Ishan Kishan – दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पूर्व क्षेत्र के लिए 270 रन की शानदार पारी खेलने वाले ईशान किशन ने अपने करियर के मुश्किल दौर को लेकर बड़ा बयान दिया है। किशन का कहना है कि भारतीय टीम से बाहर रहने के दौरान उन्हें यह समझ आया कि एक क्रिकेटर के तौर पर उनका मुख्य काम सिर्फ रन बनाना और टीम को जीत दिलाने में योगदान देना है।
ईशान ने कहा कि पहले वह चीजों को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचते थे और खुद पर अनावश्यक दबाव डालते थे। लेकिन अब उन्होंने अपनी मानसिकता बदल ली है। उनका पूरा ध्यान मैदान पर जाकर गेंद के हिसाब से प्रतिक्रिया देने और टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा रन बनाने पर है।
270 रन की पारी बनी बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल
दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईशान किशन ने 270 रन की मैराथन पारी खेली। उन्होंने अपनी इस पारी को मानसिक बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
किशन के मुताबिक, भारतीय टीम से बाहर रहने के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि क्रिकेट में उनके नियंत्रण में सबसे महत्वपूर्ण चीज उनका प्रदर्शन है।
उन्होंने कहा कि मैदान के बाहर की चीजों के बारे में ज्यादा सोचना मानसिकता को प्रभावित करता है और खिलाड़ी पर बेवजह का दबाव बढ़ाता है। इसलिए अब वह इन अतिरिक्त विचारों से खुद को दूर रखने की कोशिश करते हैं।
‘अब खुद से किसी तरह की उम्मीद नहीं रखता’
ईशान किशन ने कहा कि इस समय वह अपने खेल में सबसे अच्छी चीज यही कर रहे हैं कि किसी भी बात को जरूरत से ज्यादा नहीं सोचते।
उनके मुताबिक, बल्लेबाज के तौर पर उनका काम सिर्फ क्रीज पर जाकर गेंद को देखना और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देना है। वह खुद से किसी खास स्कोर या प्रदर्शन की उम्मीद नहीं रखते।
किशन ने कहा कि जब दिमाग स्पष्ट होता है तो बल्लेबाजी करना काफी आसान हो जाता है और समय के साथ खिलाड़ी खुद को बेहतर तरीके से समझने लगता है।
2023 के बाद मुश्किल दौर में पहुंच गया था करियर
ईशान किशन साल 2023 में भारत के तीनों प्रारूपों में खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल थे। हालांकि, इसके बाद कई घटनाक्रमों के कारण उनका अंतरराष्ट्रीय करियर मुश्किल दौर में पहुंच गया।
उन्हें बीसीसीआई के केंद्रीय अनुबंध से भी बाहर होना पड़ा। इसके बाद किशन ने घरेलू क्रिकेट पर ध्यान लगाया और अपने प्रदर्शन के जरिए वापसी का रास्ता तैयार किया।
घरेलू क्रिकेट में किया शानदार प्रदर्शन
2025-26 रणजी ट्रॉफी में किशन ने शतक लगाए। इसके अलावा उन्होंने झारखंड को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जिताने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने 517 रन बनाए, जिसमें दो शतक शामिल थे।
उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन का फायदा उन्हें मिला और इसके बाद बीसीसीआई का केंद्रीय अनुबंध भी वापस मिला। सफेद गेंद के प्रारूपों में उन्हें भारतीय टीम में भी जगह मिली।
‘मेरा काम रन बनाना है, चयन करना नहीं’
ईशान किशन के मौजूदा बयानों को उनके करियर के पिछले दौर से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके शब्दों से साफ संकेत मिलता है कि अब वह चयन को लेकर ज्यादा सोचने के बजाय अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहते हैं।
उनका नजरिया यही है कि खिलाड़ी का काम मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करना है। चयन करना चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी है।
दलीप ट्रॉफी में 270 रन की पारी के बाद ईशान ने अपने प्रदर्शन से एक बार फिर यह साबित किया है कि वह बड़े स्कोर बनाने की क्षमता रखते हैं।
टी20 क्रिकेट के बाद लाल गेंद में खुद को किया रीसेट
ईशान किशन दलीप ट्रॉफी में आने से पहले सीमित ओवरों का क्रिकेट खेल रहे थे। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट से पहले उन्होंने बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लाल गेंद से अभ्यास किया था।
किशन के मुताबिक, लगातार टी20 क्रिकेट खेलने से बल्लेबाज के अंदर ज्यादा शॉट खेलने की आदत आ जाती है। दलीप ट्रॉफी में पूर्वोत्तर क्षेत्र के खिलाफ अपनी पहली पारी में भी वह इसी वजह से परेशानी में फंसे थे।
उन्होंने बताया कि एक मौके पर कट शॉट खेलने को लेकर वह असमंजस में पड़ गए और इसी सोच के कारण अपना विकेट गंवा बैठे।
फाइनल से पहले साथी बल्लेबाजों के साथ बिताया ज्यादा समय
दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ फाइनल से पहले ईशान ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने साथी बल्लेबाजों के साथ ज्यादा समय बिताया और व्यक्तिगत शॉट्स के बजाय साझेदारी को मजबूत करने पर ध्यान दिया।
किशन के मुताबिक, जब कोई खिलाड़ी पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रारूपों में खेल चुका हो तो टीम के साथी उससे रन बनाने की उम्मीद करते हैं। इसलिए उनके लिए क्रीज पर टिकना और टीम के लिए बड़ा स्कोर बनाना महत्वपूर्ण था।
क्या टेस्ट टीम के लिए भी दरवाजा खुलेगा?
दलीप ट्रॉफी फाइनल में 270 रन की पारी खेलने के बाद ईशान किशन की टेस्ट क्रिकेट में वापसी की दावेदारी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
भारतीय टेस्ट टीम में बदलाव के दौर के बीच किशन का यह प्रदर्शन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा सकता है। विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी दोनों में विकल्प होने के कारण वह चयनकर्ताओं के सामने एक उपयोगी विकल्प बन सकते हैं।
हालांकि, टेस्ट टीम में चयन पूरी तरह चयनकर्ताओं के फैसले पर निर्भर करेगा। ईशान के मौजूदा बयानों से इतना जरूर साफ है कि वह चयन की चिंता करने के बजाय अपने प्रदर्शन को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
ईशान किशन के करियर की अहम बातें
| पहलू | जानकारी |
|---|---|
| खिलाड़ी | ईशान किशन |
| टीम | पूर्व क्षेत्र |
| टूर्नामेंट | दलीप ट्रॉफी |
| फाइनल में स्कोर | 270 रन |
| विपक्षी टीम | दक्षिण क्षेत्र |
| 2025-26 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी | 517 रन |
| सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी शतक | 2 |
| 2023 | भारत के तीनों प्रारूपों में खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल |
| मौजूदा फोकस | रन बनाना और टीम को जीत दिलाना |
ईशान किशन का बदला हुआ क्रिकेट माइंडसेट
ईशान किशन की कहानी सिर्फ 270 रन की पारी तक सीमित नहीं है। उनके बयानों से उनके मानसिक बदलाव की झलक भी मिलती है।
पहले जहां वह चयन, उम्मीदों और प्रदर्शन के दबाव के बारे में ज्यादा सोचते थे, वहीं अब उन्होंने अपने नियंत्रण वाली चीजों पर ध्यान केंद्रित करना सीख लिया है।
रन बनाना, टीम के लिए योगदान देना और गेंद के हिसाब से प्रतिक्रिया करना—किशन के मौजूदा क्रिकेट माइंडसेट का यही आधार नजर आता है।













