Wasim Akram – पूर्व पाकिस्तानी तेज गेंदबाज वसीम अकरम (Wasim Akram) ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में “राजनीति के दखल” पर नाराज़गी जताई है। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) से अपील की है कि वह “खेल को राजनीति से अलग करने” के लिए हस्तक्षेप करे।
हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) या पाकिस्तानी खिलाड़ियों का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ़ तौर पर आईपीएल में पाकिस्तानी क्रिकेटरों पर लगे प्रतिबंध की ओर था।
वसीम अकरम का बयान – “खेल को राजनीति से दूर रखो”
विजडन (Wisden) को दिए एक इंटरव्यू में वसीम अकरम ने कहा,
“सॉरी, लेकिन मैं क्रिकेट में राजनीति पसंद नहीं करता। खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। हर देश के खिलाड़ी को लीग क्रिकेट में खेलने का मौका मिलना चाहिए। हिम्मत दिखाओ, बड़ा दिल रखो।”
उन्होंने आगे कहा कि आईसीसी (ICC) को इस मुद्दे में दखल देना चाहिए क्योंकि क्रिकेट बोर्ड्स और लीग के मालिकों को यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि किस देश का खिलाड़ी खेले या नहीं।
“यह मायने नहीं रखता कि टीम का मालिक कौन है या लीग कौन चलाता है। हर देश के खिलाड़ी को खेलने का अधिकार होना चाहिए,” अकरम ने कहा।
IPL में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर क्यों लगा है बैन?
वसीम अकरम ने सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनका बयान साफ़ तौर पर IPL में पाकिस्तानियों की गैर-मौजूदगी की तरफ था।
दरअसल, 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पाकिस्तानी क्रिकेटरों को IPL में खेलने से प्रतिबंधित कर दिया था।
2008 में पहले सीजन के दौरान शोएब अख्तर, सोहेल तनवीर, कामरान अकमल, शाहिद अफरीदी जैसे खिलाड़ी IPL में खेले थे।
लेकिन 26/11 के बाद भारत-पाकिस्तान रिश्ते खराब हुए और उसके बाद से किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को IPL में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिली।
हालिया एशिया कप में दिखी भारत-पाकिस्तान की तल्खी
सितंबर 2025 में हुए एशिया कप के दौरान भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव दिखा।
भारत और पाकिस्तान तीन बार आमने-सामने आए, जिनमें भारत ने सभी मुकाबले जीते।
लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान खींचा उस बात ने जब दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने आपस में हाथ तक नहीं मिलाया।
इसकी वजह अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले को बताया गया, जिसमें पाकिस्तानी आतंकियों ने सैलानियों की हत्या कर दी थी।
उस घटना के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान और पीओके स्थित आतंकी ठिकानों को नष्ट किया।
आतंक पर खामोश रहे पाकिस्तानी क्रिकेटर
वसीम अकरम भले ही क्रिकेट में राजनीति से दूरी की बात कर रहे हों,
लेकिन अब तक किसी भी बड़े पाकिस्तानी क्रिकेटर ने भारत में हुए आतंकी हमलों की खुलकर निंदा नहीं की है।
शाहिद अफरीदी से लेकर शोएब अख्तर तक कई पूर्व क्रिकेटर अक्सर भारत के खिलाफ विवादित बयान देते रहते हैं।
यहां तक कि शोएब अख्तर ने भारतीय मंचों पर जाकर “हिंदू और मुस्लिम साथ नहीं रह सकते” जैसी बातें कीं, जबकि अफरीदी भारत को “कब्जे वाला देश” कह चुके हैं।
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट पर राजनीति का साया
भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज 2012 के बाद से नहीं खेली गई है।
दोनों टीमें केवल ICC टूर्नामेंट्स और एशिया कप जैसे बहु-देशीय इवेंट्स में ही आमने-सामने आती हैं।
बीसीसीआई का रुख साफ़ है—जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय सीरीज या खिलाड़ियों की अदला-बदली मुमकिन नहीं है।
वसीम अकरम की अपील – “ICC को कदम उठाना चाहिए”
अकरम ने कहा,
“क्रिकेट बोर्ड्स को आगे आना चाहिए। ICC को इस पर कदम उठाना चाहिए। यह खेल दुनिया को जोड़ने के लिए है, तो फिर इसे सीमाओं से क्यों बांधा जा रहा है?”
हालांकि इस बयान पर भारतीय फैंस और क्रिकेट विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं कि जब पाकिस्तान खुद आतंकवाद पर चुप है, तो भारत से किसी भी तरह की क्रिकेटिंग भागीदारी की उम्मीद बेमानी है।
















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