Ricky Ponting – दुनिया भर में टी20 इंटरनेशनल और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के लगातार बढ़ते प्रभाव के बीच ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर रिकी पोंटिंग ने वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। दो बार वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान का मानना है कि आने वाले वर्षों में दुनिया भर में टी20 लीग की संख्या बढ़ने के साथ 50 ओवर का क्रिकेट कम खेला जा सकता है।
हालांकि, पोंटिंग का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट को लेकर फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है। जब तक भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख क्रिकेट खेलने वाले देश टेस्ट क्रिकेट में निवेश करते रहेंगे, तब तक यह फॉर्मेट मजबूत बना रहेगा।
टी20 लीग बढ़ीं तो वनडे क्रिकेट को होगा नुकसान?
रिकी पोंटिंग ने पीटीआई के साथ विशेष बातचीत में क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा और दुनिया भर में अधिक टी20 क्रिकेट खेला जाएगा, वैसे-वैसे फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट की संख्या भी बढ़ेगी।
ऐसे में क्रिकेट कैलेंडर में जगह बनाने के लिए किसी न किसी फॉर्मेट को कम करना पड़ेगा और पोंटिंग को लगता है कि इसका सबसे ज्यादा असर 50 ओवर के क्रिकेट पर पड़ सकता है।
पोंटिंग ने इसे लगभग अपरिहार्य स्थिति बताया।
पोंटिंग बोले- मुझे वनडे क्रिकेट खेलना पसंद है
रिकी पोंटिंग खुद वनडे क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में शामिल रहे हैं। उन्होंने इस फॉर्मेट में 13,704 रन बनाए हैं और ऑस्ट्रेलिया को लगातार दो वनडे वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान भी रहे हैं।
यही वजह है कि वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर उनकी चिंता काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पोंटिंग का कहना है कि उन्हें 50 ओवर का क्रिकेट खेलना पसंद है, लेकिन मौजूदा क्रिकेट कैलेंडर में सभी फॉर्मेट को समान मात्रा में जगह देना मुश्किल होता जा रहा है।
टेस्ट क्रिकेट को लेकर पोंटिंग को नहीं है ज्यादा चिंता
वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता जताने के बावजूद रिकी पोंटिंग टेस्ट क्रिकेट को लेकर आशावादी हैं।
उनका मानना है कि अगर भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे बड़े क्रिकेटिंग देश टेस्ट क्रिकेट को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं, तो टेस्ट क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
इन देशों में टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता और व्यावसायिक महत्व के कारण यह फॉर्मेट लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है।
‘कुछ न कुछ तो कम होगा’
पोंटिंग ने क्रिकेट के तीनों प्रारूपों के बीच बढ़ते दबाव को समझाते हुए कहा कि अगर टी20 क्रिकेट लगातार बढ़ता है और टेस्ट क्रिकेट को भी मजबूत बनाए रखा जाता है, तो किसी अन्य फॉर्मेट को कम करना पड़ेगा।
उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में वनडे क्रिकेट के मैचों की संख्या घटने की सबसे ज्यादा संभावना है।
इसका मतलब यह नहीं है कि वनडे क्रिकेट खत्म हो जाएगा, बल्कि भविष्य में यह फॉर्मेट पहले की तुलना में कम खेला जा सकता है।
फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव पर भी बोले पोंटिंग
पोंटिंग खुद फ्रेंचाइजी क्रिकेट से जुड़े हुए हैं। वह वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में ऑस्ट्रेलिया चैंपियंस फ्रेंचाइजी के सह-मालिक हैं।
इसलिए उन्हें क्रिकेट के तेजी से बदलते व्यावसायिक मॉडल की अच्छी समझ है।
दुनिया भर में आईपीएल, बीबीएल, पीएसएल, द हंड्रेड, एसए20 और अन्य टी20 प्रतियोगिताओं की बढ़ती संख्या ने खिलाड़ियों के लिए कम समय में ज्यादा कमाई के अवसर पैदा किए हैं।
लेकिन इसका सीधा दबाव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यस्त कैलेंडर पर भी पड़ रहा है।
क्या क्रिकेट क्लब फुटबॉल जैसा मॉडल अपना सकता है?
