहा है। उनके लिए यह मुकाबला अपनी फिटनेस और लाल गेंद वाली स्किल को परखने का अहम मौका था।
चार दिवसीय क्रिकेट में गेंदबाजों को लंबे स्पेल डालने पड़ते हैं और लगातार कई दिनों तक अपनी फिटनेस बनाए रखनी होती है। अर्शदीप के लिए यही चुनौती सबसे महत्वपूर्ण थी।
रेड बॉल क्रिकेट की सबसे बड़ी खूबसूरती क्या है?
अर्शदीप का मानना है कि टेस्ट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें गेंदबाज को दोबारा मौका मिलता है।
उन्होंने बताया कि मुख्य कोच अजय शर्मा ने उन्हें समझाया था कि अगर नई गेंद से विकेट नहीं मिलता तो दूसरे स्पेल में वापसी का मौका रहेगा।
यही सोच अर्शदीप को लाल गेंद वाले क्रिकेट में पसंद आती है। सफेद गेंद के क्रिकेट में एक गलती के बाद वापसी का समय सीमित होता है, जबकि रेड बॉल क्रिकेट में गेंदबाज लगातार दबाव बनाकर विकेट हासिल कर सकता है।
सीजन के हिसाब से बदलती है अर्शदीप की ट्रेनिंग
अर्शदीप ने बताया कि वह लाल या सफेद गेंद से अभ्यास करने का फैसला आने वाले क्रिकेट कार्यक्रम को देखकर करते हैं।
जब उन्हें पता था कि दलीप ट्रॉफी आने वाली है तो उन्होंने लाल गेंद से अभ्यास शुरू कर दिया था। वहीं सीमित ओवरों का सीजन आने पर उनकी ट्रेनिंग सफेद गेंद के हिसाब से बदल जाती है।
यह उनके लिए इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दोनों प्रारूपों में गेंदबाजी की रणनीति, लाइन-लेंथ और फिटनेस की जरूरत अलग होती है।
2023 में खेल चुके हैं काउंटी क्रिकेट
अर्शदीप सिंह ने 2023 में इंग्लैंड के केंट के लिए काउंटी चैंपियनशिप के पांच मुकाबले खेले थे।
उन्होंने माना कि इंग्लैंड जाकर काउंटी क्रिकेट खेलना तेज गेंदबाज के लिए शानदार अनुभव है, लेकिन मौजूदा घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम के कारण वहां जाना आसान नहीं है।
आईपीएल, घरेलू सीमित ओवर क्रिकेट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के बीच खिलाड़ियों के पास विदेश जाकर काउंटी खेलने के लिए ज्यादा समय नहीं बचता।
अर्शदीप ने यह भी कहा कि भारतीय घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देना जरूरी है और उसका स्तर बनाए रखना भी खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है।
मुशीर खान को शानदार गेंद पर किया आउट
वेस्ट जोन के खिलाफ मुकाबले में अर्शदीप को ऐसी पिच मिली, जहां तेज गेंदबाजों की तुलना में स्पिनरों को ज्यादा मदद मिल रही थी।
इसके बावजूद उन्होंने अपनी रणनीति बदली और मुशीर खान का महत्वपूर्ण विकेट हासिल किया।
मुशीर 125 गेंदों पर 31 रन बनाकर क्रीज पर टिके हुए थे। अर्शदीप ने राउंड द विकेट गेंदबाजी करते हुए उनके लिए ऑफ साइड में करीबी फील्ड लगाई। वाइड स्लिप, गली, शॉर्ट मिडऑफ, शॉर्ट कवर और कवर पर फील्डर तैनात थे।
इसके बाद अर्शदीप ने अतिरिक्त उछाल वाली गेंद फेंकी और मुशीर कैच देकर पवेलियन लौट गए।
‘तेज गेंदबाजों के लिए पिच में कुछ नहीं था’
अर्शदीप ने बताया कि उस पिच पर तेज गेंदबाजों के लिए बहुत कम मदद थी और स्पिनरों का दबदबा था।
ऐसे में उन्होंने मुशीर के खिलाफ लाइन और लेंथ में निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ फील्डिंग के जरिए दबाव बनाने की रणनीति अपनाई।
उनके मुताबिक मुशीर काफी रक्षात्मक बल्लेबाजी कर रहे थे। इसलिए करीबी फील्डरों को बल्लेबाज की नजरों के सामने रखा गया और लगातार एक ही लाइन-लेंथ पर गेंदबाजी की गई। आखिरकार मुशीर ने एक गेंद पर गलती की और अर्शदीप को विकेट मिल गया।
अर्शदीप की नजरें अब टेस्ट क्रिकेट पर
दलीप ट्रॉफी में चार विकेट लेकर अर्शदीप ने एक बार फिर दिखाया कि वह लाल गेंद से भी प्रभावी हो सकते हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इस प्रदर्शन को लगातार जारी रखना होगी।
बीसीसीआई की ओर से उन्हें यही संदेश मिला है कि जब भी लाल गेंद से खेलने का मौका मिले, वहां प्रदर्शन करें। अर्शदीप भी जानते हैं कि टेस्ट टीम में जगह हासिल करने के लिए घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है।













