Cricket : दोस्तों को टीवी पर देखकर रोते थे दाउद अहमदजई, अब बने इंटरनेशनल क्रिकेट की प्रेरणादायक मिसाल

Atul Kumar
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Cricket – अफगानिस्तान के लिए क्रिकेट खेलने का सपना देखने वाले दाउद अहमदजई की कहानी संघर्ष, धैर्य और जुनून की ऐसी मिसाल है, जो किसी भी युवा खिलाड़ी को प्रेरित कर सकती है।

एक समय ऐसा था जब वह टीवी पर अपने पुराने साथियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते देखकर भावुक हो जाते थे। आज वही दाउद फ्रांस के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं और यूरोपियन क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।

अंडर-19 स्तर पर हशमतुल्लाह शाहिदी, मोहम्मद नबी, गुलबदिन नायब और नजीबुल्लाह जदरान जैसे खिलाड़ियों के साथ खेलने वाले दाउद का सफर आसान नहीं रहा। अफगानिस्तान की जर्सी पहनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फ्रांस जाकर अपने क्रिकेट करियर को नई दिशा दी।

टीवी पर पुराने साथियों को देखकर रो पड़ते थे दाउद

32 वर्षीय लेग स्पिनर दाउद अहमदजई ने पीटीआई से बातचीत में बताया कि जब वह अपने पुराने साथियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता हासिल करते देखते थे, तो कई बार भावुक हो जाते थे।

उन्होंने कहा,

“कई बार टीवी पर उन्हें देखकर मैं रोता था। मैं उनके साथ खेल चुका था। कई बार लगता था कि मेरे सफर को क्या हो गया है और मैं क्या अलग कर सकता था। मैं अफगानिस्तान की जर्सी पहनना चाहता था।”

दाउद के लिए यह केवल क्रिकेट नहीं था, बल्कि अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना था, जो पूरा नहीं हो सका।

अफगानिस्तान छोड़कर फ्रांस में शुरू की नई जिंदगी

अफगानिस्तान छोड़ने के बाद दाउद को यूरोप में पूरी तरह से नई शुरुआत करनी पड़ी। नई भाषा, नई संस्कृति और सीमित संसाधनों के बीच क्रिकेट करियर को जिंदा रखना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।

लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने खेल पर भरोसा रखा और लगातार मेहनत जारी रखी।

क्लब क्रिकेट खेलने के लिए करते थे 22 घंटे का सफर

दाउद अहमदजई के संघर्ष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह क्लब क्रिकेट मैच खेलने के लिए पेरिस से एम्सटर्डम तक बस से यात्रा करते थे।

ट्रेन का किराया महंगा होने के कारण वह लगभग 11 घंटे जाकर और 11 घंटे लौटकर कुल 22 घंटे का सफर तय करते थे।

उन्होंने कहा,

“मैच खेलने के लिये 11 घंटे जाना और 11 घंटे लौटने का सफर तय करता था, लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि कठिन समय निकल जाएगा। मैंने कभी क्रिकेट छोड़ने के बारे में नहीं सोचा।”

कई बार भरपेट खाना भी नहीं मिलता था

यूरोप में शुरुआती दिनों में आर्थिक परिस्थितियां इतनी कठिन थीं कि कई बार उन्हें पौष्टिक और पर्याप्त भोजन भी नहीं मिल पाता था।

इसके बावजूद उन्होंने अपने फिटनेस और क्रिकेट पर फोकस बनाए रखा। यही दृढ़ संकल्प आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।

फ्रांस के लिए बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

लगातार मेहनत का फल दाउद अहमदजई को तब मिला जब वह फ्रांस के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 50 से ज्यादा विकेट लेने वाले पहले खिलाड़ी बने।

यह उपलब्धि न सिर्फ उनके लिए बल्कि फ्रेंच क्रिकेट के लिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है।

फ्रांस को विश्व कप में देखना चाहते हैं दाउद

दाउद का सपना अब केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। वह चाहते हैं कि फ्रांस की टीम भी भविष्य में टी20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा ले।

उन्होंने कहा,

“मैं फ्रांस को विश्व कप में देखना चाहता हूं। इटली ने साबित कर दिया कि यूरोपीय टीमें भी यह कर सकती हैं। उम्मीद है कि फ्रांस भी आगे चलकर विश्व कप खेलेगा।”

यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग में मिला बड़ा मौका

दाउद अहमदजई अब यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग में एक्सेल यूनाइटेड ब्रसेल्स की ओर से खेलते नजर आएंगे।

इस दौरान उन्हें दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज और कोच Mark Boucher के मार्गदर्शन में खेलने का मौका मिलेगा।

दाउद का मानना है कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट खिलाड़ियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा,

“आईपीएल ने दिखा दिया कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट से क्या हो सकता है। एसए20 ने दक्षिण अफ्रीका में वही किया है। इन टूर्नामेंटों से खिलाड़ियों को सीखने और बेहतर खेलने में मदद मिलती है।”

संघर्ष से सफलता तक का सफर

दाउद अहमदजई की कहानी यह साबित करती है कि सपने टूटने के बाद भी जिंदगी खत्म नहीं होती। अफगानिस्तान के लिए खेलने का सपना अधूरा रहा, लेकिन उन्होंने अपने जुनून को जिंदा रखा और फ्रांस के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनकर दिखाया।

उनका सफर हर उस खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल परिस्थितियों में अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

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