रिकी पोंटिंग के पूर्व ऑस्ट्रेलियाई साथी डेविड वॉर्नर ने क्रिकेट के भविष्य को लेकर एक अलग संभावना जताई है।
वॉर्नर का मानना है कि समय के साथ क्रिकेट क्लब फुटबॉल, खासकर इंग्लिश प्रीमियर लीग (EPL) जैसे मॉडल की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
हालांकि, उन्होंने माना कि क्रिकेट में ऐसा मॉडल लागू करना आसान नहीं होगा।
डेविड वॉर्नर ने बताई सबसे बड़ी समस्या
डेविड वॉर्नर के अनुसार, क्रिकेट में सबसे बड़ी समस्या यह है कि दुनिया भर में अलग-अलग फ्रेंचाइजी प्रतियोगिताएं हैं और प्रत्येक लीग में स्थानीय तथा विदेशी खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग नियम हैं।
उनका मानना है कि अगर क्रिकेट को पूरी तरह क्लब फुटबॉल जैसा मॉडल बनाना है तो खिलाड़ियों से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे।
विशेष रूप से स्थानीय और विदेशी खिलाड़ियों की संख्या को लेकर मौजूदा नियम इस तरह के मॉडल के रास्ते में बड़ी बाधा हैं।
एसोसिएट देशों के खिलाड़ियों के लिए भी बढ़ रहे अवसर
टी20 लीग के विस्तार का एक सकारात्मक पहलू भी है।
डेविड वॉर्नर ने माना कि बढ़ते फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट एसोसिएट देशों के खिलाड़ियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
जिन खिलाड़ियों को पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ज्यादा मौके नहीं मिलते, वे अब दुनिया की अलग-अलग टी20 लीग में खेलकर उच्च स्तर के खिलाड़ियों के साथ अनुभव हासिल कर सकते हैं।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच सही संतुलन बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
क्या वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा?
रिकी पोंटिंग के बयान का मतलब वनडे क्रिकेट का खत्म होना नहीं है। बल्कि उनकी चिंता यह है कि क्रिकेट कैलेंडर में जगह की कमी के कारण वनडे मैचों की संख्या धीरे-धीरे कम हो सकती है।
टी20 क्रिकेट कम समय में ज्यादा मनोरंजन और व्यावसायिक अवसर देता है, जबकि टेस्ट क्रिकेट की ऐतिहासिक और खेल संबंधी अहमियत बरकरार है।
ऐसे में वनडे क्रिकेट दोनों के बीच दबाव में आ सकता है।
क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट का भविष्य
| फॉर्मेट | मौजूदा स्थिति | संभावित भविष्य |
|---|---|---|
| टेस्ट | प्रमुख देशों का मजबूत समर्थन | मजबूत बना रह सकता है |
| वनडे | कैलेंडर में जगह का दबाव | मैचों की संख्या घट सकती है |
| टी20 | लगातार विस्तार | फ्रेंचाइजी लीग बढ़ सकती हैं |
पोंटिंग की चिंता क्यों महत्वपूर्ण है?
रिकी पोंटिंग केवल ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज और कप्तान नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों को करीब से देखा है।
उनका वनडे क्रिकेट को लेकर यह आकलन ऐसे समय आया है जब खिलाड़ियों और बोर्ड के सामने अंतरराष्ट्रीय मैचों तथा फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बढ़ रही है।
अगर आने वाले वर्षों में नई टी20 लीग शुरू होती रहती हैं, तो क्रिकेट बोर्डों को खिलाड़ियों के कार्यभार, टेस्ट क्रिकेट की सुरक्षा और वनडे क्रिकेट की प्रासंगिकता के बीच संतुलन बनाना होगा।













