IPL 2026 – 15 साल की उम्र में जब ज्यादातर बच्चे स्कूल, दोस्तों और मोबाइल गेम्स में व्यस्त रहते हैं, तब वैभव सूर्यवंशी की दुनिया क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमती है।
मैदान से बाहर भी उनका दिमाग बल्लेबाजी, अभ्यास और अपने खेल को बेहतर बनाने में लगा रहता है। शायद यही वजह है कि बिहार के समस्तीपुर से निकलकर यह युवा बल्लेबाज आज भारतीय क्रिकेट का सबसे चर्चित नाम बन चुका है।
दिलचस्प बात यह है कि वैभव को अभ्यास से इतना लगाव है कि अगर वह एक दिन भी नेट्स पर नहीं जाते, तो उन्हें लगता है कि उनकी जिंदगी की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
आईपीएल 2026 में रिकॉर्ड 65 छक्के और 680 रन बनाकर सुर्खियां बटोरने वाले वैभव सूर्यवंशी ने जियोस्टार से बातचीत में अपने क्रिकेट सफर, पिता के योगदान और निजी जिंदगी के कुछ दिलचस्प पहलुओं का खुलासा किया।
“एक दिन अभ्यास नहीं करूं तो जिंदगी धीमी लगती है”
वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत सबसे बड़ी वजह मानी जाती है। खुद वैभव का कहना है कि उन्हें लंबे ब्रेक लेना बिल्कुल पसंद नहीं है।
उन्होंने कहा,
“बचपन से ही मेरे पिताजी ने मुझसे इतना ज्यादा अभ्यास करवाया है कि अगर मैं एक दिन भी प्रैक्टिस नहीं करूं, तो लगता है कि जिंदगी थोड़ी धीमी पड़ गई है। इसलिए मुझे ज्यादा छुट्टी की जरूरत नहीं पड़ती।”
यही जुनून उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
पिता ने निभाई सबसे बड़ी भूमिका
समस्तीपुर जैसे छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।
वैभव ने बताया कि उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने उनके क्रिकेट करियर के लिए काफी त्याग किए।
पिता का योगदान
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| गृह जिला | समस्तीपुर, बिहार |
| ट्रेनिंग स्थल | पटना |
| यात्रा | हफ्ते में 5 दिन |
| मुख्य सहयोग | पिता संजीव सूर्यवंशी |
कई वर्षों तक उनके पिता उन्हें समस्तीपुर से पटना ट्रेनिंग के लिए लेकर जाते रहे ताकि उनके क्रिकेट विकास में कोई कमी न रहे।
IPL के लिए छोड़ दी थी बोर्ड परीक्षा
वैभव का क्रिकेट के प्रति समर्पण इस बात से भी समझा जा सकता है कि उन्होंने आईपीएल की तैयारी के लिए अपनी 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा तक छोड़ दी थी।
उन्होंने बताया,
“आईपीएल नजदीक था और मैं अंडर-19 वनडे क्रिकेट खेलकर लौटा था। फॉर्मेट बदल रहा था, इसलिए मुझे अपने खेल के कुछ पहलुओं पर काम करना जरूरी लगा।”
यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन वैभव ने क्रिकेट को प्राथमिकता दी।
मैदान के बाहर अब भी हैं एक आम बच्चे
क्रिकेट मैदान पर भले ही वैभव दुनिया के सबसे बड़े गेंदबाजों पर हावी नजर आते हों, लेकिन मैदान के बाहर उनके अंदर का बच्चा आज भी जिंदा है।
हाल ही में महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी कहा था कि वह चाहते हैं कि वैभव का बचपन वाला भोलेपन हमेशा बना रहे।
जब उनसे पूछा गया कि वह खाली समय में क्या करते हैं, तो उनका जवाब काफी दिलचस्प था।
आज भी देखते हैं कार्टून
वैभव ने बताया कि कार्टून देखना उनका सबसे पसंदीदा मनोरंजन है।
उन्होंने कहा,
“दो-तीन साल पहले जब मैं घर पर होता था और अभ्यास के बाद समय मिलता था, तो मैं कार्टून देखता था। मुझे इसमें बहुत मजा आता था।”
उन्होंने आगे कहा,
“आज भी जब मुझे आराम करना होता है या थोड़ा शांत महसूस करना होता है, तो मैं अपने कमरे में बैठकर कार्टून देखता हूं। इससे मुझे बहुत अच्छा लगता है।”
रिकॉर्डों की बारिश के बीच जमीन से जुड़े
आईपीएल 2026 में वैभव सूर्यवंशी ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे किसी सपने जैसी लगती हैं।
IPL 2026 में वैभव का प्रदर्शन
| आंकड़ा | रिकॉर्ड |
|---|---|
| रन | 680 |
| छक्के | 65 |
| ऑरेंज कैप | हां |
| उम्र | 15 वर्ष |
| टीम | राजस्थान रॉयल्स |
उन्होंने इस सीजन में क्रिस गेल के एक टी20 सीजन में सबसे ज्यादा छक्कों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
पिता की सीख ने बदली सोच
वैभव की बल्लेबाजी जितनी आक्रामक है, उनकी सोच उतनी ही परिपक्व दिखाई देती है।
उन्होंने बताया कि उनके पिता ने बचपन से उन्हें टीम को व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर रखना सिखाया।
“अगर तुम शतक, दोहरा शतक या तिहरा शतक भी बना लो, लेकिन टीम नहीं जीतती तो उन रनों की कोई अहमियत नहीं होती।”
यह सीख आज भी उनके खेल में दिखाई देती है।
“मेरे लिए 80 रन की जीत, 100 रन की हार से बड़ी”
वैभव ने साफ कहा कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण नहीं हैं।
उन्होंने कहा,
“अगर मैं 80 रन बनाऊं और टीम जीत जाए, तो वह मेरे लिए उस शतक से ज्यादा महत्वपूर्ण है जिसके बाद टीम हार जाए।”
उनका मानना है कि टीम जितनी आगे जाएगी, व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाने के उतने ही ज्यादा मौके मिलेंगे।
यही वजह है कि वह हर मैच में टीम के लक्ष्य को प्राथमिकता देते हैं।
सचिन के बाद सबसे बड़ी चर्चा?
कई क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि 1988 में सचिन तेंदुलकर के उभरने के बाद भारतीय क्रिकेट में किसी युवा खिलाड़ी को इतनी चर्चा नहीं मिली जितनी वैभव सूर्यवंशी को मिल रही है।
हालांकि उनकी बल्लेबाजी शैली सचिन से अलग है, लेकिन कम उम्र में दिखाई गई परिपक्वता ने दोनों के बीच तुलना शुरू कर दी है।















