Manjrekar – भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ समय में युवा खिलाड़ियों के मैदान पर आक्रामक व्यवहार को लेकर बहस तेज हो गई है।
पहले वैभव सूर्यवंशी का श्रीलंका ए के खिलाड़ी के साथ विवाद सामने आया और अब टीम इंडिया के स्टार ओपनर यशस्वी जायसवाल भी श्रीलंकाई तेज गेंदबाज असिता फर्नांडो के साथ मैदान पर भिड़ गए। दोनों मामलों में बॉडी कॉन्टैक्ट देखने को मिला।
इसी को लेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने आईसीसी और बीसीसीआई के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर युवा खिलाड़ियों को ऐसे व्यवहार के लिए पर्याप्त सजा नहीं दी गई तो इससे उन्हें गलत संदेश जाएगा और वे भविष्य में इस तरह की हरकत दोहरा सकते हैं।
संजय मांजरेकर ने ICC-BCCI को लगाई फटकार
संजय मांजरेकर ने बुधवार, 26 अगस्त को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस मामले को लेकर पोस्ट किया।
उन्होंने लिखा, “प्रिय ICC और BCCI, हाल ही में इंडिया ए के लिए वैभव और अब जायसवाल… अगर आप उन्हें ऐसे बर्ताव से बचने देते रहेंगे, तो आप उन्हें ऐसा बर्ताव दोहराने की ट्रेनिंग देंगे। यह खेल के लिए और सबसे जरूरी बात उनके अपने भविष्य के लिए भी अच्छा नहीं है।”
मांजरेकर का मुख्य सवाल यह है कि क्या मौजूदा सजा युवा खिलाड़ियों में अनुशासन बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
Yashasvi Jaiswal vs Asitha Fernando: क्या हुआ था?
भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के पहले दिन यशस्वी जायसवाल अच्छी लय में बल्लेबाजी कर रहे थे।
श्रीलंकाई तेज गेंदबाज असिता फर्नांडो ने उन्हें 45 रन के स्कोर पर आउट किया। इसके बाद फर्नांडो के जश्न मनाने के अंदाज और कथित सेंड-ऑफ को लेकर जायसवाल नाराज हो गए।
पवेलियन लौटते समय जायसवाल वापस फर्नांडो की ओर गए। दोनों के बीच बहस हुई और मामला इतना बढ़ गया कि दोनों खिलाड़ियों के सिर आपस में टकरा गए।
यह घटना मैदान पर अनुचित शारीरिक संपर्क के दायरे में आई।
ICC ने दोनों खिलाड़ियों को दी सजा
इस घटना के बाद आईसीसी ने यशस्वी जायसवाल और असिता फर्नांडो के खिलाफ कार्रवाई की।
दोनों खिलाड़ियों पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और उनके खाते में एक-एक डिमेरिट पॉइंट जोड़ा गया।
दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी।
आईसीसी आचार संहिता के आर्टिकल 2.12 के तहत किसी खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ, अंपायर, मैच रेफरी या अन्य व्यक्ति के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क अपराध माना जाता है।
मांजरेकर को सजा लगी कम
संजय मांजरेकर की आपत्ति मुख्य रूप से सजा की गंभीरता को लेकर है।
उनका मानना है कि जब दो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के बीच इस तरह का शारीरिक संपर्क होता है तो सिर्फ जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट पर्याप्त संदेश नहीं देता।
मांजरेकर के अनुसार, युवा खिलाड़ियों को यह समझना जरूरी है कि क्रिकेट मैदान पर आक्रामकता और प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत विवाद को शारीरिक संपर्क तक ले जाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
वैभव सूर्यवंशी का मामला भी आया चर्चा में
मांजरेकर ने यशस्वी जायसवाल के साथ हुई घटना को वैभव सूर्यवंशी के पुराने मामले से भी जोड़ा।
कुछ समय पहले सूर्यवंशी इंडिया ए की ओर से श्रीलंका ए के खिलाफ खेल रहे थे। मैच के दौरान उनकी श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलाम्बागे के साथ तीखी बहस और धक्का-मुक्की हो गई थी।
घटना के दौरान दोनों खिलाड़ियों को अलग करने के लिए दूसरे खिलाड़ियों और अधिकारियों को बीच में आना पड़ा था।
यही वजह है कि मांजरेकर ने दोनों मामलों को एक साथ रखते हुए आईसीसी और बीसीसीआई से युवा खिलाड़ियों के अनुशासन को लेकर ज्यादा सख्त रवैया अपनाने की अपील की है।
क्या खिलाड़ियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए?
क्रिकेट में आक्रामकता और स्लेजिंग लंबे समय से खेल का हिस्सा रहे हैं। लेकिन मौखिक बहस और शारीरिक संपर्क के बीच स्पष्ट अंतर है।
यशस्वी और फर्नांडो के मामले में आईसीसी ने नियमों के तहत कार्रवाई की है। हालांकि, मांजरेकर का तर्क यह है कि सजा का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी होना चाहिए।
युवा खिलाड़ी जब सीनियर क्रिकेटरों को मैदान पर देखते हैं तो उनके व्यवहार से सीखते हैं। इसलिए अनुशासन से जुड़े मामलों में कार्रवाई का असर सिर्फ संबंधित खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहता।
Yashasvi Jaiswal और Vaibhav Suryavanshi विवाद की तुलना
| मामला | घटना | कार्रवाई |
|---|---|---|
| यशस्वी जायसवाल vs असिता फर्नांडो | बहस और शारीरिक संपर्क | 25% मैच फीस जुर्माना + 1 डिमेरिट पॉइंट |
| वैभव सूर्यवंशी vs विशेन हलाम्बागे | बहस और धक्का-मुक्की | आधिकारिक सजा की पुष्टि नहीं |
मांजरेकर की चिंता क्यों अहम है?
संजय मांजरेकर की चिंता सिर्फ एक मैच या एक घटना तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि युवा क्रिकेटरों के करियर की शुरुआत में ही अनुशासन को लेकर स्पष्ट सीमाएं तय करना जरूरी है।
खासकर वैभव सूर्यवंशी जैसे बेहद युवा खिलाड़ी और यशस्वी जायसवाल जैसे भारतीय टीम के नियमित खिलाड़ी अगर मैदान पर शारीरिक टकराव में शामिल होते हैं, तो इसका असर उनकी छवि और भविष्य पर भी पड़ सकता है।
मांजरेकर ने इसी वजह से आईसीसी और बीसीसीआई से ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने की अपील की है।













