IND vs SL – श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में टीम इंडिया ने 165 रन से शानदार जीत दर्ज की और दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। भारत की इस जीत में मानव सुथार और रवींद्र जडेजा की स्पिन गेंदबाजी का अहम योगदान रहा।
वहीं दूसरी तरफ कुलदीप यादव उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। गॉल की स्पिन मददगार पिच पर कुलदीप ने 25 ओवर गेंदबाजी की और उनके खाते में सिर्फ एक विकेट आया।
ऐसे में अब दूसरे टेस्ट से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीम मैनेजमेंट कुलदीप यादव को एक और मौका देगा?
सुथार-जडेजा ने किया कमाल, कुलदीप रहे बेअसर
गॉल टेस्ट में भारतीय स्पिन तिकड़ी से काफी उम्मीदें थीं। रवींद्र जडेजा और युवा मानव सुथार ने इन उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाया।
मानव सुथार ने दोनों पारियों में कुल 10 विकेट हासिल किए, जबकि रवींद्र जडेजा के खाते में 4 विकेट आए।
इसके उलट कुलदीप यादव को पूरे मैच में सिर्फ एक सफलता मिली।
यही वजह है कि मैच के बाद टीम इंडिया की प्लेइंग XI को लेकर चर्चा में सबसे ज्यादा सवाल कुलदीप यादव के नाम पर उठ रहे हैं।
25 ओवर में सिर्फ 1 विकेट
कुलदीप यादव ने गॉल टेस्ट में कुल 25 ओवर यानी 150 गेंदें फेंकीं।
इस दौरान उन्हें सिर्फ एक विकेट मिला। खास बात यह रही कि कुलदीप पूरे मैच में एक भी मेडन ओवर नहीं डाल सके।
टेस्ट क्रिकेट में मेडन ओवर का महत्व काफी ज्यादा होता है। लगातार डॉट गेंदों और मेडन ओवरों के जरिए गेंदबाज बल्लेबाजों पर दबाव बना सकता है और दूसरे छोर से गेंदबाजी कर रहे साथी को विकेट हासिल करने का मौका मिल सकता है।
सुथार और जडेजा ने यही दबाव बनाने में सफलता हासिल की, लेकिन कुलदीप ऐसा करने में नाकाम रहे।
गॉल की पिच पर कुलदीप से थी बड़ी उम्मीद
गॉल का मैदान स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता है। पिच पर टर्न मिलने की संभावना को देखते हुए कुलदीप यादव से काफी उम्मीदें थीं।
कुलदीप अपनी चाइनामैन गेंदबाजी, गुगली और फ्लाइट के जरिए बल्लेबाजों को परेशान करने की क्षमता रखते हैं।
लेकिन पहले टेस्ट में वह श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने में कामयाब नहीं रहे।
यही बात उनके लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि अगर ऐसी पिच पर भी कुलदीप प्रभाव नहीं छोड़ पाते हैं तो टीम मैनेजमेंट के लिए उन्हें प्लेइंग XI में बनाए रखना आसान नहीं होगा।
19 टेस्ट में 80 विकेट
कुलदीप यादव ने अपना टेस्ट डेब्यू 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया था।
हालांकि, पिछले करीब एक दशक में उन्हें टेस्ट क्रिकेट में नियमित मौके नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने अब तक सिर्फ 19 टेस्ट मैच खेले हैं और इनमें 80 विकेट हासिल किए हैं।
कुलदीप अपने टेस्ट करियर में तीन बार प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार भी जीत चुके हैं।
इससे पता चलता है कि जब उन्हें मौका मिलता है तो वह मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।
लेकिन समस्या उनकी निरंतरता और प्लेइंग XI में जगह को लेकर रही है।
क्या सारांश जैन को मिल सकता है मौका?
अब टीम मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ा विकल्प सारांश जैन का भी है।
सारांश एक ऑफ स्पिनर हैं और घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है।
उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अब तक 54 मुकाबलों में 188 विकेट हासिल किए हैं।
उनका गेंदबाजी औसत 27.30 का है और वह अपने करियर में 10 बार पांच विकेट हॉल भी ले चुके हैं।
भारत को गॉल टेस्ट में एक ऑफ स्पिनर की कमी महसूस हुई। ऐसे में टीम मैनेजमेंट दूसरे टेस्ट में सारांश को आजमाने के विकल्प पर विचार कर सकता है।
रफ का फायदा उठा सकते हैं सारांश
टेस्ट मैच के दौरान तेज गेंदबाजों के फुटमार्क से पिच पर रफ एरिया बन जाता है।
एक ऑफ स्पिनर के लिए यह रफ काफी उपयोगी साबित हो सकता है, खासकर जब वह दाएं हाथ के बल्लेबाजों को गेंदबाजी कर रहा हो।
सारांश जैन इस स्थिति का फायदा उठाने में सक्षम हो सकते हैं।
हालांकि, दूसरे टेस्ट की प्लेइंग XI में बदलाव का अंतिम फैसला कप्तान शुभमन गिल और हेड कोच गौतम गंभीर को ही करना होगा।
क्या कुलदीप के टेस्ट करियर पर संकट?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि कुलदीप यादव का टेस्ट करियर खत्म होने वाला है।
उनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव है और उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कई बार शानदार प्रदर्शन किया है।
लेकिन अगर टीम मैनेजमेंट उन्हें कोलंबो में दूसरे टेस्ट में भी मौका देता है और वह वहां भी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहते हैं, तो निश्चित तौर पर उनके लिए टीम में अपनी जगह बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
भारत के पास अब घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्पिन विकल्प भी मौजूद हैं।
दूसरे टेस्ट में क्या होगा?
भारत ने गॉल टेस्ट जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब दूसरा टेस्ट कोलंबो में खेला जाना है।
टीम इंडिया की कोशिश सीरीज को 2-0 से जीतने की होगी।
ऐसे में कप्तान और कोच के सामने प्लेइंग XI को लेकर ज्यादा जोखिम लेने की जरूरत नहीं होगी। अगर मौजूदा गेंदबाजी संयोजन अच्छा प्रदर्शन कर रहा है तो टीम उसी संयोजन के साथ उतर सकती है।
लेकिन अगर परिस्थितियां एक अतिरिक्त ऑफ स्पिनर की मांग करती हैं तो कुलदीप यादव की जगह सारांश जैन को मौका मिलना भी संभव है।













