BCCI : वीवीएस लक्ष्मण की एंट्री की खबरों पर बीसीसीआई की सफाई

Atul Kumar
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BCCI – गौतम गंभीर भारतीय टेस्ट टीम के कोच बने रहेंगे या नहीं—इस सवाल ने अचानक क्रिकेट गलियारों में शोर मचा दिया है। बीते कुछ दिनों से ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि बीसीसीआई टेस्ट क्रिकेट के लिए अलग रास्ता तलाश रहा है।

कहीं वीवीएस लक्ष्मण का नाम उछल रहा है, कहीं गंभीर की भूमिका पर सवाल। और अब इस बहस में एक नया एंगल जुड़ गया है—इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर का बयान।

पनेसर ने ऐसा सुझाव दिया है, जिसे कुछ लोग सलाह मान रहे हैं और कुछ तंज। उन्होंने कहा है कि अगर गौतम गंभीर को रेड-बॉल क्रिकेट की बारीक समझ बनानी है, तो उन्हें रणजी ट्रॉफी में कोचिंग करनी चाहिए थी।

पनेसर का बयान: सलाह या कटाक्ष?

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में मोंटी पनेसर ने गंभीर की तारीफ और आलोचना—दोनों एक ही सांस में कर दीं।

उनके मुताबिक,
गंभीर ने खुद को एक सफल वाइट-बॉल कोच साबित किया है।
उन्होंने भारत को इस साल चैंपियंस ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई।
सितंबर में टी20 एशिया कप जीत में भी उनका योगदान रहा।

लेकिन जैसे ही बात टेस्ट क्रिकेट पर आई, पनेसर का लहजा बदल गया।

उनका मानना है कि टेस्ट टीम को संभालने के लिए गंभीर को पहले डोमेस्टिक रेड-बॉल सिस्टम को करीब से समझना चाहिए था।

“रणजी ट्रॉफी में कोचिंग करनी चाहिए थी”

पनेसर ने साफ शब्दों में कहा:

“गौतम गंभीर वाइट-बॉल क्रिकेट के अच्छे कोच हैं, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन उन्हें रणजी ट्रॉफी में कोच बनना चाहिए था। वहां के कोचों से बात करनी चाहिए थी, यह समझने के लिए कि रेड-बॉल टीम कैसे बनाई और मैनेज की जाती है।”

यह बयान जितना सीधा दिखता है, उतना ही चुभने वाला भी है।

पनेसर ने आगे यह भी जोड़ दिया कि मौजूदा भारतीय टेस्ट टीम कमजोर दौर से गुजर रही है।

“अभी भारतीय टीम टेस्ट में मजबूत नहीं है। यही सच्चाई है। जब आप तीन बड़े खिलाड़ियों को रिटायर करते हैं, तो नई टीम तैयार करना आसान नहीं होता। इसमें वक्त लगता है।”

बिना नाम लिए यह इशारा साफ तौर पर हाल के सीनियर रिटायरमेंट्स की ओर था, जिसने टेस्ट टीम की रीढ़ बदली है।

लक्ष्मण की एंट्री की खबर और बीसीसीआई की सफाई

पनेसर के बयान से पहले ही कोचिंग को लेकर अटकलें तेज़ थीं।
पिछले हफ्ते PTI की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि—

  • नवंबर में
  • दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ
  • घरेलू टेस्ट सीरीज़ में 2–0 की हार के बाद

बीसीसीआई ने वीवीएस लक्ष्मण से टेस्ट कोच की भूमिका को लेकर अनौपचारिक बातचीत की थी।

यही नहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बोर्ड इससे पहले भी—
जून में राहुल द्रविड़ का कार्यकाल खत्म होने पर—
लक्ष्मण से संपर्क कर चुका था।

लेकिन दोनों बार लक्ष्मण ने साफ मना कर दिया।

क्यों मना करते रहे वीवीएस लक्ष्मण?

लक्ष्मण का रुख शुरू से एक जैसा रहा है।
वह फिलहाल बेंगलुरु में नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) के
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के हेड हैं।

उनका मानना है कि—

  • वे इस भूमिका में खुश हैं
  • और भारतीय क्रिकेट की जड़ें मजबूत करने का काम यहीं से बेहतर कर सकते हैं

यानी इंटरनेशनल कोचिंग का आकर्षण भी उन्हें वहां से हिला नहीं पाया।

बीसीसीआई का आधिकारिक स्टैंड

इन तमाम कयासों पर अब बोर्ड की तरफ से भी जवाब आ चुका है।

बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया ने साफ शब्दों में कहा है कि—

  • टेस्ट क्रिकेट के लिए
  • अलग कोच नियुक्त करने
  • या गंभीर को हटाने जैसी

कोई योजना या विचार फिलहाल नहीं है।

बीसीसीआई के मुताबिक, यह सारी बातें महज अटकलें हैं।
आधिकारिक फैसलों में ऐसा कुछ भी चर्चा में नहीं है।

असल सवाल: गंभीर से उम्मीदें क्यों बढ़ गई हैं?

गौतम गंभीर की छवि हमेशा नो-नॉनसेंस क्रिकेट माइंड की रही है।
एक खिलाड़ी के तौर पर भी और अब कोच के रूप में भी।

वाइट-बॉल क्रिकेट में नतीजे उनके पक्ष में रहे हैं—
ट्रॉफियां, आक्रामक एप्रोच, और साफ रणनीति।

लेकिन टेस्ट क्रिकेट अलग खेल है।
यहां—

  • धैर्य
  • प्रोसेस
  • और लंबे ट्रांजिशन

सब कुछ ज्यादा मायने रखता है।

शायद यही वजह है कि हर हार के बाद कोचिंग मॉडल पर सवाल उठते हैं।

रणजी ट्रॉफी वाला तर्क कितना जायज़?

पनेसर की बात पूरी तरह गलत भी नहीं कही जा सकती।
रणजी ट्रॉफी आज भी—

  • भारतीय टेस्ट क्रिकेट की नर्सरी है
  • जहां खिलाड़ी लंबा खेलना सीखते हैं
  • और कोच धैर्य से टीम बनाते हैं

लेकिन यह कहना कि
इंटरनेशनल लेवल का कोच बनने से पहले रणजी में कोचिंग ज़रूरी है—
यह बहस का मुद्दा ज़रूर है।

क्योंकि इतिहास में ऐसे कई कोच रहे हैं,
जिन्होंने बिना रणजी कोचिंग के भी
इंटरनेशनल स्तर पर सफलता पाई है।

सवाल बने रहेंगे, जवाब वक्त देगा

फिलहाल हकीकत यही है—

  • गौतम गंभीर टेस्ट कोच हैं
  • बीसीसीआई उनके साथ खड़ा है
  • और लक्ष्मण NCA में ही बने हुए हैं

मोंटी पनेसर का बयान
चाहे सलाह हो या तंज—
इसने एक जरूरी बहस को ज़रूर हवा दे दी है।

अब असली फैसला
किसी बयान या रिपोर्ट से नहीं,
बल्कि मैदान पर आने वाले टेस्ट नतीजों से होगा।

क्योंकि भारतीय क्रिकेट में,
आखिर में एक ही चीज बोलती है—
स्कोरबोर्ड।

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Atul Kumar

Atul Kumar

क्रिकेट को देखता हूं और समझता हूं और आप लोगों तक नए-नए सूचनाएं पहुंचाने की कोशिश करता हूं। लाइफ में हमेशा नई-नई चीजों को सीखने का शौक रखता हु, पुराने न्यूज़ को नए तरीके से प्रस्तुत करता हूं।

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