AB de Villiers – टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन और सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और आधुनिक दौर के दिग्गज विराट कोहली की तुलना अक्सर होती रहती है। अब दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर एबी डिविलियर्स ने दोनों को लेकर अपनी राय जाहिर की है।
डिविलियर्स का मानना है कि विदेशी परिस्थितियों में बल्लेबाजी की बात की जाए तो विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर के शुरू किए ट्रेंड को अगले स्तर तक पहुंचाया। हालांकि, आंकड़ों की तुलना करें तो विदेशी टेस्ट क्रिकेट में सचिन का रिकॉर्ड कोहली से बेहतर है।
सचिन ने टेस्ट क्रिकेट में 15,921 रन और 51 शतक बनाए हैं, जबकि विराट कोहली ने अपने टेस्ट करियर का अंत 9,230 रन के साथ किया।
डिविलियर्स ने विराट कोहली को क्यों बताया बेहतर?
एबी डिविलियर्स ने अपने YouTube चैनल पर भारतीय बल्लेबाजों के विदेशी परिस्थितियों में प्रदर्शन को लेकर बात की।
उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर उन शुरुआती भारतीय बल्लेबाजों में से थे, जिन्होंने यह साबित किया कि भारतीय उपमहाद्वीप के बल्लेबाज उछाल और सीम वाली विदेशी परिस्थितियों में भी शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।
हालांकि, डिविलियर्स का मानना है कि विराट कोहली ने उस विरासत को आगे बढ़ाते हुए इसे एक अलग स्तर तक पहुंचाया।
डिविलियर्स ने कहा, “सचिन पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने दिखाया कि सबकॉन्टिनेंट के बैटर के तौर पर आप उछाल वाली और सीमिंग कंडीशन में भी अच्छा कर सकते हैं। विराट ने इसे आगे बढ़ाया और लेवल बढ़ाया।”
यानी डिविलियर्स की नजर में सचिन ने रास्ता बनाया, जबकि कोहली ने उस रास्ते को और आगे बढ़ाया।
सचिन तेंदुलकर के नाम टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े रिकॉर्ड
सचिन तेंदुलकर टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं।
उन्होंने 2013 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने से पहले 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए। उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 51 शतक भी हैं।
सचिन के टेस्ट करियर की सबसे बड़ी खासियत उनकी निरंतरता और लंबे समय तक विश्व क्रिकेट पर उनका दबदबा रहा।
उनके 15,921 टेस्ट रनों में से 8,705 रन भारत के बाहर आए। यानी उनके कुल टेस्ट रनों का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा विदेशी धरती पर बना।
यही वजह है कि विदेशी टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में भी सचिन का नाम शीर्ष पर है।
विराट कोहली का टेस्ट करियर भी रहा शानदार
विराट कोहली ने मई 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया।
उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 123 मैचों में 9,230 रन बनाए और ऑल-टाइम टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में 19वें स्थान पर रहे।
कोहली की पहचान खास तौर पर आक्रामक बल्लेबाजी, फिटनेस और तेज गेंदबाजों के खिलाफ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रन बनाने की क्षमता के लिए रही।
भारत को विदेशी टेस्ट दौरों पर मजबूत टीम बनाने में भी कोहली की कप्तानी और बल्लेबाजी की बड़ी भूमिका रही।
विदेशी जमीन पर सचिन का आंकड़ा कोहली से बेहतर
एबी डिविलियर्स ने भले ही विदेशी परिस्थितियों में विराट कोहली को सचिन से बेहतर माना हो, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से तस्वीर थोड़ी अलग है।
सचिन ने भारत के बाहर टेस्ट मैचों में 8,705 रन बनाए हैं, जबकि विराट कोहली ने विदेशी धरती पर 66 टेस्ट में 4,774 रन बनाए।
SENA देशों—दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया—की बात करें तो भी सचिन का रिकॉर्ड बेहतर दिखाई देता है।
SENA देशों में प्रदर्शन
| खिलाड़ी | टेस्ट | रन | औसत | शतक | अर्धशतक |
|---|---|---|---|---|---|
| सचिन तेंदुलकर | 63 | 5,387 | 51.30 | 17 | 23 |
| विराट कोहली | 46 | 3,661 | 42.08 | 12 | 14 |
इन आंकड़ों से साफ है कि विदेशी परिस्थितियों में, खासकर SENA देशों में, सचिन का टेस्ट रिकॉर्ड कोहली से बेहतर रहा है।
फिर भी डिविलियर्स का तर्क सिर्फ आंकड़ों पर आधारित नहीं है। वह भारतीय बल्लेबाजों द्वारा विदेशी परिस्थितियों में खुद को स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया को देखते हुए कोहली को सचिन से आगे रखते हैं।
कोहली के दौर में भारत बना विदेशी जमीन पर मजबूत टीम
विराट कोहली के टेस्ट करियर की एक खास उपलब्धि यह भी रही कि उनके दौर में भारत ने विदेशी परिस्थितियों में टेस्ट क्रिकेट को लेकर अपनी सोच और प्रतिस्पर्धात्मकता को काफी मजबूत किया।
कोहली की कप्तानी में भारत ने तेज गेंदबाजी आक्रमण पर भरोसा किया और विदेशी दौरों पर जीत के लिए आक्रामक रवैया अपनाया।
यही वजह है कि कोहली की बल्लेबाजी को सिर्फ उनके व्यक्तिगत आंकड़ों से नहीं, बल्कि उस दौर की भारतीय टीम के विदेशी प्रदर्शन के संदर्भ में भी देखा जाता है।
सचिन और विराट की विरासत आगे बढ़ा रहे हैं राहुल-पडिक्कल
एबी डिविलियर्स का मानना है कि सचिन और विराट द्वारा स्थापित विदेशी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने की परंपरा अब नई पीढ़ी के भारतीय बल्लेबाज भी आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने खास तौर पर केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल का नाम लिया।
डिविलियर्स के मुताबिक, आज के कई भारतीय बल्लेबाज सचिन और विराट के नक्शेकदम पर चल रहे हैं और विदेशी परिस्थितियों में खुद को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “अब [केएल] राहुल और [देवदत्त] पडिक्कल जैसे कई खिलाड़ी हैं, जिन्होंने उस ट्रेंड को अपनाना शुरू कर दिया है और विराट और सचिन के नक्शेकदम पर चल रहे हैं।”
आंकड़े बनाम प्रभाव, किसे चुनेंगे आप?
सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली की तुलना आसान नहीं है। दोनों अलग-अलग दौर में खेले और क्रिकेट की परिस्थितियां भी अलग थीं।
सचिन के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क उनके आंकड़े हैं—200 टेस्ट, 15,921 रन और 51 शतक। विदेशी धरती पर भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा।
वहीं विराट कोहली के पक्ष में उनका आक्रामक रवैया, फिटनेस, विदेशी परिस्थितियों में तेज गेंदबाजी का सामना करने की क्षमता और कप्तानी के दौरान भारतीय टीम का बदला हुआ रवैया महत्वपूर्ण है।
यही वजह है कि डिविलियर्स की नजर में विराट ने सचिन द्वारा शुरू किए गए ट्रेंड को अगले स्तर तक पहुंचाया।













