RCB – बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर शाम ढल रही थी, लेकिन अंदर एक अलग तरह की कहानी पक रही थी—एक ऐसे खिलाड़ी की, जो मैदान से ज़्यादा इस वक्त ड्रेसिंग रूम की बेंच पर नजर आता है, फिर भी खुद को “बाहर” नहीं मानता।
वेंकटेश अय्यर, जिनका नाम अभी दो साल पहले तक IPL के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर्स में गिना जाता था, आज RCB में एक अलग भूमिका निभा रहे हैं—धैर्य की।
RCB में जगह बनाना आसान नहीं—और वेंकटेश ये समझते हैं
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की मौजूदा स्क्वॉड को अगर एक शब्द में समझाना हो, तो वो होगा—“settled”। 2024 में खिताब जीतने के बाद टीम ने अपने core combination को काफी हद तक बरकरार रखा है। और यही वो दीवार है, जिससे नए खिलाड़ियों को टकराना पड़ता है।
वेंकटेश अय्यर ने खुद इसे बहुत साफ शब्दों में रखा।
“मुझे बाहर बैठने की आदत नहीं है… लेकिन टीम का माहौल सबसे ऊपर है।”
ये लाइन सिर्फ एक quote नहीं, बल्कि उनके mindset का snapshot है।
| फैक्टर | वेंकटेश अय्यर की स्थिति |
|---|---|
| टीम | RCB |
| IPL 2026 में मौके | 1 मैच |
| रोल | बैकअप/फ्लेक्सिबल ऑलराउंडर |
| चैलेंज | टॉप और मिडिल ऑर्डर में भारी प्रतिस्पर्धा |
RCB के टॉप ऑर्डर में पहले से established नाम हैं, और मिडिल ऑर्डर में भी roles clearly defined हैं। ऐसे में एक ऑलराउंडर के लिए जगह बनाना सिर्फ performance का नहीं, timing का भी खेल बन जाता है।
“ये अगर नहीं, कब का सवाल है”
वेंकटेश का सबसे दिलचस्प बयान शायद यही था—“ये ‘अगर’ नहीं, बल्कि ‘कब’ का सवाल है।”
इस एक लाइन में frustration भी है, confidence भी, और patience भी।
उन्होंने ये भी साफ किया कि टीम मैनेजमेंट—मो बोबाट, एंडी फ्लावर और दिनेश कार्तिक—ने उनके role को लेकर पूरी clarity दी है।
आजकल IPL में role clarity बहुत बड़ा factor बन चुका है। आप टीम में हैं, लेकिन क्यों हैं—ये समझना उतना ही जरूरी है जितना playing XI में होना।
RCB मैनेजमेंट का ये approach उस broader trend से मेल खाता है जो अब फ्रेंचाइजी क्रिकेट में दिख रहा है—defined roles over big names।
KKR से RCB—और कीमत की कहानी
वेंकटेश अय्यर का सफर भी अपने आप में IPL की economics का एक छोटा केस स्टडी है।
| साल | टीम | कीमत |
|---|---|---|
| 2024 | KKR | ₹23.75 करोड़ |
| 2025 | RCB | ₹7 करोड़ |
ये गिरावट सिर्फ numbers नहीं है—ये perception, form, और टीम जरूरतों का मिश्रण है।
KKR के साथ 2024 में वो title-winning campaign का हिस्सा थे। उस समय उनका role clear था—top order aggression + part-time bowling।
लेकिन RCB में आते ही context बदल गया।
नई टीम
नई strategy
और सबसे अहम—already settled XI
बेंच पर बैठना—क्रिकेट का सबसे underrated challenge
वेंकटेश ने एक बात बहुत ईमानदारी से कही—“बाहर बैठना ऐसी चीज है जिसके लिए आप तैयारी नहीं कर सकते।”
ये शायद हर professional cricketer की सबसे बड़ी mental test होती है।
नेट्स में आप practice कर सकते हैं
fitness maintain कर सकते हैं
लेकिन match rhythm… वो सिर्फ खेलने से आता है
और जब वो मौका नहीं मिलता, तो motivation बनाए रखना ही असली skill बन जाती है।
वेंकटेश ने बताया कि वो खुद को mentally इस तरह तैयार रखते हैं जैसे हर मैच खेलने वाले हों।
इम्पैक्ट प्लेयर रूल—एक उम्मीद की खिड़की
IPL का “Impact Player” नियम कई खिलाड़ियों के लिए lifeline बन गया है—और वेंकटेश के लिए भी।
उन्होंने खुद कहा—“इसके साथ कुछ भी हो सकता है।”
ये नियम essentially bench strength को relevance देता है।
आप starting XI में न हों, फिर भी match का हिस्सा बन सकते हैं।
और कभी-कभी, game-changer भी।
वेंकटेश जैसे multi-dimensional खिलाड़ी के लिए ये rule खास तौर पर फायदेमंद है:
Batting कर सकते हैं
Bowling option दे सकते हैं
Fielding में agile हैं
यानी team situation के हिसाब से उन्हें plug-in किया जा सकता है।
RCB का dilemma—stability vs flexibility
RCB के perspective से देखें, तो उनका decision भी logical है।
आप defending champions हैं
winning combination है
और dressing room में confidence high है
ऐसे में unnecessary बदलाव risk हो सकता है।
लेकिन दूसरी तरफ:
bench पर बैठे players की quality बहुत high है
और season लंबा है
Injuries, form dips, tactical changes—ये सब eventually door खोलते हैं।
RCB के लिए असली challenge यही है—stability बनाए रखते हुए flexibility कैसे maintain करें।
एक broader lesson—career linear नहीं होता
वेंकटेश अय्यर की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं है—ये IPL ecosystem का reflection है।
आज आप ₹23 करोड़ के खिलाड़ी हैं
कल ₹7 करोड़ में बिकते हैं
आज आप match-winner हैं
कल bench strength बन जाते हैं
लेकिन जो चीज constant रहती है, वो है—professionalism।
वेंकटेश ने जिस तरह situation को accept किया है, वो बताता है कि modern cricketer सिर्फ skill से नहीं, mindset से भी बनता है।
आगे क्या?
क्या वेंकटेश को और मौके मिलेंगे?
Short answer—हाँ, almost निश्चित रूप से।
Long answer—timing पर निर्भर करेगा।
एक injury
एक खराब run
या एक tactical बदलाव
और suddenly, वो playing XI में होंगे।
और शायद यही वजह है कि वो बार-बार कहते हैं—“ये कब का सवाल है।”















