Ashes : आधा दिमाग हो तब भी दिखेगा—मार्क वॉ की स्मिथ पर कड़ी टिप्पणी

Atul Kumar
Published On:
ICC

Ashes – गाबा की हवा में गुरुवार की रात एक अजीब-सी खटक थी—जैसे स्टेडियम खुद पूछ रहा हो: “ये टेस्ट मैच चल रहा है या कोई टाइम-मैनेजमेंट ड्रामा?”
एशेज का बुखार हमेशा उबाल पर रहता है, लेकिन दूसरे टेस्ट के पहले दिन जो हुआ उसने रोमांच के ऊपर एक परत चिढ़ का भी चढ़ा दी।
आरोप सीधे ऑस्ट्रेलिया के कार्यवाहक कप्तान स्टीव स्मिथ पर—जानबूझकर समय बर्बाद करने के।

90 ओवर का दिन था, लेकिन सिर्फ 74 ओवर फेंके गए। वह भी तब जब खेल को 30 मिनट बढ़ाया गया था। यानी, ऑस्ट्रेलिया ने ओवरों को ऐसे निगल लिया जैसे किसी को यकीन ही न हो कि अंपायर देख नहीं रहे। यह ऑस्ट्रेलिया की धरती पर—बारिश या खराब मौसम के बिना—किसी टेस्ट दिन का सबसे कम ओवरों का रिकॉर्ड बन गया।

और फिर शुरू हुई आलोचनाओं की बरसात—कैटिच, फिन, मार्क वॉ… हर किसी ने स्मिथ को घेरा।

फील्डिंग बदलने का “खेल”—इंग्लैंड के 9 विकेट गिरने के बाद तो हद ही पार

पहले दिन इंग्लैंड का स्कोर 325/9 था। आखिरी विकेट टपकने का इंतज़ार सबको था—लेकिन मैदान पर कुछ और ही खेल चल रहा था।
हर गेंद से पहले फील्ड बदलना।
हर ओवर के बाद लंबी मीटिंग।
हर सेट-अप में इतना समय कि दर्शक भी मन ही मन ओवर गिनना छोड़ दें।

कमेंट्री बॉक्स में बैठे एक्सपर्ट्स के लिए ये सिर्फ टैक्टिकल बदलाव नहीं था—ये “डिले गेम” दिख रहा था।
एशेज में टीमें कई हथकंडे अपनाती हैं, लेकिन यह वाला थोड़ा ज़्यादा नंगा दिखाई दिया।

साइमन कैटिच का गुस्सा—”ये मज़ाक से भी परे है”

फॉक्स क्रिकेट पर बैठे साइमन कैटिच ने तो स्मिथ पर प्रहार ही कर दिया।

उन्होंने कहा:
“सोचिए, हम आधा घंटा अतिरिक्त खेलने जा रहे और फिर भी सिर्फ 74 ओवर हुए। ये मज़ाक से भी परे है—सीधा-सीधा बकवास मज़ाक।”

कैटिच की आवाज़ में सिर्फ नाराजगी नहीं थी—यह पुरानी क्रिकेटर वाली निराशा भी थी, जहाँ खेल की प्रतिष्ठा दांव पर लग जाती है।

इंग्लैंड के स्टीवन फिन ने कहा—“हर गेंद के बीच फील्ड बदल रहे थे”

फिन, जो खुद तेज गेंदबाज़ रहे हैं, समझते हैं ओवर-रेट का खेल पर कितना असर होता है।
उन्होंने TNT Sports पर कहा:

“स्मिथ हर गेंद के बीच फील्ड बदल रहे थे… ये टाइम वेस्टिंग बहुत साफ था।”

फिन की बात इसलिए अहम है क्योंकि इंग्लैंड इस मैच में शायद थोड़ा और आगे जाना चाहता था—और स्मिथ की यह रणनीति सीधा उनके अवसरों पर कुठाराघात जैसी लगी।

मार्क वॉ सबसे सख्त—“ये बिल्कुल स्वीकार्य नहीं, अंपायर कहाँ थे?”

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान मार्क वॉ तो मानो फट पड़े:

“हमें पता है कि क्या करने की कोशिश हो रही थी। वह कोई ओवर करवाना ही नहीं चाहते थे…
अंपायरों को तुरंत दखल देना चाहिए था।
अगर आपके पास आधा दिमाग भी हो तब भी यह साफ दिख रहा था।”

वॉ की ये लाइन—“आधा दिमाग भी हो तब भी दिख रहा था”—दर्शाती है कि मामला कितना खुला-खुला था।

स्मिथ की रणनीति—क्या यह सच में डिफेन्सिव गेम प्लान था?

अब सवाल यह उठता है कि स्मिथ ऐसा क्यों करेंगे?
इंग्लैंड अपनी पारी के अंतिम ओवर्स में रूट (138*) के सहारे तेजी से रन जोड़ रहा था।
ऑस्ट्रेलिया की बॉलिंग पिंक-बॉल के बावजूद उतनी धारदार नहीं दिखी, और शायद स्मिथ ने मैच की गति को धीमा रखने को रणनीतिक बढ़त माना।

लेकिन क्रिकेट के नियम—और सम्मान—कहते हैं कि ओवर-रेट की जिम्मेदारी कंधे पर होती है।
एशेज जैसे हाई-वोल्टेज मुकाबले में 16 ओवर कम होना सचमुच बड़ा मुद्दा है।

क्या स्लो ओवर रेट से फायदा हुआ?

पहलूअसर
इंग्लैंड की रन गतिधीमी हुई
मैच की गतिटूट गई
ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाज़ीराहत मिली
दर्शकों का अनुभवनिराशा
विशेषज्ञों की प्रतिक्रियातीखी आलोचना

स्पष्ट है कि इस रणनीति का असर मैच के बैलेंस पर दिखा—कम ओवर मतलब कम जोखिम।

गाबा में यह रणनीति क्यों और कहाँ सवालों के घेरे में?

गाबा पिंक-बॉल टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया अक्सर दबदबा दिखाता है।
लेकिन इस बार इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी संतुलित दिखी—रूट, क्रॉली, आर्चर… सभी ने योगदान दिया।
स्मिथ शायद नहीं चाहते थे कि इंग्लैंड 350–360 तक जाए।

समस्या यह नहीं कि कप्तान रणनीति इस्तेमाल करे—समस्या यह है कि कप्तान समय को हथियार बनाकर खेल की नींव को ही नुकसान पहुँचाए।

अंपायर कहाँ गायब थे?

कई विशेषज्ञ इस बात पर सहमत दिखे—अगर कप्तान जानबूझकर खेल धीमा कर रहा है, तो अंपायर की भूमिका सिर्फ चेतावनी नहीं, कार्रवाई की होनी चाहिए।
धीमा ओवर रेट अंततः फाइन या सस्पेंशन तक ले जा सकता है—लेकिन मैदान में तुरंत सुधार होना चाहिए था।

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