Duleep Trophy 2026 – दलीप ट्रॉफी 2026 के पहले सेमीफाइनल में ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच रोमांचक मुकाबला खेला जा रहा है। बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के ग्राउंड-1 में जारी इस नॉकआउट मुकाबले में दोनों टीमों की पहली पारी का स्कोर बिल्कुल बराबर रहा।
दोनों टीमों ने अपनी पहली पारी में 266-266 रन बनाए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मुकाबला ड्रॉ हो जाता है तो फाइनल में किस टीम को जगह मिलेगी? आमतौर पर भारतीय घरेलू क्रिकेट में पहली पारी में बढ़त बनाने वाली टीम को फायदा मिलता है, लेकिन यहां दोनों टीमों के स्कोर बराबर हैं। ऐसे में BCCI की प्लेइंग कंडीशन्स का नियम काफी दिलचस्प है।
ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन का स्कोर बराबर
पहले सेमीफाइनल में ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन और रजत पाटीदार की अगुवाई वाली सेंट्रल जोन आमने-सामने हैं।
सेंट्रल जोन ने पहली पारी में सभी विकेट गंवाकर 266 रन बनाए। जवाब में ईस्ट जोन भी 266 रन पर ऑलआउट हो गया।
ईस्ट जोन की ओर से वैभव सूर्यवंशी ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 92 रन बनाए, लेकिन उनके अलावा टीम बड़ी साझेदारी नहीं बना सकी।
अब दोनों टीमों की पहली पारी का स्कोर बराबर होने से ड्रॉ की स्थिति में फाइनल की राह को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।
अगर मैच ड्रॉ हुआ तो कौन पहुंचेगा फाइनल?
दलीप ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबलों में अगर मैच का कोई नतीजा नहीं निकलता तो पहली पारी के स्कोर का नियम लागू होता है।
लेकिन यहां दोनों टीमों की पहली पारी बराबर है। ऐसी स्थिति के लिए BCCI की प्लेइंग कंडीशन्स में एक विशेष प्रावधान है।
अगर मैच ड्रॉ रहता है और दोनों टीमों की पहली और दूसरी पारियां पूरी हो जाती हैं, तो रन रेट या प्रति विकेट औसत स्कोर के आधार पर फैसला किया जा सकता है।
हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें पूरी होना जरूरी है।
चौथी पारी में कम से कम 60 ओवर जरूरी
इस नियम का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब दोनों टीमों की दोनों पारियां पूरी हो चुकी हों।
इसके अलावा मैच की चौथी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को कम से कम 60 ओवर खेलने होंगे।
इसके बाद दोनों टीमों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा और औसत स्कोर प्रति विकेट के आधार पर फैसला हो सकता है।
जिस टीम का औसत स्कोर प्रति विकेट अधिक होगा, उसे फाइनल में प्रवेश मिल सकता है।
अगर ये शर्तें भी पूरी नहीं हुईं तो?
अगर मैच ड्रॉ रहता है और निर्धारित शर्तों के मुताबिक औसत स्कोर प्रति विकेट के आधार पर विजेता तय नहीं किया जा सकता, तो फिर टॉस के जरिए फैसला किया जा सकता है।
यानी ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच मुकाबला ड्रॉ होने की स्थिति में मामला सिर्फ पहली पारी के स्कोर से तय नहीं होगा, बल्कि BCCI की नॉकआउट प्लेइंग कंडीशन्स के तहत आगे के प्रावधान लागू होंगे।
ड्रॉ की स्थिति में संभावित क्रम
1. मैच का नतीजा निकलता है → जीतने वाली टीम फाइनल में जाएगी।
2. मैच ड्रॉ होता है + पहली पारी बराबर है + दोनों टीमों की दोनों पारियां पूरी हैं + चौथी पारी में कम से कम 60 ओवर → औसत स्कोर प्रति विकेट के आधार पर फैसला।
3. आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं → टॉस के जरिए फैसला हो सकता है।
तीसरे दिन सेंट्रल जोन की हालत खराब
हालांकि मौजूदा मुकाबले की स्थिति को देखते हुए ड्रॉ की संभावना कम नजर आ रही है।
तीसरे दिन के खेल की शुरुआत में ही सेंट्रल जोन की दूसरी पारी लड़खड़ा गई। टीम ने 100 रन के आसपास 8 विकेट गंवा दिए थे।
ऐसे में सेंट्रल जोन के जल्द ऑलआउट होने की संभावना है और ईस्ट जोन को जीत के लिए 150 रन से भी कम का लक्ष्य मिल सकता है।
अगर ईस्ट जोन इस लक्ष्य को हासिल कर लेता है तो उसे फाइनल में पहुंचने के लिए किसी टाई-ब्रेकर नियम की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वैभव सूर्यवंशी पर भी रही नजर
ईस्ट जोन की पहली पारी में सबसे ज्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी की रही। युवा बल्लेबाज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 92 रन की पारी खेली।
हालांकि वह शतक से चूक गए, लेकिन उनकी पारी ने ईस्ट जोन को सेंट्रल जोन के 266 रन के स्कोर की बराबरी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
अब ईस्ट जोन की नजर मैच जीतकर सीधे फाइनल में जगह बनाने पर होगी।













