Vidarbha : भरोसे की जीत – विदर्भ ने विजय हजारे ट्रॉफी कैसे जीती

Atul Kumar
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Vidarbha

Vidarbha – विदर्भ की जर्सी पर इस सीजन एक अलग ही आत्मविश्वास दिखा। चेहरों पर घबराहट नहीं, ड्रेसिंग रूम में शोर नहीं और मैदान पर हड़बड़ी बिल्कुल नहीं। विजय हजारे ट्रॉफी का फाइनल जीतने के बाद यह साफ था कि यह टीम सिर्फ टैलेंट के भरोसे नहीं, बल्कि भरोसे की संस्कृति के दम पर चैंपियन बनी है।

रविवार को सौराष्ट्र को 38 रनों से हराकर विदर्भ ने घरेलू एकदिवसीय क्रिकेट का खिताब अपने नाम किया। रणजी ट्रॉफी के मौजूदा चैंपियन अब सफेद गेंद के फॉर्मेट में भी ट्रॉफी उठाकर यह साबित कर चुके हैं कि वे सिर्फ एक फॉर्मेट की टीम नहीं हैं।

उस्मान गनी की सोच: भरोसा ही सबसे बड़ा हथियार

मैच के बाद विदर्भ के हेड कोच उस्मान गनी ने जीत के पीछे की सबसे बड़ी वजह बेहद सादगी से रखी।

पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा,
“हम एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं। सीमित ओवरों की क्रिकेट के लिए भी हमारे पास मजबूत टीम थी, लेकिन हम पहले कभी यह ट्रॉफी नहीं जीत पाए थे।”

यह बयान सिर्फ एक कोच का रिएक्शन नहीं था, बल्कि विदर्भ के लंबे सफर की झलक भी था।

पिछली नाकामियां, लेकिन टूटा नहीं आत्मविश्वास

गनी ने खुलकर स्वीकार किया कि सफेद गेंद के फॉर्मेट में विदर्भ का पिछला रिकॉर्ड आदर्श नहीं रहा।

  • सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी
  • कुछ बेहद करीबी मुकाबलों में हार
  • सुपर लीग तक भी नहीं पहुंच पाना

लेकिन इस बार हालात अलग थे।

“इस बार हम आत्मविश्वास से भरे थे। हमने एक-दूसरे का साथ दिया और सकारात्मक क्रिकेट खेला,” गनी ने कहा।

यानी इस जीत की नींव सीखने और आगे बढ़ने पर रखी गई थी, न कि पिछली असफलताओं के डर पर।

मुश्किल हालात में भी टीम के साथ खड़े रहना

उस्मान गनी की कोचिंग का सबसे अहम पहलू यही रहा—खिलाड़ियों का साथ।

उन्होंने साफ कहा,
“परिस्थिति चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, हमें हर खिलाड़ी का समर्थन करना होगा। अगर कोई मैच खराब जाता है, तो हमें वापसी पर भरोसा रखना चाहिए।”

यह सोच सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रही।
सेमीफाइनल और फाइनल में विदर्भ की टीम ने दबाव में भी संयम नहीं खोया।

सकारात्मक मानसिकता बनी पहचान

गनी का मानना है कि यह सब अब टीम की आदत बन चुकी है।

“यह अब हमारी मानसिकता बन गई है। अगर आप सेमीफाइनल और फाइनल देखें, तो हमें ज्यादा मुश्किल हालात का सामना नहीं करना पड़ा। यह सकारात्मक सोच का नतीजा है।”

घरेलू क्रिकेट में जहां कई टीमें एक खराब मैच के बाद बिखर जाती हैं, वहीं विदर्भ ने मैच दर मैच स्थिरता दिखाई।

रेड और व्हाइट बॉल के बीच सही संतुलन

भारतीय घरेलू क्रिकेट में अक्सर टीमें या तो रेड बॉल में मजबूत होती हैं या व्हाइट बॉल में।
विदर्भ ने दोनों के बीच संतुलन बना लिया है।

गनी ने इसका श्रेय दिया—

  • मजबूत बेंच स्ट्रेंथ
  • हर पोजिशन के लिए विकल्प
  • हेल्दी कॉम्पिटिशन

उन्होंने कहा,
“हमारे पास कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं।”

फाइनल में भी कमी नहीं बनी कमजोरी

फाइनल जैसे बड़े मैच में भी विदर्भ पूरी ताकत के साथ नहीं उतरा था।

  • ध्रुव शौरी फाइनल नहीं खेल सके
  • दानिश मालेवार लीग स्टेज में चोटिल होकर बाहर हो गए

लेकिन इसका असर टीम पर नहीं पड़ा।

“हमारी बेंच स्ट्रेंथ मजबूत है। टीम में जगह के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है,” गनी ने कहा।

यही बात चैंपियन टीमों को बाकी टीमों से अलग करती है।

अब फोकस फिर रणजी ट्रॉफी पर

सफेद गेंद की ट्रॉफी जीतने के बाद विदर्भ को ज्यादा वक्त जश्न का नहीं मिलेगा।
22 जनवरी से टीम रणजी ट्रॉफी में अपना अभियान फिर शुरू करेगी।

  • मुकाबला: आंध्र प्रदेश के खिलाफ
  • स्थान: अनंतपुर
  • ग्रुप ए में स्थिति: 5 मैचों में 25 अंक, टॉप पर

गनी ने माना कि व्हाइट बॉल से रेड बॉल में शिफ्ट करना आसान नहीं होता।

“यह चुनौती है, लेकिन सभी टीमों के लिए है। हमें पता है कि इससे कैसे निपटना है।”

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Atul Kumar

Atul Kumar

क्रिकेट को देखता हूं और समझता हूं और आप लोगों तक नए-नए सूचनाएं पहुंचाने की कोशिश करता हूं। लाइफ में हमेशा नई-नई चीजों को सीखने का शौक रखता हु, पुराने न्यूज़ को नए तरीके से प्रस्तुत करता हूं।

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