ICC : दुनिया भर की टी20 लीग्स पर नजर रखेगा ICC, बनी नई समिति

Atul Kumar
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ICC – फ्रेंचाइजी क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता अब इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। दुनिया भर में नई-नई टी20 लीग्स शुरू हो रही हैं और खिलाड़ियों के लिए ये टूर्नामेंट आर्थिक रूप से बेहद आकर्षक साबित हो रहे हैं।

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) भी अब इस मुद्दे को गंभीरता से लेने लगी है। इसी वजह से आईसीसी बोर्ड ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट और इंटरनेशनल क्रिकेट के बीच संतुलन बनाने के लिए एक नई समिति के गठन को मंजूरी दे दी है।

आईसीसी का मानना है कि अगर समय रहते कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई, तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का मौजूदा ढांचा प्रभावित हो सकता है। कई देशों के खिलाड़ी अब राष्ट्रीय टीम की बजाय दुनिया भर की टी20 लीग्स को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिससे फ्यूचर टूर प्रोग्राम (FTP) पर भी दबाव बढ़ रहा है।

फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव से चिंतित ICC

पिछले एक दशक में फ्रेंचाइजी क्रिकेट का विस्तार तेजी से हुआ है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ने इसकी शुरुआत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अब दुनिया के लगभग हर बड़े क्रिकेट देश की अपनी टी20 लीग है।

दुनिया की प्रमुख टी20 लीग्स

लीगदेश
IPLभारत
PSLपाकिस्तान
SA20दक्षिण अफ्रीका
ILT20यूएई
BBLऑस्ट्रेलिया
CPLवेस्टइंडीज
BPLबांग्लादेश
The Hundredइंग्लैंड
SLPLश्रीलंका
European T20 Premier Leagueयूरोप

इन लीग्स की बढ़ती संख्या ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर को पहले से कहीं अधिक व्यस्त बना दिया है।

ICC ने क्या कहा?

आईसीसी ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि बोर्ड ने इस विषय पर गंभीर चर्चा की है।

“बोर्ड ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते दायरे पर चिंता जताई और मौजूदा ढांचे के भीतर अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर के साथ फ्रेंचाइजी क्रिकेट के तालमेल का आकलन करने के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया।”

नई समिति यह अध्ययन करेगी कि बढ़ती लीग्स के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए पर्याप्त जगह कैसे सुनिश्चित की जाए।

IPL और अन्य लीग्स ने बदला क्रिकेट का परिदृश्य

फिलहाल आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली क्रिकेट लीग मानी जाती है।

हर साल लगभग दो महीने तक चलने वाला आईपीएल क्रिकेट कैलेंडर का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में ले लेता है। इसके अलावा पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) भी कई बार इसी अवधि के आसपास आयोजित होती है।

इसके बाद SA20, ILT20, CPL और The Hundred जैसी लीग्स साल के अलग-अलग हिस्सों में खेली जाती हैं।

क्रिकेट कैलेंडर पर दबाव

कारणप्रभाव
नई टी20 लीग्सशेड्यूल टकराव
खिलाड़ियों की उपलब्धताराष्ट्रीय टीमों पर असर
अधिक कमाईलीग्स की प्राथमिकता बढ़ी
FTP पर दबावद्विपक्षीय सीरीज प्रभावित

यही वजह है कि कई क्रिकेट बोर्ड अब खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

निकोलस पूरन जैसे उदाहरण बढ़ा रहे चिंता

आईसीसी की चिंता सिर्फ शेड्यूल तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल खिलाड़ियों की प्राथमिकताओं को लेकर है।

वेस्टइंडीज के स्टार बल्लेबाज निकोलस पूरन इसका सबसे चर्चित उदाहरण हैं। उन्होंने 30 वर्ष की उम्र से पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेकर फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया।

इसी तरह दक्षिण अफ्रीका के विस्फोटक बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहकर लीग क्रिकेट पर फोकस किया।

हाल के प्रमुख उदाहरण

खिलाड़ीदेशस्थिति
निकोलस पूरनवेस्टइंडीजअंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास
हेनरिक क्लासेनदक्षिण अफ्रीकाराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ा
सुनील नरेनवेस्टइंडीजलंबे समय से लीग क्रिकेट पर फोकस

इन उदाहरणों ने क्रिकेट प्रशासकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

वेस्टइंडीज सबसे ज्यादा प्रभावित?

विशेषज्ञों का मानना है कि वेस्टइंडीज उन देशों में शामिल है जो इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

कई प्रतिभाशाली कैरेबियाई खिलाड़ी अब सालभर विभिन्न टी20 लीग्स में खेलना पसंद करते हैं। इसकी बड़ी वजह आर्थिक अवसर हैं।

राष्ट्रीय टीम की तुलना में फ्रेंचाइजी क्रिकेट से खिलाड़ियों को अधिक आय और कम दबाव मिलता है।

भारत क्यों है अलग?

इस पूरे परिदृश्य में भारत की स्थिति थोड़ी अलग है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने पंजीकृत प्रथम श्रेणी खिलाड़ियों को विदेशी टी20 लीग्स में खेलने की अनुमति नहीं देता।

यही कारण है कि भारतीय खिलाड़ी मुख्य रूप से आईपीएल और घरेलू क्रिकेट तक सीमित रहते हैं।

भारत और अन्य देशों में अंतर

पहलूभारतअन्य देश
विदेशी लीग खेलने की अनुमतिनहींहां
केंद्रीय अनुबंध का प्रभावअधिकअपेक्षाकृत कम
खिलाड़ियों की उपलब्धतानियंत्रितकई बार सीमित

इस नीति की वजह से भारतीय क्रिकेट को फिलहाल उस स्तर की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

पहले भी आ चुके हैं ऐसे प्रस्ताव

यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है।

पिछले कुछ वर्षों में आईसीसी की विभिन्न समितियों ने सुझाव दिया था कि एक खिलाड़ी साल में सीमित संख्या में ही लीग्स में बतौर फ्रीलांसर खेल सके।

साथ ही यह भी प्रस्ताव था कि खिलाड़ियों को अपने देश के लिए न्यूनतम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं पूरी करनी चाहिए।

हालांकि अब तक इन सुझावों को लागू नहीं किया जा सका है।

आज कई खिलाड़ी सालभर में पांच से छह अलग-अलग लीग्स में खेलते नजर आते हैं।

क्या बदल सकता है आने वाले समय में?

नई समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच बेहतर संतुलन बनाने के लिए ठोस सिफारिशें देगी।

संभावित सुझावों में शामिल हो सकते हैं:

संभावित बदलाव

प्रस्तावउद्देश्य
लीग्स की संख्या सीमित करनाखिलाड़ियों का कार्यभार नियंत्रित करना
अंतरराष्ट्रीय विंडो सुरक्षित करनाराष्ट्रीय क्रिकेट को प्राथमिकता देना
खिलाड़ी भागीदारी नियमदेश और लीग के बीच संतुलन
FTP की सुरक्षाद्विपक्षीय क्रिकेट बचाना

हालांकि किसी भी बदलाव को लागू करना आसान नहीं होगा क्योंकि विभिन्न क्रिकेट बोर्डों और लीग आयोजकों के हित अलग-अलग हैं।

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